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अब नहीं सताएगा महंगे पेट्रोल का डर, ‘रेयर अर्थ’ की किल्लत हुई खत्म, अब ऐसे बचेगा पैसा
Electric Two Wheeler Sales: रेयर अर्थ मैग्नेट की सप्लाई सुधरने से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार फिर रफ्तार पकड़ेगा. आइए विस्तार से जानते हैं कि कैसे ई-स्कूटर पेट्रोल के मुकाबले आपका मोटा पैसा बचाएंगे.

प्रतीकात्मक तस्वीर
Source : freepik
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार, जो पिछले कुछ समय से कई मुश्किलों का सामना कर रहा था, अब दोबारा रफ्तार पकड़ने को तैयार है. सप्लाई की कमी और सरकारी सब्सिडी घटने की वजह से बाजार पर असर जरूर पड़ा, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं. एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री में 16 से 18 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है. इसका सबसे बड़ा कारण रेयर अर्थ मैग्नेट की सप्लाई में सुधार को माना जा रहा है, जिससे कंपनियों को प्रोडक्शन बढ़ाने में आसानी होगी.
रेयर अर्थ मैग्नेट की समस्या कैसे हुई खत्म?
- क्रिसिल की रिपोर्ट बताती है कि रेयर अर्थ मैग्नेट, जो इलेक्ट्रिक मोटर का सबसे अहम हिस्सा होता है, उसकी सप्लाई अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही है. पहले चीन से इन मैग्नेट्स की आपूर्ति में रुकावट आ रही थी, जिससे ई-स्कूटर का प्रोडक्शन प्रभावित हुआ. इसी वजह से FY26 में इलेक्ट्रिक स्कूटर की ग्रोथ घटकर 12 से 13 फीसदी तक रह गई थी. अब जैसे-जैसे सप्लाई सुधर रही है, वैसे-वैसे बाजार में स्थिरता लौटने की उम्मीद है, हालांकि यह ग्रोथ अभी भी FY25 की 22 फीसदी की रिकॉर्ड तेजी से थोड़ी कम रहेगी.
पेट्रोल के मुकाबले इलेक्ट्रिक स्कूटर कितना सस्ता?
- भले ही सरकार की सब्सिडी पहले जैसी न रही हो, लेकिन इलेक्ट्रिक स्कूटर चलाना आज भी पेट्रोल स्कूटर से कहीं ज्यादा सस्ता है. पेट्रोल स्कूटर जहां प्रति किलोमीटर 2 से 2.5 रुपये तक का खर्च कराता है, वहीं इलेक्ट्रिक स्कूटर का खर्च सिर्फ करीब 30 पैसे प्रति किलोमीटर आता है. यही वजह है कि लंबे समय की बचत को देखते हुए लोग तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रहे हैं. अनुमान है कि अगले साल तक कुल टू-व्हीलर बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 7 फीसदी तक पहुंच सकती है.
पुराने ब्रांड्स क्यों हो रहे मजबूत?
- इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में एक बड़ा बदलाव यह भी देखने को मिल रहा है कि बजाज, टीवीएस और हीरो जैसी पुरानी कंपनियां नए स्टार्टअप्स पर भारी पड़ रही हैं. जनवरी 2026 तक इन दिग्गज कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 62 फीसदी हो गई है. इसकी वजह यह है कि इनके पास पेट्रोल और इलेक्ट्रिक दोनों तरह के वाहन हैं, जिससे वे जोखिम को बेहतर तरीके से संभाल पाती हैं. वहीं, सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों को अभी नुकसान झेलना पड़ रहा है और ग्राहक भी अब भरोसेमंद सर्विस वाले ब्रांड्स को तरजीह दे रहे हैं.
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Source: IOCL
























