स्क्रैपिंग से मिलेगी राहत? 5 साल और चल सकेंगी ये गाड़ियां
Government Proposes Vehicle Age Limit Extension: सड़क परिवहन मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक, सीएनजी और हाइड्रोजन से चलने वाली व्यावसायिक गाड़ियों की उम्र सीमा 5 साल बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है.

Government Proposes Vehicle Age Limit Extension: हमारे देश में प्रदुषण बहुत ही ज्यादा है जिसके चलते हमारी सरकार इसे कम करने ले लिए लगातार कोशिश कर रही है. अब बड़े शहरों में प्रदुषण को नियंत्रण में रखने के लिए कई नियम भी लागु किए गए हैं. जबकि अब प्रदूषण घटाने और कमर्शियल गाड़ियों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक बेहद राहत भरा कदम उठाया है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स 1989 में संशोधन का एक नया ड्राफ्ट जारी किया है.
अब इस नए प्रस्ताव के तहत क्लीन और ग्रीन फ्यूल यानी इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और सीएनजी से चलने वाले कमर्शियल वाहनों की निर्धारित उम्र सीमा को 5 साल तक बढ़ाने का फैसला किया गया है. सरकार का यह कदम अब स्क्रैपिंग पॉलिसी से परेशान कार मालिकों को बड़ी राहत दे सकता है. तो चलिए विस्तार से समझते हैं कि इस नए ड्राफ्ट में किन-किन गाड़ियों को शामिल किया गया है और इससे आम जनता व ट्रांसपोर्टर्स को कितना फायदा होगा.
इन कमर्शियल गाड़ियों की बढ़ेगी लाइफ
आपको बता दें कि, सरकारी ड्राफ्ट के मुताबिक मुख्य रूप से नेशनल परमिट सिस्टम के तहत आने वाले गुड्स कैरिज वाहनों की लाइफ बढ़ाई जा रही है. वर्तमान नियमों के तहत किसी भी मल्टी-एक्सल कमर्शियल गाड़ी को 15 साल और अन्य गुड्स कैरिज गाड़ियों को 12 साल पूरे होने के बाद नेशनल परमिट नहीं मिलता है और उन्हें रिप्लेस करना पड़ता था.
लेकिन सरकार के नए ड्राफ्ट में बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों, हाइड्रोजन फ्यूल वाहनों और सीएनजी/नेचुरल गैस से चलने वाले कमर्शियल वाहनों के लिए इस सीमा को 5 साल बढ़ाने का प्रस्ताव है. यानी अब 12 साल की सीमा वाली गाड़ियां 17 साल और 15 साल की सीमा वाली गाड़ियां 20 साल तक नेशनल परमिट के साथ सड़कों पर आसानी से दौड़ सकेंगी.

यह भी पढ़ें: Activa को टक्कर देंगे Yamaha के नए स्कूटर, धांसू फीचर्स और कीमत भी कम
ग्रीन मोबिलिटी को मिलेगा बढ़ावा
बता दें कि, सरकार के इस कदम के पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन से चलने वाली कमर्शियल गाड़ियों की शुरुआती खरीद कीमत काफी ज्यादा होती है. भारी-भरकम पैसे लगाने के बाद अगर ट्रांसपोर्टर्स को केवल 12 या 15 साल का ही समय मिले तो उन्हें अपनी लागत वसूलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था.
जिसके चलते अब गाड़ियों के उम्र सीमा में 5 साल के अतिरिक्त समय मिलने से अब वाहन मालिकों को अपनी गाड़ियों से बेहतर कमाई करने का मौका मिलेगा. इससे न सिर्फ भारी लॉजिस्टिक्स सेक्टर को राहत मिलेगी बल्कि ज्यादा से ज्यादा ट्रांसपोर्टर्स अपनी पुरानी डीजल-पेट्रोल गाड़ियों को छोड़कर इलेक्ट्रिक और सीएनजी जैसे स्वच्छ ईंधन विकल्पों की तरफ आकर्षित होंगे.

5 साल के लिए मिलेगा इलेक्ट्रॉनिक नेशनल परमिट
वहीं, इस नए ड्राफ्ट में केवल गाड़ियों की उम्र सीमा ही नहीं बढ़ाई गई है बल्कि नेशनल परमिट लेने की कागजी प्रक्रिया को भी काफी डिजिटल और आसान बना दिया गया है. अब तक वाहन मालिकों को हर साल अपना नेशनल परमिट रिन्यू कराना पड़ता था लेकिन अब उन्हें एक ही बार में 5 साल तक के लिए इलेक्ट्रॉनिक परमिट पाने का विकल्प दिया जाएगा.
आप इसके लिए सालाना 16,500 रुपये की फीस के हिसाब से 5 साल के लिए 82,500 रुपये की फीस जमा करके एकमुश्त परमिट हासिल कर सकते हैं. फॉर्म 46 और फॉर्म 47 के जरिए पूरी आवेदन प्रक्रिया और फीस पेमेंट इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ऑनलाइन हैंडल की जाएगी जिससे आरटीओ दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.
वाहन पोर्टल से जुड़ेगा डेटा
आपको बता दें कि, प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार वाहन पोर्टल का उपयोग बढ़ा रही है. नए नियमों के तहत जैसे ही डीलरशिप कोड या वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर डाला जाएगा मालिक का विवरण, जीएसटी नंबर, पैन और लोन अकाउंट जैसी जानकारियां पोर्टल से अपने आप फैच हो जाएंगी. इसके अलावा बिना बॉडी वाले नए चेसिस के लिए अस्थायी रजिस्ट्रेशन की वैधता अवधि भी 6 महीने तय करने का प्रस्ताव है.
सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस नए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर आम जनता, ऑटो एक्सपर्ट्स और स्टेकहोल्डर्स से 30 दिनों के भीतर सुझाव व आपत्तियां मांगी हैं. 30 दिन का समय पूरा होने के बाद इस प्रस्ताव को ऑफिशियल करके पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा.
यह भी पढ़ें: 227 KM रेंज के साथ हैंड पेंटेंड डिजाइन, लॉन्च हुआ नया थ्री-व्हीलर























