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अहमदाबाद प्लेन क्रैश के दौरान ग्रहों की क्या थी भूमिका? ज्योतिष गणना से खुलकर आ गया सच

12 जून 2025 को अहमदाबाद से उड़ान भरते समय एक विमान दुर्घटनाग्रस्त (Ahmedabad Plane Crash) हो गया. इस प्लेन हादसे में गुजरात के पूर्व सीएम विजय रुपाणी समेत 265 यात्रियों की मौत हो गई.

12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए विमान हादसे में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई. इस दिन के पंचांग और ग्रहों की स्थिति से एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, इस त्रासदी के पीछे वे कौन से ग्रह और इनसे बनने वाले कौन से खरनाक योग थे जो हादसे के खलनायक बन गए.

अहमदाबाद प्लेन क्रैश (Ahmedabad Plane Crash) जब हुआ उस समय ग्रहों की स्थिति कैसी थी, किन ग्रहों ने इस हादसे में अहम भूमिका निभाई?

साथ ही ये भी जानने की कोशिश करेंगे कि क्या खतरा टल गया है या अभी भी बना हुआ है, यदि बना हुआ है तो ये कब तक रहेगा, इन सब के प्रश्नों का उत्तर ज्योतिष से जानने का प्रयास करते हैं.

मंगल-केतु की युति बनी दुर्घटना का कारण! अहमदाबाद प्लेन क्रैश 2025 पर शास्त्रसम्मत विश्लेषण-

मंगल-केतु की युति, अंगारक योग और यंत्रविघात
12 जून 2025 को मंगल और केतु की युति सिंह राशि में थी, जो कि सूर्य की अग्नि प्रधान राशि है. यह युति अंगारक योग कहलाती है, जो यंत्र विघात, तेज गति से जुड़ी दुर्घटना, और अग्नि कारण मौत का योग बनाती है. बृहत्पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार-

मङ्गलेन केतुसंयुक्ते क्रूरभावे च संस्थिते।
यन्त्रविघ्नं, अग्निहेतुं, प्राणहानिं च दर्शयेत्॥

शास्त्रों में मंगल को यंत्रों, इंजन और ऊर्जा का कारक बताया गया है, जबकि केतु उन्हें दिशाहीन, अनियंत्रित और अंध गति प्रदान करता है.

12 जून का पंचांग और राहुकाल का आरंभ
पंचांग अनुसार 12 जून को फ्लाइट नंबर AI-171 ने दोपहर 1.38 बजे उड़ान भरी और 1.40 बजे ये भीषण हादसा हो गया. उस समय प्लेन 625 फीट की ऊंचाई पर था.

इस दिन राहुकाल का समय राहुकाल 14:04 से 15:48 तक था. राहुकाल को शास्त्रों में सर्वाधिक दोषयुक्त काल माना गया है. यह भ्रम, विघ्न और आकस्मिक बाधाओं से भरा होता है.

'राहुकाले यन्त्रकर्म निषिद्धं, न वैमानिकं न यानकं, विनाशं सूचयति'

यानि राहु काल में यंत्रों से जुड़ा कोई भी कार्य करना वर्जित है. विशेषतः उड़ान (विमान) या अन्य गतिशील वाहन का प्रयोग इस समय नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह काल दुर्घटना या विनाश का संकेत देता है.

मंगल बना अमंगल
चंद्रमा पूर्वाषढा नक्षत्र में था, जिसका स्वामी शुक्र है और वो इस दिन मेष राशि में गोचर कर रहा था. मेष राशि का स्वामी मंगल ग्रह है, जो सिंह राशि में केतु के साथ अंगारक योग बना रहा था. इस प्रभाव से दिशाभ्रम और गड़बड़ी उत्पन्न जैसी स्थिति बनती है.

ज्योतिष ग्रंथों में मंगल ग्रह को अग्नि, इंजन, यंत्र, ऊर्जा का कारक बताया गया है. वहीं केतु को सिरहीनता, दिशाहीन गति, अस्पष्ट निर्णय का कारक है.
  
अंक ज्योतिष का उड़ान संख्या से संबंध
दुर्घटनाग्रस्त प्लेन की उड़ान संख्या AI-171 थी. 1+7+1= 9 यह मंगल का अंक है. इन  सब तथ्यों को देखकर लगता है कि मंगल ही उस दिन का घातक कारक ग्रह था और केतु से युति, आग में घी का काम कर रही थी.

'मङ्गलात् सर्वदोषाणां नाशः स्यात् उचितैः क्रियैः.
अन्यथा स सर्वनाशाय स्यात्.'

(यदि मंगल से संबंधित उचित उपाय (जैसे मंत्र, यंत्र, पूजा या कर्म) किए जाएं, तो वह सभी प्रकार के दोषों का नाश कर सकता है. लेकिन यदि उसे नियंत्रित न किया जाए, तो वही मंगल सर्वनाश का कारण भी बन सकता है)

खतरा अभी टला नहीं है?
मंगल–केतु की युति सिंह राशि में 2025 में 7 जून से 28 जुलाई तक सक्रिय रहेगी. विशेषकर इन दिनों में विशेष सावधानी की आवश्यकता है.

विशेष संवेदनशील तिथियां (Critical Dates)
नीचे की तिथियां विशेष रूप से यंत्र, अग्नि, गति और आकाश यात्रा के लिए खतरनाक हो सकती हैं. इन 52 दिनों में मंगल और केतु के प्रभाव के कारण युद्ध की परिस्थितियों में विस्तार होगा, जिन देशों के साथ पहले से युद्ध या तनाव जैसी परिस्थितियां बनी हुई हैं वहां पर हमले तेज हो सकते हैं. 

तिथि  कारण
12 जून 2025 अहमदाबाद प्लेन क्रैश वास्तविक प्रमाण
15–16 जून 2025 सूर्य, मंगल, केतु, राहु और बुध एक साथ 'त्रिकोन-दृष्टि' बनाते हैं
21 जून 2025 ग्रीष्म संक्रांति अग्नि तत्व की चरम स्थिति
2 जुलाई 2025 चंद्रमा सिंह राशि में अंगारक के साथ चंद्र की युति मानसिक भ्रम और अग्नि से जुड़ी चीजों का संकेत
9 जुलाई 2025 मंगल और शनि एक-दूसरे को दृष्ट कर रहे होंगे, युद्ध जैसी स्थिति
22–23 जुलाई 2025 मंगल सिंह के अंतिम अंशों में अति-उत्साही और अनियंत्रित ऊर्जा


किन कार्यों में सावधानी बरतनी चाहिए?

  • विमान टेकऑफ, टेक्निकल टेस्टिंग, स्पेस लॉन्च
  • अग्निशमन, रासायनिक प्लांट, बिजली से जुड़े कार्य
  • ऑपरेशन, ट्रैफिक हाई-वे यात्रा
  • बड़े निर्माण (Particularly High-Rise or Fire-Risk Structures)

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

"ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है."

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया है. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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