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'ओम दर-ब-दर' एक ऐसी फिल्म जिसे ज्योतिष, विज्ञान और दर्शन को जाने बिना समझना बहुत ही मुश्किल!

'ओम दर-ब-दर' (Om Dar-B-Dar) भारतीय सिनेमा की एक ऐसी फिल्म जो 35 साल बाद भी सिनेमा की गहरी समझ रखने वालों के लिए एक पहली से कम नहीं है. अपनी तरह की अनूठी फिल्म जो सिनेमा को समझने वालों को एक अलग ही आंनद देती है.

ओम दर-ब-दर (Om Dar-B-Dar), कमल स्वरूप द्वारा निर्देशित ये फिल्म अनूठी शैली, बेतुके कथानक और सामाजिक-राजनीतिक व्यंग्य के लिए भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली और रहस्यमय कल्ट फिल्मों में से एक.

इस फिल्म की खास बात है इसका शिल्प और पर्दे पर कहानी कहने का तरीका, जो इतना अनूठा है कि सिनेमा के जानकार भारत की सबसे प्रभावशाली और रहस्यमय कल्ट फिल्मों में से इसे एक मानते हैं.

ओम दरबदर क्या है और इसे क्यों देखना चाहिए?
फिल्म स्टूडेंट्स, फिल्ममेकर्स और आलोचकों के बीच यह फिल्म Must watch की सूची में शामिल है. इस फिल्म को लेकर अक्सर चर्चा और विमर्श होता रहता है. दर्शक इसे समझने की कोशिश में उलझ जाते हैं और बार-बार देखना पसंद करते हैं.

लेकिन यहां पर बात करेंगे फिल्म के ज्योतिषीय पहलू की, क्योंकि 'ज्योतिष' इस फिल्म के प्रमुख आकर्षण में से एक है. यदि इस विषय के बारे में आपकी रुचि नहीं है तो इस फिल्म को पूरी तरह से समझने में मुश्किल आ सकती है.

ओम दर-ब-दर (Om Dar-B-Dar) फिल्म की शुरुआत ही ज्योतिष से होती है. इसके पहले ही सीन में कुंडली और शनि की स्थिति को लेकर जिस प्रकार से चर्चा और चित्रण होता है वो समाज में ज्योतिष शास्त्र को लेकर जो धारणा और मान्यता है उसे मजबूती से प्रस्तुत करती है.  

'ओम दर-ब-दर' जिसकी कहानी एक किशोर लड़के के इर्द गिर्द चलती है, जिसका नाम 'ओम' है. ये अजमेर और पुष्कर जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध स्थानों में रहता है.

ओम का इन शहरों में रहना कोई संयोग नहीं, बल्कि निर्देशक कमल स्वरूप की एक गहरी सिनेमाई रणनीति का हिस्सा जान पड़ती है. ओम एक असामान्य बुद्धि और जिज्ञासु स्वभाव वाला लड़का है, जो विज्ञान, दर्शन, राजनीति और कला में रुचि रखता है.

फिल्म में ओम के किरदार में एक दार्शनिक, वैज्ञानिक और साधारण इंसान तीनों की झलक मिलती है लेकिन ये सब कुछ एक बेतुके और विडंबनात्मक अंदाज (Ironic Tone) में कमल स्वरूप शानदार तरीके से स्क्रीन पर पेश करते हैं, उनके कहने का अंदाज कमर्शियल फिल्म से एकदम अलग है. 

वे किसी भी सीन पर सीधे नहीं पहुंचे हैं, वहां तक पहुंचने के बीच जो कुछ भी घट रहा होता है, उसे बहुत ही रोचक ढंग से पेश करते हैं. यही शैली इस फिल्म को दूसरी फिल्मों से बिल्कुल अलग बना देती है. ओम दर-ब-दर में ज्योतिषीय संकेतों का बहुत ही प्रभावशाली ढ़ंग से इस्तेमाल किया गया है, कैसे? समझते हैं.

ओम दर ब दर की पूरी कहानी समझाएं
फिल्म के आरंभ में लड़के के पिता जो एक ज्योतिषी हैं. वे कहते हैं,'मिथुन लग्न है और लग्नेश लग्न को देख रहा है, इसलिए इसकी उम्र 17 साल है'. कम उम्र होने के कारण वे लड़के का नाम  'ॐ' (ओम) रख देते हैं.

ताकि यमराज की दृष्टि से लड़का बचा रहे. ओम के पिता को विश्वास है कि ओम नाम यमराज की लिस्ट में नहीं है. ओम की दुनिया वास्तविकता और कल्पना के बीच झूलती रहती है.

वह अपने परिवार की विचित्र परिस्थितियों, समाज की रूढ़ियों और जीवन की उलझनों से जूझता है. फिल्म का ये सीन सिर्फ स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और दार्शनिक पक्ष को दर्शाता है.

क्या ज्योतिष में ऐसे योग से उम्र तय होती है?
फिल्म से हटकर अब उन तथ्यों की पड़ताल करते हैं कि क्या जो इस फिल्म में कहा गया है, वह विशुद्ध पारंपरिक ग्रंथों से मेल खाता है? तो ये कोई प्रमाणिक नहीं है यानी 'मिथुन लग्न और लग्नेश की दृष्टि  से अल्प आयु के होने का कोई सूत्र सीधे तौर पर बृहत पाराशर होरा शास्त्र या फलदीपिका में नहीं मिलता.

लेकिन कुछ नाड़ी ज्योतिषीय पद्धतियां 17, 24, 36 वें वर्ष को 'संकेत-काल' मानती हैं. हो सकता है कि फिल्म में इसी काल को मृत्यु-संकेत के तौर पेश किया गया हो.

'ॐ' जो यमदूतों को रोक सकता है?
शास्त्रों के अनुसार 'ॐ' (ओम) कोई साधारण नाम नहीं है, यह ब्रह्मांड की प्रथम ध्वनि, सर्वोच्च तत्व और अमरता का प्रतीक माना गया है. कठोपनिषद में यमराज नचिकेता से कहते हैं, 'ॐ इत्येतदक्षरं ब्रह्म' यानि जो इस अक्षर का ध्यान करता है, वह न केवल मृत्यु से भयमुक्त होता है, बल्कि मोक्ष के योग्य भी हो जाता है.

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के समय जो 'ॐ नमो नारायणाय' का जप करता है, यमदूत उसे छू नहीं सकते. आधुनिक दृष्टिकोण से देखें तो यह नाम सिर्फ प्रतीकवाद जैसा प्रतीत होता है. जबकि धार्मिक दृष्टि से: ओम (ॐ) नाम मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है.

मनोवैज्ञानिक दृष्टि से यह नाम व्यक्ति को आत्मबल और सकारात्मकता प्रदान करता है और फिल्मी दृष्टि से देखें तो यह नाम विरोध और अस्तित्व की नई परिभाषा (Redefinition) का प्रतीक है.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

"ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है."

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया है. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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