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क्या भूत-प्रेत सचमुच में होते हैं! या फिर ये इंसान का भ्रम है?

Bhoot Ki Kahani: भूत-प्रेत का नाम सुनते ही डर पैदा होता है. धार्मिक ग्रंथों में आत्मा की बात है, तो वैज्ञानिक इसे भ्रांति कहते हैं. सवाल यह है कि क्या ये अदृश्य शक्तियां सचमुच हमारे बीच मौजूद हैं?

Bhoot Ki Kahani: भूत-प्रेत का अस्तित्व सदियों से विवाद और रहस्य का विषय रहा है. विज्ञान अब तक इसे भ्रम, स्लीप पैरालिसिस (Sleep Paralysis) या अन्य कारण मानता है, जबकि वेद-पुराण और अनेक अनुभव बताते हैं कि आत्मा मृत्यु के बाद भी सूक्ष्म शरीर के रूप में विद्यमान रहती है. सच्चाई शायद दोनों दृष्टिकोणों के बीच कहीं छिपी प्रतीत होती है. इसे ही आज समझते हैं.

शास्त्रों में भूत-प्रेत

  1. भगवद गीता (2/22): आत्मा पुराने शरीर को त्यागकर नया शरीर धारण करती है.
  2. गरुड़ पुराण: मृत्यु के बाद आत्मा की 13 दिन की यात्रा, पितृ लोक और प्रेत योनि का वर्णन.
  3. मनुस्मृति: अधूरी इच्छाओं वाले जीव प्रेत योनि में भटकते हैं.
  4. महाभारत: संजय की दूरदृष्टि और भीष्म पितामह का मृत्यु पर नियंत्रण.

विज्ञान की दृष्टि में इसे अलग तरह से देखते हैं, विज्ञान की मानें तो ये Psychology है जो डर और तनाव से उत्पन्न होती है. वहीं Neuroscience की दृष्टि से देखें तो Sleep Paralysis की स्थिति है जिसमें अदृश्य उपस्थिति महसूस होने का अहसास होने लगता है. अगर Physics की मानें तो ये EM Waves और Air Pressure से उत्पन्न आवाजें हैं.

भारत के चर्चित भूतिया स्थान

  • भानगढ़ किला (राजस्थान)- ASI ने सूर्यास्त के बाद प्रवेश वर्जित किया है. यहां अजीब आवाजें और परछाइयां देखी जाने की बातें हैं.
  • डुमस बीच (सूरत, गुजरात)- श्मशान से सटे इस समुद्र तट पर रात में रहस्यमय आवाजें सुनने की घटनाएं.
  • कुलधरा गांव (जैसलमेर, राजस्थान)- सदियों से वीरान पड़ा, माना जाता है कि श्रापित है और यहाँ रात को लोग गायब हो जाते हैं.
  • अग्रसेन की बावली (दिल्ली)- कहा जाता है कि यहां नकारात्मक ऊर्जा लोगों को अपनी ओर खींचती है.
  • शनि शिंगणापुर (महाराष्ट्र)- यहां दरवाजों पर ताले नहीं लगते. स्थानीय लोग इसे दिव्य और रहस्यमय ऊर्जा से जोड़ते हैं.

भूत-प्रेत (Ghosts) के प्रश्न पर विज्ञान और शास्त्र आमने-सामने खड़े दिखाई देते हैं. विज्ञान का मानना है कि यह सब भ्रम, अवचेतन मन, स्लीप पैरालिसिस, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों या वातावरणीय कारणों से उत्पन्न अनुभव हैं, जिनका कोई ठोस और दोहराए जाने योग्य प्रमाण नहीं है.

इसके विपरीत, शास्त्र आत्मा को अमर मानते हैं और कहते हैं कि मृत्यु के बाद भी आत्मा सूक्ष्म शरीर में विद्यमान रहती है. गरुड़ पुराण, गीता और मनुस्मृति में अधूरी इच्छाओं या पाप-कर्मों के कारण आत्मा के प्रेत रूप में भटकने की स्पष्ट व्याख्या मिलती है.

इस प्रकार जहां विज्ञान इन घटनाओं को मानसिक-भौतिक प्रभाव बताकर नकारता है, वहीं शास्त्र इन्हें आत्मा और अदृश्य शक्तियों का साक्षात् प्रमाण मानते हैं.

निवारण और उपाय

जीवन में अगर इस तरह की ऊर्जा का अनुभव हो तो कुछ उपाय बताए गए जिनको फॉलो करके नकारात्म ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में बदलात जा सकता है-

  • हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ.
  • पितृ तर्पण और श्राद्ध.
  • पीपल व तुलसी की पूजा.
  • घर में दीपक, धूप और भजन से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाना.

