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E20 के बाद अब E25, E30 और E85 की बारी! सरकार ने कहा- चल रही है टेस्टिंग, जानें डिटेल्स

E25 Fuel Testing: अब E25, E27, E30 और भविष्य में E85 जैसे ज्यादा एथेनॉल वाले फ्यूल पर भी काम चल रहा है. इनके लिए ट्रायल तकनीकी मानक और इंजन टेस्टिंग जारी है.

देश में E20 पेट्रोल को लेकर बहस अभी थमी भी नहीं है, लेकिन सरकार और ऑटो इंडस्ट्री की नजर अब E25, E30 और यहां तक कि E85 जैसे ज्यादा एथेनॉल वाले फ्यूल पर है. हालांकि फिलहाल सरकार E25 को जल्दबाजी में पूरे देश में लागू करने के मूड में नहीं दिख रही.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, करोड़ों पुरानी गाड़ियों की तकनीकी सीमाओं और कार मालिकों की बढ़ती चिंताओं को देखते हुए अब ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल की तरफ धीरे-धीरे बढ़ने की तैयारी है.

E20 तो आ गया अब आगे क्या?

भारत ने तय समय से पहले पूरे देश में E20 पेट्रोल उपलब्ध करा दिया लेकिन सरकार का बायोफ्यूल रोडमैप यहीं खत्म नहीं होता. अब E25, E27, E30 और भविष्य में E85 जैसे ज्यादा एथेनॉल वाले फ्यूल पर भी काम चल रहा है. इनके लिए ट्रायल तकनीकी मानक और इंजन टेस्टिंग जारी है. यानी आने वाले सालों में भारतीय पेट्रोल पंपों पर E20 के अलावा ज्यादा एथेनॉल वाले फ्यूल भी दिख सकते हैं लेकिन उससे पहले यह तय करना जरूरी है कि देश की करोड़ों गाड़ियां इसके लिए तैयार हैं या नहीं.

सरकार ने अचानक रफ्तार क्यों धीमी की?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सबसे बड़ी चुनौती देश में पहले से चल रही करोड़ों गाड़ियां हैं. अप्रैल 2023 से पहले बनी ज्यादातर गाड़ियां E10 के हिसाब से तैयार की गई थीं. अप्रैल 2023 से मार्च 2025 के बीच बनी गाड़ियां E20 झेल सकती हैं लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक उनका इंजन भी पूरी तरह E20 के लिए ट्यून नहीं है क्योंकि माइलेज पर असर तो पड़ रहा है. हालांकि अप्रैल 2025 के बाद बनी नई गाड़ियां ही पूरी तरह E20 कम्प्लायंट मानी जाती हैं. ॉ

इसका मतलब यह है कि देश में बड़ी संख्या में ऐसी गाड़ियां हैं, जिन्हें 20 फीसदी से ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल के लिए डिजाइन ही नहीं किया गया था. यही वजह है कि सरकार अब अगला कदम फूंक-फूंककर रखना चाहती है.

E25 आने पर क्या बदल सकता है?

अगर बिना पूरी तैयारी के E25 लागू किया गया तो तीन बड़े सवाल खड़े हो सकते हैं. पहला माइलेज है एथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले ऊर्जा कम होती है. ऐसे में ब्लेंड बढ़ने पर माइलेज कम हो सकता है. अगर इंजन उसी हिसाब से ट्यून नहीं है तो फ्यूल की खपत और बढ़ सकती है.

दूसरा गाड़ी के पुर्जे हैं. ज्यादा एथेनॉल पुरानी गाड़ियों में रबर होज, सील, ओ-रिंग, फ्यूल पंप और कुछ प्लास्टिक पार्ट्स पर ज्यादा असर डाल सकता है. हाल की ARAI स्टडी में भी पुराने E10 वाहनों में कुछ रबर पार्ट्स के जल्दी खराब होने की बात सामने आई थी हालांकि टू-व्हीलर्स में बड़ी समस्या नहीं मिली.

तीसरा जेब पर असर है. ज्यादा एथेनॉल के लिए तैयार न होने वाली गाड़ियों में फ्यूल सिस्टम की ज्यादा निगरानी है. कुछ पुर्जों को बदलने और ज्यादा सर्विसिग की जरूरत पड़ सकती है.

क्या पेट्रोल पंप पर मिलेगा ऑप्शन?

ऑटो इंडस्ट्री के कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि सभी गाड़ियों पर एक जैसा फ्यूल लागू करने की बजाय लोगों को ऑप्शन मिलना चाहिए. यानी जिसकी गाड़ी E20 के लिए बनी है वह E20 भरवाए और भविष्य में जो गाड़ी E25 या उससे ज्यादा ब्लेंड के लिए तैयार हों वे वही फ्यूल इस्तेमाल करें. कई देशों में अलग-अलग ग्रेड का पेट्रोल इसी तरह मौजूद है.

लंबे टाइम में फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल यानी FFV को सबसे बड़ा समाधान माना जा रहा है. ये गाड़ियां E20, E25, E30 और यहां तक कि E85 जैसे अलग-अलग ब्लेंड पर खुद को एडजस्ट कर सकती हैं. कई ऑटो कंपनियां ऐसे मॉडल पर काम कर रही हैं और सरकार भी इस तकनीक को बढ़ावा दे रही है.

रुका नहीं है प्लान बस बदली है चाल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, E25 पर काम बंद नहीं हुआ है. E22, E25, E27 और E30 जैसे फ्यूल के लिए ट्रायल, इंजन टेस्ट और तकनीकी अध्ययन जारी हैं. इन ट्रायल्स से मिलने वाले नतीजों के आधार पर ही आगे की नीति तय की जाएगी.

भारत एथेनॉल पर इतना जोर क्यों दे रहा है?

सरकार का मानना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से कच्चे तेल का आयात कम होगा, विदेशी मुद्रा बचेगी, किसानों की आय बढ़ेगी और प्रदूषण घटेगा. इसी लक्ष्य के तहत E20 लागू किया गया लेकिन अब साफ है कि E25, E30 और E85 की तरफ बढ़ने से पहले सरकार कार तकनीक, इंजन की सुरक्षा और आम लोगों की जेब इन तीनों का बैलेंस बनाकर आगे बढ़ना चाहती है.

E25 को टालने या उसकी रफ्तार धीमी करने को लेकर फिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने मंगलवार को कहा है कि टेस्टिंग के साथ ही E25 लाया जाएगा.

यह भी पढ़ें:-

Petrol Pump Myths: दिन या रात... पेट्रोल भरवाने का सही समय क्या है, क्या इसका भी माइलेज पर पड़ता है असर? 

 

About the author वरुण भसीन

वरुण भसीन एबीपी न्यूज़ में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. पिछले 9 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वे एयरलाइंस, रेलवे और सड़क-परिवहन से जुड़ी खबरें कवर करते हैं. इससे पहले वे कई संस्थानों में काम कर चुके हैं. वरुण न्यूज जगत से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाते आए हैं. वरुण ने MBM यूनिविर्सिटी जोधपुर से पढ़ाई की है. संपर्क करने के लिए मेल आईडी है- varunb@abpnetwork.com

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