कार में कैसे काम करेगा AEBS सिस्टम, 2030 से लागू करने जा रही सरकार?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 2030 से नए कार मॉडल में AEBS अनिवार्य करने का प्रस्ताव जारी किया है. ऐसे में जानें एडवांस इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम और इसकी खासियत के बारे में.

सड़क पर कई हादसे ऐसे होते हैं, जब ड्राइवर के पास कोई भी कदम उठाने के लिए पर्याप्त समय नहीं होता. ऐसा अक्सर अचानक सामने चल रही कार के ब्रेक लगाने, सड़क पर किसी बाधा के आ जाने या ट्रैफिक के तेजी से रुकने की स्थिति में होता है. ऐसे में कुछ सेकंड की देरी भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है. इसी समस्या से बचने के लिए अब कारों में Advanced Emergency Braking System यानी AEBS को अनिवार्य करने की तैयारी है.
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 19 अक्टूबर 2026 को जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में प्रस्ताव रखा है कि 1 अक्टूबर 2030 से नए M1 मॉडल की कारों में AEBS अनिवार्य किया जाए. इसके बाद 1 अक्टूबर 2032 से उत्पादन में मौजूद सभी M1 मॉडल में भी यह सिस्टम जरूरी होगा. M1 श्रेणी में ड्राइवर के अलावा अधिकतम आठ यात्रियों वाली यात्री कारें आती हैं.
ऐसे काम करेगा AEBS
AEBS सड़क पर कार के आगे की स्थिति पर लगातार नजर रखता है. इसके लिए वाहन में लगे कैमरा, रडार या दोनों तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. सिस्टम सामने मौजूद वाहन या संभावित बाधा की दूरी और कार की गति जैसी स्थितियों का आकलन करता है. अगर कार 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही है और अचानक सामने वाली कार जोर से ब्रेक लगा देती है, तो AEBS इस स्थिति को पहचानकर यह अनुमान लगाने की कोशिश करेगा कि दोनों वाहनों के बीच टक्कर का खतरा कितना है. अगर खतरा सामान्य है तो सिस्टम केवल निगरानी करता रहेगा, लेकिन जब टक्कर की संभावना बढ़ती है तो सबसे पहले ड्राइवर को चेतावनी दी जाती है. जिससे ड्राइवर अलर्ट हो जाता है.
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एक्सिडेंट की संभावना को कम करेगा
यही AEBS की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है. अगर सिस्टम को टक्कर का खतरा दिखाई देता है और ड्राइवर चेतावनी के बावजूद पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं दे पाता, तो AEBS अपने आप ब्रेकिंग शुरू कर देता है. इसका मतलब है कि AEBS परिस्थितियां अनुकूल होने पर टक्कर को पूरी तरह रोकने में मदद करता है और अगर टक्कर रोकना संभव नहीं है तो कार की स्पीड कम करके टक्कर की संभावना को कम करता है.
2030 और 2032 तक होगा लागू
1 अक्टूबर 2030 से नए M1 कार मॉडल AEBS से लैस होने चाहिए. वहीं जो पुराने मॉडल उस समय तक प्रोडक्शन में हैं, उनके लिए 1 अक्टूबर 2032 की समयसीमा प्रस्तावित है. साथ ही, 1 अक्टूबर 2028 से AEBS से लैस M1 और N1 वाहनों को संबंधित AIS-185 मानक का पालन करना होगा. AEBS के साथ सरकार वाहन सुरक्षा के दूसरे पहलुओं पर भी जोर दे रही है. ड्राफ्ट में स्टीयरिंग, इमरजेंसी लेन-कीपिंग, चाइल्ड-सीट एंकर और अन्य सुरक्षा मानकों से जुड़े प्रावधान भी प्रस्तावित हैं.
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