भूत-प्रेत का सच अभी भी रहस्य है. विज्ञान इन्हें भ्रांति मानता है, लेकिन शास्त्र और अनगिनत अनुभव आत्मा के अस्तित्व की पुष्टि करते हैं. शायद यही वजह है कि यह प्रश्न आज भी इंसान को उतना ही आकर्षित करता है जितना हजारों साल पहले करता था.

FAQs

Q1. क्या भूत-प्रेत हर किसी को दिखाई देते हैं?
नहीं, यह व्यक्ति की मानसिक स्थिति और स्थान की ऊर्जा पर निर्भर करता है.

Q2. क्या भूतिया स्थान सचमुच खतरनाक हैं?
कई जगह वैज्ञानिक कारण हो सकते हैं, जबकि कुछ स्थलों पर अनुभवजन्य घटनाएँ भी अनदेखी नहीं की जा सकतीं.

Q3. क्या भूत-प्रेत से बचाव संभव है?
हां, शास्त्र पूजा-पाठ, मंत्र-जप और पितृ-तर्पण की सलाह देते हैं.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह- वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य। मीडिया रणनीतिकार। डिजिटल कंटेंट विशेषज्ञ

हृदेश कुमार सिंह 25 वर्षों से वैदिक ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल पत्रकारिता पर कार्य कर रहे एक बहुआयामी विशेषज्ञ हैं. वर्तमान में वे ABPLive.com में Astro और Religion सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं, जहां वे ग्रहों की चाल को आधुनिक जीवन की दिशा में बदलने वाले संकेतों के रूप में प्रस्तुत करते हैं. हृदेश कुमार सिंह एक सम्मानित और अनुभव ज्योतिषी हैं.

इन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC, New Delhi) से पत्रकारिता में शिक्षा प्राप्त की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म्स के साथ भी ज्योतिष सलाहकार के रूप में कार्य किया है. वे मीडिया रणनीति, कंटेंट लीडरशिप और धार्मिक ब्रांडिंग के विशेषज्ञ हैं.

प्रसिद्ध भविष्यवाणियां जो समय के साथ सच साबित हुईं- IPL 2025 के विजेता की पूर्व घोषणा. हनी सिंह की वापसी और संगीत सफलता. भारत में AI नीति बदलाव की अग्रिम भविष्यवाणी. डोनाल्ड ट्रंप की पुनः राष्ट्रपति पद पर वापसी और उसके बाद के निर्णय. पुष्पा 2: द रूल की बॉक्स ऑफिस सफलता और अल्लू अर्जुन के करियर ग्राफ.

शेयर बाजार क्रैश 2025 और दिल्ली की मुख्यमंत्री को लेकर भविष्यवाणी. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई का सटीक पूर्वानुमान. क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू और लोकप्रियता का संकेत. ये सभी भविष्यवाणियां शुद्ध वैदिक गणना, गोचर, दशा-अंतरदशा और मेदिनी ज्योतिषीय विश्लेषण पर आधारित थीं, जिन्हें समय ने सत्य सिद्ध किया.

विशेषज्ञता के क्षेत्र: वैदिक ज्योतिष, संहिता, होरा शास्त्र, अंक ज्योतिष और वास्तु. करियर, विवाह, शिक्षा, लव लाइफ, बिज़नेस, हेल्थ के लिए ग्रहों और मनोविज्ञान का समन्वित विश्लेषण. कॉर्पोरेट नीति, ब्रांड रणनीति और मीडिया कंटेंट प्लानिंग में ज्योतिषीय हस्तक्षेप. डिजिटल धर्म पत्रकारिता और गूगल रैंकिंग के अनुकूल धार्मिक कंटेंट का निर्माण करने में ये निपुण हैं.

उद्देश्य: 'ज्योतिष को भय या भाग्य का उपकरण नहीं, बल्कि जीवन के लिए बौद्धिक और आध्यात्मिक सहारा बनाना' हृदेश कुमार सिंह का मानना है कि ज्योतिष केवल प्रश्नों का उत्तर नहीं देता, वह सही समय पर साहसिक निर्णय लेने की दिशा दिखाता है.

अन्य रुचियां: फिल्मों की संरचनात्मक समझ, संगीत की मनोवैज्ञानिक गहराई, साहित्यिक दर्शन, राजनीति की परख. बाजार की समझ और यात्राओं से अर्जित मानवीय अनुभव ये सभी उनके लेखन में एक बहुस्तरीय अंतर्दृष्टि जोड़ते हैं. उनकी रुचियां केवल विषयगत नहीं, बल्कि उनके हर लेख, भविष्यवाणी और रणनीति को संवेदनशीलता और संस्कृति से जोड़ने वाली ऊर्जा हैं.

 
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