Surya Grahan 2026: सावन अमावस्या पर साल का अंतिम सूर्य ग्रहण, 64 साल बाद बन रहा दुर्लभ योग, जानें भारत में सूतक काल के नियम
Surya Grahan 2026: 64 साल बाद बना दुर्लभ योग! 12 अगस्त, सावन अमावस्या पर साल का आखिरी सूर्य ग्रहण! भारत में अदृश्य होने पर भी क्यों है खास? जानें भारत में सूतक काल के नियम और राशियों पर इसका प्रभाव.

Surya Grahan 2026: 12 अगस्त को साल का आखिरी पूरा सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) लगने वाला है. ज्योतिष के हिसाब से इसे बेहद दुर्लभ माना जा रहा है. भारत में यह ग्रहण रात के समय लगेगा, इसलिए यहां दिखाई नहीं देगा.
भारत में नजर न आने की वजह से इसका सूतक काल भी लागू नहीं होगा और न ही पूजा-पाठ पर कोई रोक होगी. फिर भी ज्योतिषियों के बीच इसकी काफी चर्चा है. इसकी वजह यह है कि कई सालों बाद ग्रहों का ऐसा अनोखा संयोग बन रहा है, जिसका असर राशियों और मौसम पर पड़ सकता है.
कितने सालों बाद बना है यह दुर्लभ धार्मिक-ज्योतिषीय संयोग?
वैदिक ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, श्रावण (सावन) अमावस्या (हरियाली अमावस्या) तिथि पर कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र के भीतर ऐसा दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण का संयोग दशकों बाद बन रहा है.
27 से 64 सालों बाद खगोलीय महासंयोग: यूरोप की मुख्य भूमि पर ऐसा पूर्ण सूर्य ग्रहण 27 साल बाद (वर्ष 1999 के बाद) दिखाई दे रहा है, वहीं पश्चिमी यूरोप और ब्रिटेन के लिहाज से यह 64 साल बाद का सबसे बड़ा खगोलीय-ज्योतिषीय अवसर है.
ग्रहों की दुर्लभ युति: ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस ग्रहण के दौरान कर्क राशि में सूर्य, चंद्रमा और बुध की युति बन रही है. सावन माह की अमावस्या पर इस योग का बनना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भले ही कोई ग्रहण किसी भू-भाग में प्रत्यक्ष दिखाई न दे, लेकिन सौरमंडल में सूर्य और चंद्रमा की स्थिति में होने वाले परिवर्तन का सूक्ष्म प्रभाव संपूर्ण पृथ्वी, पर्यावरण और मानव चेतना पर पड़ता है. पंचांग कर्ताओं और ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ग्रहण के समय बनने वाली ग्रह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक बदलावों और सभी 12 राशियों के जातकों की मानसिक स्थिति को प्रभावित करती है.
सूर्य ग्रहण 2026: मुख्य विवरण और समय
- ग्रहण का प्रकार: पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse)
- प्रारंभ समय (वैश्विक): 12 अगस्त, रात 09:04 बजे IST
- पूर्ण ग्रहण (Peak Phase): रात 10:28 बजे से 11:16 बजे IST तक
- समाप्ति समय (वैश्विक): 13 अगस्त, तड़के 01:27 बजे IST
- मुख्य दृश्यता क्षेत्र: ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, पुर्तगाल और उत्तरी रूस
- भारत में धार्मिक स्थिति: अदृश्य (सूतक काल, मंदिर बंदी या पूजा-पाठ पर कोई प्रतिबंध लागू नहीं)
ज्योतिष के अनुसार इस ग्रहण की 5 सबसे खास बातें
सावन अमावस्या पर ग्रहण: सावन मास की अमावस्या तिथि भगवान शिव और पितरों की पूजा के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है. इस दिन सूर्य ग्रहण का पड़ना शिव आराधना, मंत्र सिद्धि और दान-पुण्य के दृष्टिकोण से विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है.
कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में प्रभाव: ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, यह ग्रहण जल तत्व की राशि 'कर्क' और 'अश्लेषा' नक्षत्र में लग रहा है. कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है, जिससे लोगों की मानसिक स्थिति और निर्णय क्षमता पर असर पड़ सकता है.
राशियों पर ज्योतिषीय असर: कर्क राशि में ग्रहण लगने के कारण मेष, कुंभ और मीन राशि के जातकों को धन, स्वास्थ्य और निर्णय लेने में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
भारत में सूतक काल मुक्त: चूंकि ग्रहण भारत में रात के समय लग रहा है और दिखाई नहीं देगा, इसलिए शास्त्रों के अनुसार भारत में सूतक नियम लागू नहीं होंगे. सभी धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ सामान्य रूप से किए जा सकेंगे.
मंत्र जाप और दान का महत्व: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल के समय भगवान शिव के 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना और ग्रहण के बाद दान-पुण्य करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है.
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