क्या पेट्रोल से सस्ता पड़ता है एथेनॉल? समझ लीजिए पूरे खर्च का गणित
Is Ethanol Cheaper than Petrol: क्या पेट्रोल के मुकाबले एथेनॉल से गाड़ी चलाना सच में सस्ता पड़ता है? जानिए कीमत, माइलेज की गिरावट और इंजन के मेंटेनेंस से जुड़ा पूरे खर्च का गणित.

Is Ethanol Cheaper than Petrol: भारत में अब हर पंप पर एथेनॉल बिकना अनिवार्य हो गया है. सरकार भी पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने पर पूरा जोर दे रही है ताकि प्रदूषण कम हो और कच्चे तेल की भी आयात कम हो सके. जबकि एथेनॉल फ्यूल को लेकर अभी सबके दिमाग में एक आम सवाल यही उठता है कि क्या सच में एथेनॉल से गाड़ी चलाना पेट्रोल के मुकाबले सस्ता पड़ता है? क्या एथेनॉल के इस्तेमाल से हमारी जेब को सीधा फायदा पहुंचता है तो चलिए आज इस खबर में जानतें हैं इसके पूरे खर्च का गणित.
एथेनॉल और पेट्रोल की कीमत में कितना फर्क है?
अगर जब सीधे तौर पर सिर्फ कीमत की बात करें तो एथेनॉल पेट्रोल के मुकाबले काफी सस्ता है. जहां देश के ज्यादातर हिस्सों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास या बिक रहा है.
वहीं एथेनॉल की कीमत लगभग 60 से 65 रुपये प्रति लीटर के आसपास बैठती है. इस हिसाब से देखा जाए तो पहली नजर में एथेनॉल बहुत ही फायदे का सौदा नजर आता है. सरकार का टारगेट भी यही है कि पेट्रोल में 20% तक एथेनॉल मिलाकर आम जनता को महंगे ईंधन से थोड़ी राहत दी जा सके.
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माइलेज का पूरा गणित
बता दें कि, एथेनॉल की कीमत भले कम हो लेकिन एथेनॉल के साथ एक बड़ा पेच माइलेज का फंसता है. वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो एथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी यानी ऊर्जा क्षमता शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले करीब 30% कम होती है. इसका सीधा मतलब यह है कि 1 लीटर एथेनॉल में आपकी गाड़ी उतनी दूरी तय नहीं कर पाएगी जितनी 1 लीटर शुद्ध पेट्रोल में करती है.
जब आप 100% एथेनॉल या बहुत ज्यादा ब्लेंडेड फ्यूल का इस्तेमाल करते हैं तो गाड़ी का माइलेज करीब 15 से 20% तक गिर जाता है. यानी कम कीमत का फायदा कम माइलेज के कारण थोड़ा बराबर हो जाता है.
मेंटेनेंस का खर्च
जानकारी के लिए बता दें एथेनॉल स्वभाव से थोड़ा नमी सोखने वाला होता है. जिसके कारण यह इंजन के कुछ हिस्सों जैसे रबर पाइप और एल्युमिनियम पार्ट्स को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकता है.
पुरानी कार या बाइक में अगर आप बिना बदलाव के ज्यादा एथेनॉल वाला फ्यूल डालते हैं तो मेंटेनेंस का खर्च बढ़ सकता है. आजकल बाजार में नई फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां आ रही हैं जिनके इंजन को खास तौर पर एथेनॉल झेलने के लिए ही बनाया गया है. उन गाड़ियों में इस मेंटेनेंस का खतरा नहीं रहता है.
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