Explainer: क्या फ्यूचर कार बनेंगी EV या नई समस्या की शुरुआत? चौंका देंगे इसके साइड इफेक्ट्स
आजकल हर तरफ इलेक्ट्रिक व्हीकल की चर्चा हो रही है. सरकार से लेकर बड़ी-बड़ी कंपनियां तक EV को भविष्य बता रही हैं.आइए इस आर्टिकल में समझते हैं कि क्या इलेक्ट्रिक कारें भविष्य हैं या नई समस्याएं लाएंगी?

आज के समय में इलेक्ट्रिक कारें (EV) तेजी से पॉपुलर हो रही हैं. पेट्रोल-डीजल महंगे होते जा रहे हैं और प्रदूषण भी बढ़ रहा है, इसलिए लोग EV की तरफ जा रहे हैं. सरकार भी EV को बढ़ावा दे रही है. लेकिन हर नई टेक्नोलॉजी के साथ कुछ नई समस्याएं भी आती हैं. EV कारें भी इससे अलग नहीं हैं. जहां ये पर्यावरण के लिए बेहतर मानी जाती हैं, वहीं इनके कुछ साइड इफेक्ट्स भी सामने आने लगे हैं, जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहे हैं.
क्यों बढ़ रही है EV की डिमांड?
EV कारों का सबसे बड़ा फायदा है कि ये धुआं नहीं छोड़तीं, जिससे हवा साफ रहती है. शहरों में प्रदूषण कम करने के लिए यह एक अच्छा विकल्प माना जा रहा है. इसके अलावा EV चलाना सस्ता पड़ता है. पेट्रोल-डीजल की जरूरत नहीं होती और चार्जिंग का खर्च भी कम होता है. मेंटेनेंस भी कम होता है क्योंकि इंजन के पार्ट्स कम होते हैं. इसी वजह से अब धीरे-धीरे लोग EV को अपनाने लगे हैं और कंपनियां भी नए मॉडल लॉन्च कर रही हैं.
EV के साइड इफेक्ट्स
EV के साथ सबसे बड़ी चिंता इसकी बैटरी को लेकर है. बैटरी बहुत महंगी होती है और अगर खराब हो जाए तो बदलना मुश्किल और खर्चीला होता है. दूसरी बड़ी समस्या है बैटरी से जुड़ी सुरक्षा. हाल के समय में कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जहां EV कार या स्कूटर में आग लग गई. उदाहरण के लिए, इंदौर में एक EV कार चार्जिंग के दौरान आग लगने का मामला सामने आया था, जिसने लोगों को चिंतित कर दिया. ऐसे ही कई मामलों में EV स्कूटर भी चलते-चलते या चार्जिंग के समय आग पकड़ चुके हैं. इसका कारण बैटरी का ज्यादा गर्म होना या खराब क्वालिटी हो सकता है. हालांकि ये घटनाएं बहुत ज्यादा नहीं हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता.
चार्जिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की परेशानी
EV खरीदने के बाद सबसे बड़ी दिक्कत आती है चार्जिंग की. अभी हर जगह चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध नहीं हैं, खासकर छोटे शहरों में. अगर आप लंबी जर्नी पर जा रहे हैं, तो बीच में चार्जिंग की चिंता बनी रहती है. कई बार चार्जिंग में काफी समय भी लग जाता है, जो लोगों के लिए परेशानी बन सकता है. इसी कारण कई लोग अभी भी पेट्रोल या डीजल कार को ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं.
क्या EV से बिजली पर बढ़ेगा बोझ?
अगर आने वाले समय में सभी लोग EV इस्तेमाल करने लगेंगे, तो बिजली की मांग बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी. इससे पावर सिस्टम पर दबाव पड़ेगा. और अगर यह बिजली कोयला जैसे स्रोतों से बनेगी, तो प्रदूषण कम होने के बजाय एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट हो जाएगा. यानी सड़कों से कम होगा, लेकिन बिजली घरों में बढ़ सकता है. इसलिए EV के साथ साफ ऊर्जा का इस्तेमाल भी जरूरी है.
बैटरी बदलने का भारी खर्च (Battery Cost)
ईवी का सबसे बड़ा खर्च तब सामने आता है जब इसकी बैटरी खराब हो जाती है. ऐसे में बैटरी पैक बदलना पड़ता है, जिसकी लागत काफी ज्यादा होती है और कई इलेक्ट्रिक कारों में यह खर्च लाखों रुपये तक पहुंच सकता है.
क्या EV ही भविष्य हैं?
EV निश्चित रूप से भविष्य का हिस्सा हैं, लेकिन अभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं हैं. अभी इसमें कई सुधार की जरूरत है, जैसे बेहतर बैटरी, ज्यादा चार्जिंग स्टेशन और सस्ती तकनीक. बैटरी, चार्जिंग और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी काम चल रहा है. इंदौर जैसे घटनाएं हमें यह बताते हैं कि नई टेक्नोलॉजी को अपनाने से पहले उसकी सुरक्षा और गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है.
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Source: IOCL



























