E20 के चलते CNG-EV कारों का बढ़ा वेटिंग पीरियड, इतने महीनों करना पड़ेगा इंतजार
यह ट्रेंड सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों तक सीमित नहीं है. इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की मांग में भी तेजी आई है. इलेक्ट्रिक स्कूटर की पूछताछ और मांग में करीब 30 से 40 फीसदी तक बढ़ोतरी देखी गई है.

देश में पेट्रोल में 20 फीसदी तक इथेनॉल मिलाने यानी E20 फ्यूल को लेकर चर्चा तेज है. इसी बीच इलेक्ट्रिक और CNG गाड़ियों की मांग में भी तेजी देखने को मिल रही है. इसका असर अब इन गाड़ियों की डिलीवरी पर दिखाई देने लगा है. डीलर्स के मुताबिक, कई EV और CNG कारों की पूछताछ और बुकिंग पहले के मुकाबले बढ़ी है. कुछ पॉपुलर इलेक्ट्रिक कारों के चुनिंदा वेरिएंट के लिए ग्राहकों को 18 से 24 हफ्ते यानी करीब 126 से 168 दिन तक इंतजार करना पड़ सकता है.
इलेक्ट्रिक और CNG पैसेंजर कारों की बुकिंग में 30 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. खास तौर पर उन इलेक्ट्रिक कारों की मांग ज्यादा बढ़ी है, जिन्हें कुछ महीने पहले बुक करने के बाद करीब एक महीने में डिलीवरी मिल जाती थी. अब कुछ मामलों में ऐसी गाड़ियों की डिलीवरी के लिए 3 से 4 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है. हालांकि, हर इलेक्ट्रिक कार का वेटिंग पीरियड इतना लंबा नहीं है. यह मॉडल, बैटरी पैक, वेरिएंट और डीलर के पास मौजूद स्टॉक पर निर्भर करता है.
कितना करना पड़ेगा इंतजार?
- लंबे वेटिंग पीरियड का असर खास तौर पर Tata Tiago EV और Tata Punch EV के कुछ वेरिएंट पर देखने को मिल रहा है. इन दोनों कारों के कुछ वेरिएंट के लिए 18 से 24 हफ्ते तक का वेटिंग पीरियड बताया जा रहा है. इनमें कम कीमत वाले और छोटी बैटरी वाले वेरिएंट भी शामिल हैं. इनकी मांग इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि ये इलेक्ट्रिक कारों की दुनिया में किफायती ऑप्शन मानी जाती हैं.

- इसके उलट Tata Curvv EV के लिए स्थिति काफी अलग है. इस इलेक्ट्रिक SUV की डिलीवरी के लिए करीब एक से दो सप्ताह का इंतजार बताया जा रहा है. इससे साफ होता है कि वेटिंग सिर्फ कंपनी या मॉडल की लोकप्रियता पर निर्भर नहीं करता, बल्कि किसी खास वेरिएंट की मांग और उसके प्रोडक्शन पर भी काफी असर पड़ता है.
- EV और CNG गाड़ियों में बढ़ती दिलचस्पी की एक वजह E20 पेट्रोल को लेकर ग्राहकों के बीच चल रही चर्चा भी है. कुछ पुराने पेट्रोल गाड़ी मालिकों को भविष्य में ज्यादा इथेनॉल मिक्स वाले पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर चिंता है. ऐसे में कुछ ग्राहक अगली कार खरीदते समय पेट्रोल के अलावा दूसरे ऑप्शन्स पर भी विचार कर रहे हैं.
- इसके अलावा गाड़ी चलाने का खर्च भी लोगों के लिए एक बड़ी वजह है. पेट्रोल की तुलना में CNG से कार चलाने का खर्च कम हो सकता है, जबकि EV में पेट्रोल या CNG की जरूरत नहीं होती. इलेक्ट्रिक कारों के ऑप्शन भी पहले के मुकाबले काफी बढ़ गए हैं. अब अलग-अलग कीमत और सेगमेंट में कई EV मौजूद हैं, जिससे ग्राहकों के पास ज्यादा ऑप्शन हैं.
EV बिक्री में हुई बढ़ोतरी
- इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती मांग का असर बिक्री के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है. Tata Motors ने जुलाई 2026 में 13,578 इलेक्ट्रिक पैसेंजर गाड़ियां बेची. जुलाई 2025 में यह आंकड़ा 6,712 यूनिट था. यानी एक साल में कंपनी की EV बिक्री में करीब 102 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.

- कंपनी के मुताबिक, पिछले छह महीनों में उसकी EV बुकिंग करीब तीन गुना हो गई है. बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी ने अपना EV प्रोडक्शन भी बढ़ाया है. जहां पहले हर महीने करीब 9,000 इलेक्ट्रिकह कारों का प्रोडक्शन किया जा रहा था, वहीं अब यह संख्या 15,000 से ज्यादा हो गई है.
- यह ट्रेंड सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों तक सीमित नहीं है. इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की मांग में भी तेजी आई है. इलेक्ट्रिक स्कूटर की पूछताछ और मांग में करीब 30 से 40 फीसदी तक बढ़ोतरी देखी गई है.
- कुछ जगहों पर TVS iQube के लिए 4 से 5 महीने तक की वेटिंग लिस्ट भी बताई जा रही है. हालांकि, इलेक्ट्रिक कार का वेटिंग पीरियड हर शहर में एक जैसा नहीं होता. इसका अंतर शहर, कलर, बैटरी पैक, वेरिएंट और डीलर के पास मौजूदा स्टॉक के चलते हो सकता है. इसलिए किसी एक शहर में मिलने वाला वेटिंग पीरियड पूरे देश पर लागू नहीं किया जा सकता.
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