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Kia की पुरानी कारों पर मिलेगी 2 साल की वारंटी, कंपनी ने लॉन्च किया 100वां CPO आउटलेट
Kia India ने अपने 100वें CPO आउटलेट की शुरुआत कर दी है और अब पुरानी सर्टिफाइड कारों पर 2 साल या 40,000 KM की वारंटी दे रही है. आइए विस्तार से जानते हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर
Source : PTI
किआ इंडिया ने भारत में अपने 100वें 'किआ सर्टिफाइड प्री-ओन्ड' (CPO) आउटलेट की शुरुआत कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. महज तीन साल से भी कम समय में यह मुकाम पाकर किआ भारत में सबसे तेजी से प्री-ओन्ड नेटवर्क खड़ा करने वाली कंपनियों में शामिल हो गई है.
किव कारों पर मिलेगी 2 साल की वारंटी?
- किआ इंडिया ने अपने सर्टिफाइड प्री-ओन्ड (CPO) वाहनों पर अब ग्राहकों को 2 साल या 40,000 किलोमीटर की वारंटी देने की सुविधा शुरू की है. इसके साथ ही कंपनी 4 बार फ्री सर्विस (पीरियॉडिक मेंटेनेंस) भी दे रही है. इस नई सुविधा की वजह से किआ का यह प्रोग्राम अब भारत के सबसे भरोसेमंद यूज्ड कार प्रोग्राम्स में शामिल हो गया है.
- दरअसल, किआ का CPO नेटवर्क अब भारत के 70 से अधिक शहरों में फैल चुका है और कंपनी के कुल रिटेल नेटवर्क का लगभग 60% हिस्सा बन चुका है. इससे साफ है कि भारतीय ग्राहक अब हाई-क्वालिटी सर्टिफाइड यूज्ड कार्स की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.
किआ इंडिया के चीफ सेल्स ऑफिसर का बयान
- किआ इंडिया के चीफ सेल्स ऑफिसर मिस्टर जूनसू चो ने कहा, “भारत में महज 3 साल में 100 CPO आउटलेट्स तक पहुंचना हमारे ब्रांड पर ग्राहकों के भरोसे का प्रमाण है. हमारा CPO बिजनेस एक रणनीतिक विकास चालक बन चुका है जो गुणवत्ता, सेवा और विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है.” उन्होंने बताया कि कंपनी अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म और डिजाइन-फॉरवर्ड आउटलेट्स के माध्यम से प्री-ओन्ड सेगमेंट को एक नया रूप दे रही है.
क्वालिटी चेक के बाद ही मिलती है सर्टिफाइड कार
- किआ की सर्टिफाइड पुरानी कारों को बाजार में लाने से पहले 175-पॉइंट की कड़ी जांच प्रक्रिया से गुजारा जाता है. केवल उन्हीं कारों को सर्टिफिकेशन दिया जाता है जो 1,00,000 किलोमीटर से कम चली हों, जिनमें कोई स्ट्रक्चरल डैमेज न हो, जो किआ के असली पार्ट्स से रिफर्बिश की गई हों और जिनका पूरा स्वामित्व और सर्विस रिकॉर्ड उपलब्ध हो.
- किआ के CPO आउटलेट्स केवल पुरानी किआ कारों की बिक्री तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यहां ग्राहक किसी भी ब्रांड की कार खरीद, बेच या एक्सचेंज भी कर सकते हैं. पूरी प्रक्रिया डिजिटल होती है, जिससे समय और कागजी झंझट दोनों से राहत मिलती है.
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