भारत में स्मार्ट ड्राइविंग की शुरुआत, अब V2X टेक्नोलॉजी से आपस में बात करेंगी गाड़ियां
भारत सरकार जल्द ही देश में V2X टेक्नोलॉजी लागू करने की तैयारी में है. इस एडवांस सिस्टम के जरिए गाड़ियां आपस में कम्युनिकेशन कर सकेंगी और संभावित हादसे से पहले ही ड्राइवर को अलर्ट मिल जाएगा.

आज की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब गाड़ियां भी सिर्फ चलने का साधन नहीं रह गई हैं. V2X यानी व्हीकल-टू-एवरीथिंग टेक्नोलॉजी इसी बदलाव का हिस्सा है. इस टेक्नोलॉजी में गाड़ियां एक-दूसरे से और आसपास की चीजों से जुड़ जाती हैं. इसका मतलब है कि वाहन आपस में जानकारी शेयर कर सकते हैं. जैसे अगर आगे चल रही गाड़ी अचानक ब्रेक लगाती है, तो पीछे आने वाली गाड़ी को पहले ही चेतावनी मिल जाएगी. इससे ड्राइवर को समय रहते संभलने का मौका मिलता है.
V2X के चार मुख्य हिस्से होते हैं. पहला है व्हीकल-टू-व्हीकल, जिसमें गाड़ियां एक-दूसरे से बात करती हैं. दूसरा है व्हीकल-टू-इन्फ्रास्ट्रक्चर, जिसमें गाड़ियां ट्रैफिक सिग्नल या सड़क से जुड़ती हैं. तीसरा है व्हीकल-टू-पेडेस्ट्रियन, जो पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए काम करता है. चौथा है व्हीकल-टू-नेटवर्क, जिसमें मोबाइल नेटवर्क के जरिए जानकारी मिलती है. इस तरह गाड़ी एक स्मार्ट सिस्टम बन जाती है, जो हर पल अपडेट रहती है.
भारत में इस टेक्नोलॉजी की जरूरत क्यों है?
भारत में सड़क हादसे एक बड़ी समस्या हैं. हर साल हजारों लोग दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं. इन हादसों का सबसे बड़ा कारण मानवीय गलती और समय पर Reaction न देना होता है. कई बार ड्राइवर को खतरे का पता देर से चलता है, जिससे दुर्घटना हो जाती है. यहीं पर V2X टेक्नोलॉजी मदद कर सकती है. यह टेक्नोलॉजी पहले से ही खतरे की जानकारी देकर ड्राइवर को सतर्क करती है. इससे प्रतिक्रिया का समय बढ़ जाता है और दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है. भारत जैसे देश में, जहां ट्रैफिक ज्यादा है और सड़कें हमेशा व्यस्त रहती हैं, वहां यह टेक्नोलॉजी बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है. इसके जरिए ट्रैफिक जाम भी कम किए जा सकते हैं, क्योंकि गाड़ियां सिग्नल से बात करके अपनी गति को नियंत्रित कर सकती हैं.
दुनिया के कई देशों में शुरू हो चुका है इस्तेमाल
दुनिया के कई देश पहले ही इस टेक्नोलॉजी पर काम शुरू कर चुके हैं. अमेरिका में कनेक्टेड व्हीकल प्रोजेक्ट्स के तहत गाड़ियां और ट्रैफिक सिस्टम आपस में जुड़े हुए हैं. वहां ट्रैफिक सिग्नल भी डेटा शेयर करते हैं, जिससे ट्रैफिक को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है. यूरोप में भी कई देशों ने इस टेक्नोलॉजी का Test किया है. जर्मनी, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे देशों में स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम लागू किए जा रहे हैं. चीन इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और वहां 5G नेटवर्क के जरिए गाड़ियां आपस में जुड़ रही हैं. जापान में भी गाड़ियां और ट्रैफिक सिस्टम पहले से ही रियल टाइम में काम कर रहे हैं. इन सभी उदाहरणों से साफ है कि V2X भविष्य की जरूरत बन चुकी है.
भारत में लागू करने की चुनौतियां
ये टेक्नोलॉजी बहुत फायदेमंद है, लेकिन भारत में इसे लागू करना आसान नहीं होगा. इसके लिए सही स्पेक्ट्रम की जरूरत होगी और अलग-अलग कंपनियों के बीच तालमेल बनाना होगा. साथ ही डेटा की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है, क्योंकि इसमें बहुत सारी जानकारी शेयर होती है. इसके अलावा हर गाड़ी में जरूरी उपकरण लगाना और पूरे देश में नेटवर्क तैयार करना भी बड़ी चुनौती है. अभी 5G नेटवर्क हर जगह उपलब्ध नहीं है, जिससे इस टेक्नोलॉजी को लागू करने में समय लग सकता है.
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Source: IOCL

























