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अक्टूबर में सोना खरीदें या धनतेरस तक रुकें? 28 अक्टूबर से बदल रहा है ग्रहों का हिसाब

Gold Price Prediction 2026: अक्टूबर में सोना खरीदें या धनतेरस तक इंतजार करें? भारत की कुंडली में 25 अक्टूबर से 8 नवंबर के बीच सोना-चांदी बाजार में तेज हलचल के संकेत हैं.

Gold Price Prediction 2026: सोना खरीदना है, लेकिन अभी या धनतेरस पर? अक्टूबर शुरू होने से पहले ही यह सवाल बहुत से खरीदारों के सामने है. वजह भी साफ है. 28 सितंबर को 24 कैरेट सोना करीब 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट करीब 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास है. भाव पहले ही बहुत ऊंचे हैं. ऐसे में कुछ लोग गिरावट का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कुछ को डर है कि धनतेरस आते-आते सोना और महंगा न हो जाए.

ज्योतिष इस सवाल का सीधा जवाब नहीं देता कि सोना किस तारीख को कितने रुपये ऊपर या नीचे जाएगा. लेकिन भारत की कुंडली और अक्टूबर-नवंबर 2026 के ग्रहों को साथ रखकर देखें तो एक बात जरूर सामने आती है कि 25 अक्टूबर से 8 नवंबर के बीच सोना, चांदी और ज्वेलरी बाजार के लिए समय सामान्य नहीं दिख रहा.

भारत की कुंडली में ऐसा क्या है?

इस विश्लेषण के लिए 15 अगस्त 1947, रात 12 बजे, नई दिल्ली की वृषभ लग्न वाली स्वतंत्रता कुंडली ली गई है. इसमें लग्नेश शुक्र कर्क राशि में 22 डिग्री, 34 मिनट और 28 सेकंड पर है. कर्क राशि में शनि लगभग 20.45 डिग्री पर सूर्य के निकट होने से अस्त हैं, जबकि सूर्य लगभग 28 डिग्री पर राशि के अंतिम छोर पर स्थित हैं.

यानी तीन महत्वपूर्ण ग्रह बहुत कम अंतर पर मौजूद हैं. अब अक्टूबर के आखिरी दिनों में गोचर का मंगल इसी हिस्से से गुजरने वाला है. यहीं इस बार कहानी सिर्फ मंगल-शुक्र युति तक सीमित नहीं रहती.

25 अक्टूबर से शुरू होगा पहला दबाव

25 अक्टूबर को गोचर (ट्रांजिट) का मंगल, भारत की कुंडली में पहले से मौजूद शनि के बिल्कुल ऊपर से गुजरेगा. मेदिनी ज्योतिष में मंगल और शनि का संपर्क अक्सर दबाव, रुकावट, अचानक प्रतिक्रिया और तनावपूर्ण मूल्य-व्यवहार से जोड़ा जाता है. इसे सोने में गिरावट या तेजी का सीधा संकेत कहना गलत होगा, लेकिन बाजार की स्थिरता के लिए यह सहज योग नहीं है.

28 अक्टूबर सबसे अहम क्यों?

28 अक्टूबर को आसमान में चल रहा मंगल, भारत की कुंडली के जन्मकालीन शुक्र के बिल्कुल करीब (एक डिग्री के तीसरे हिस्से जितने अंतर पर) पहुंच जाएगा. यही अक्टूबर का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है.

शुक्र का संबंध आभूषण, लग्जरी खरीद, उपभोग और बाजार में लोगों की खर्च करने की इच्छा से देखा जाता है. भारत की कुंडली में शुक्र लग्नेश भी है. ऊपर से इस शुक्र का षड्बल 7.98 रूप है, जो कुंडली में ग्रहों के बीच सबसे मजबूत स्तर पर है. इसका अर्थ यह नहीं कि सोना महंगा ही होगा, लेकिन शुक्र से जुड़े विषयों पर आने वाला गोचर कमजोर नहीं माना जा सकता. 

इसलिए 28 अक्टूबर के आसपास ज्वेलरी, सोना-चांदी और त्योहारी खरीद से जुड़ी मांग या कीमतों में तेज प्रतिक्रिया देखने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

दशा भी इसी समय शुक्र को सामने ला रही है

भारत की कुंडली में सितंबर 2025 से मंगल महादशा चल रही है. मंगल महादशा 12 सितंबर 2025 से 12 सितंबर 2032 तक है और 9 फरवरी 2026 के बाद मंगल में राहु की अंतर्दशा शुरू हो चुकी है, जो फरवरी 2027 तक चलेगी. 12 अक्टूबर से मध्य दिसंबर तक मंगल-राहु में शुक्र का प्रत्यंतर आता है.

इसका अर्थ यह हुआ कि 28 अक्टूबर को सिर्फ मंगल जन्मकालीन शुक्र के करीब नहीं पहुंच रहा, उस समय दशा स्तर पर भी शुक्र सक्रिय है. दो अलग गणनाओं का एक ही ग्रह पर आकर मिलना इस तारीख को सामान्य गोचर से अधिक महत्वपूर्ण बनाता है.

