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GPS लगाकर चोरी की जा रही हैं कारें, इन कारों को खरीदने वाले लोग हो जाएं सावधान
Second Hand Car Safety: GPS लगाकर कार चोरी करने का नया तरीका सामने आया है. आइए जानें सेकेंड हैंड कार खरीदते समय कैसे बचें और ट्रैकर की पहचान कैसे करें.

प्रतीकात्मक तस्वीर
Source : freepik
आज के समय में तकनीक ने हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है, लेकिन इसके साथ कुछ नए खतरे भी सामने आए हैं. अब कार चोरी के तरीके भी पहले से ज्यादा हाई-टेक हो चुके हैं. हाल ही में नोएडा पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो GPS की मदद से कार चोरी करता था. यह मामला खासतौर पर उन लोगों के लिए चेतावनी है, जो सेकेंड हैंड कार खरीदने की सोच रहे हैं.
कैसे काम करता था ये हाई-टेक गिरोह?
- पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह बैंक से जब्त की गई कारों को सस्ते दाम में खरीदता था. इसके बाद ये लोग कार बेचने से पहले उसकी डुपलिकेट चाबी बनवा लेते थे. इतना ही नहीं, कार में चोरी-छिपे GPS ट्रैकर भी फिट कर दिया जाता था. ग्राहक को कार बेच दी जाती थी, लेकिन उसे यह पता नहीं होता था कि उसकी कार हर समय ट्रैक की जा रही है.
GPS से मिलती थी रियल टाइम लोकेशन
- कार में लगाया गया GPS सीधे अपराधियों के मोबाइल फोन से जुड़ा रहता था. जैसे ही मौका मिलता, GPS की मदद से कार की सही लोकेशन पता कर ली जाती थी. फिर डुपलिकेट चाबी से कार को आसानी से अनलॉक कर लिया जाता और चोर कार लेकर फरार हो जाते थे. इसी तरह एक ग्रे रंग की टाटा नेक्सन कार भी चोरी की गई थी, जिसे बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया. इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो पहले भी ऐसी वारदात कर चुके थे.
सेकेंड हैंड कार खरीदते समय क्यों जरूरी है सावधानी?
- अगर आप सेकेंड हैंड कार खरीद रहे हैं, तो यह घटना आपके लिए बड़ा सबक है. कार की हालत और कागजों की जांच के साथ-साथ यह भी देखना जरूरी है कि कहीं उसमें GPS ट्रैकर तो नहीं लगा है. कई बार डीलर या पुराने मालिक की जानकारी के बिना भी कार में ट्रैकर हो सकता है.
कैसे पहचानें कार में GPS ट्रैकर?
- कार के डैशबोर्ड के नीचे और OBD II पोर्ट के आसपास जरूर जांच करें. यह पोर्ट आमतौर पर स्टीयरिंग के नीचे होता है. आगे और पीछे की सीटों के नीचे हाथ डालकर देखें, क्योंकि मैग्नेटिक ट्रैकर अक्सर वहीं छिपाए जाते हैं. इसके अलावा डैशबोर्ड के अंदरूनी हिस्सों, स्टोरेज बॉक्स और कार के बाहरी बंपर के नीचे भी चेक करना जरूरी है. बता दें कि सेकेंड हैंड कार खरीदना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही आपको बड़ी परेशानी में डाल सकती है. कार खरीदने से पहले पूरी जांच करें, ताकि आपकी कार सुरक्षित रहे और आप किसी हाई-टेक चोरी का शिकार न बनें.
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