वर्षफल में भी धन भाव का शुक्र कमजोर

2026 की वर्षकुंडली भी इस कहानी में एक और परत जोड़ती है. इस साल की वर्षफल कुंडली में सिंह लग्न (मुख्य घर) है और शुक्र दूसरे घर (कन्या राशि) में स्थित है, जो कि शुक्र की नीच (सबसे कमजोर) राशि मानी जाती है.

दूसरा भाव धन, मूल्य और वित्तीय संसाधनों से जोड़ा जाता है. इसलिए वर्षफल का यह शुक्र सोना सस्ता होगा नहीं बताता. अधिक संतुलित व्याख्या यह है कि लग्जरी और ज्वेलरी पर खर्च करते समय कीमत और Affordability बड़ा मुद्दा रह सकती है.

23 से 30 अक्टूबर में एक और संयोग

9 अक्टूबर से 26 नवंबर 2026 के बीच गुरु की दशा में बुध का समय (23-30 अक्टूबर) आएगा. इसी दौरान 24 अक्टूबर से बुध उलटी चाल (वक्री) भी शुरू कर देगा, जिससे व्यापार, सौदों और पैसों से जुड़े फैसलों के लिए यह समय बेहद संवेदनशील बन जाता है.

31 अक्टूबर को बदल जाएगा गुरु

31 अक्टूबर को गुरु कर्क राशि छोड़कर सिंह में प्रवेश करेगा. यह परिवर्तन करीब दोपहर 12 बजे होगा. इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि मंगल 18 सितंबर से कर्क में है और 12 नवंबर तक वहीं रहेगा.

31 अक्टूबर तक उसे कर्क में उच्च के गुरु का साथ मिल रहा है. गुरु के सिंह में जाते ही मंगल कर्क में अकेला रह जाएगा और नवंबर के पहले सप्ताह में कर्क के अपने गहरे नीच अंश की ओर बढ़ेगा. यानी अक्टूबर की 28 तारीख पर शुरू हुआ संवेदनशील दौर 31 तारीख पर खत्म नहीं होता. उसके बाद भी कहानी जारी रहती है.

धनतेरस के दिन ही शुक्र की स्थिति बदलेगी

2026 में धनतेरस 6 नवंबर शुक्रवार को है. नई दिल्ली में त्रयोदशी तिथि सुबह 10:30 बजे शुरू होगी और इसी 6 नवंबर को वक्री शुक्र तुला छोड़कर वापस कन्या राशि में प्रवेश करता है. गणना के अनुसार यह बदलाव रात करीब 1 बजे होता है. यानी धनतेरस का अधिकांश दिन शुक्र कन्या में रहेगा, जिसे उसकी नीच राशि माना जाता है.

दिलचस्प बात यह है कि भारत की 2026 की वर्षकुंडली में भी शुक्र कन्या के दूसरे भाव में ही है.

यह दोहराव त्योहारी खरीद में बजट, कीमत और value-for-money को बड़ा मुद्दा बना सकता है. इसका मतलब फिर भी यह नहीं है कि धनतेरस पर सोना निश्चित रूप से महंगा होगा. इसका अर्थ है कि उस समय बाजार में खरीद की इच्छा और ऊंची कीमतों के बीच खींचतान मजबूत रह सकती है.

दिवाली पर बन रहा बड़ा योग !

8 नवंबर को दिवाली के दिन आसमान में चल रहा मंगल, भारत की कुंडली के सूर्य के बिल्कुल ऊपर आ जाएगा. चूंकि ज्योतिष में सोने (Gold) का सीधा संबंध सूर्य और शुक्र दोनों से है, इसलिए 25 अक्टूबर से 8 नवंबर के बीच का यह समय सोने के बाजार और कीमतों के लिए बेहद उतार-चढ़ाव वाला रहेगा.

तो अक्टूबर में सोना खरीदें या धनतेरस तक रुकें?

अगर कोई केवल इस उम्मीद में धनतेरस तक रुक रहा है कि उस दिन सोना जरूर सस्ता मिलेगा, तो ज्योतिषीय गणना ऐसी कोई गारंटी नहीं देती. उल्टा 28 अक्टूबर के बाद ग्रहों के कई बदलाव एक साथ होने के कारण भाव में तेज उतार-चढ़ाव की संभावना बढ़ती दिखाई देती है.

जरूरत की ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए पूरी खरीद को केवल एक तारीख पर छोड़ने के बजाय खरीद को हिस्सों में बांटना जोखिम कम करने का व्यावहारिक तरीका हो सकता है. धार्मिक परंपरा निभानी हो तो धनतेरस पर प्रतीकात्मक खरीद अलग रखी जा सकती है.

और निवेश के लिए सोना खरीदने वालों के लिए सबसे जरूरी बात है कि ग्रहों को अकेला आधार न बनाएं. अंतरराष्ट्रीय गोल्ड प्राइस, डॉलर-रुपया, ब्याज दर, आयात शुल्क, वैश्विक तनाव और निवेश मांग वास्तविक भाव तय करने वाले प्रमुख कारक हैं.

ज्योतिष का सबसे साफ संकेत फिलहाल कीमत की दिशा नहीं, बल्कि समय का है कि 25 अक्टूबर के बाद बाजार पर नजर ज्यादा रखनी होगी. खास तौर पर 28 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 8 नवंबर की तारीखें महत्वपूर्ण दिखाई दे रही हैं.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है.

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