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14 Vidya 64 Kala List: क्या हैं वो 14 विद्याएं और 64 कलाएं, जो साधारण इंसान को भी बना देती हैं 'महामानव'?

14 Vidya 64 Kala: प्राचीन भारत की 14 विद्या और 64 कलाएं क्या हैं? जानिए भगवान श्रीकृष्ण द्वारा सीखी गई इस प्राचीन शिक्षा की पूरी लिस्ट और इसके पीछे का रहस्य.

14 Vidya 64 Kala: क्या आप जानते हैं कि प्राचीन भारत की शिक्षा व्यवस्था आज के ऑक्सफोर्ड या हार्वर्ड से भी हजारों साल आगे थी? आज हम जिस ‘मल्टी-टैलेंटेड’ या ‘ऑल-राउंडर’ पर्सनैलिटी की बात करते हैं, हमारे पूर्वजों ने उसके लिए एक सटीक पैमाना तय किया था, जिसे 14 विद्या और 64 कलाएं कहा जाता है.

सनातन परंपरा में माना जाता है कि जो व्यक्ति इन सभी विधाओं को सीख लेता है, वह पूर्ण पुरुष या महामानव बन जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने महर्षि सांदीपनि के गुरुकुल में मात्र 64 दिनों में इन सभी विद्याओं और कलाओं में महारत हासिल कर ली थी. आइए जानते हैं कि इस प्राचीन भारतीय ज्ञान और हुनर के महाकोश में आखिर क्या-क्या शामिल है जो आज भी दुनिया को हैरान करता है.

बुद्धि और आत्मा को जगाने वाली 14 विद्याएं

प्राचीन भारत में 'विद्या' का सीधा मतलब सैद्धांतिक, मानसिक और आध्यात्मिक ज्ञान से था, जो आपके आंतरिक विकास, बुद्धि और समाज को चलाने वाले नियमों से जुड़ी थी. इन 14 विद्याओं की नींव हमारे सबसे पवित्र ग्रंथों पर टिकी है, जिनमें सबसे पहले चार वेद आते हैं. ऋग्वेद ब्रह्मांड के सबसे प्राचीन मंत्रों और स्तुतियों का भंडार है, तो यजुर्वेद में यज्ञ और अनुष्ठानों के नियम समझाए गए हैं.

सामवेद संगीत, सुर और लय का महासागर है जो भारतीय संगीत का आधार बना, जबकि अथर्ववेद में दैनिक जीवन, आयुर्वेद, विज्ञान और तंत्र-मंत्र का गहरा ज्ञान समाहित है. वेदों के इस असीमित ज्ञान को ठीक से समझने के लिए हमारे ऋषियों ने छह वेदांगों की रचना की थी, जो इस पूरी शिक्षा व्यवस्था का दूसरा सबसे बड़ा स्तंभ हैं.

वेदांगों के अंतर्गत आने वाली शिक्षा विद्या हमें सही उच्चारण और स्वर का विज्ञान सिखाती है, जबकि कल्प विद्या के जरिए धार्मिक अनुष्ठानों और यज्ञों को करने की सही विधि का पता चलता है. भाषा को शुद्ध रूप से लिखने और बोलने के लिए व्याकरण का ज्ञान दिया जाता था, तो शब्दों के मूल अर्थ और उनकी उत्पत्ति को समझने के लिए निरुक्त विद्या का सहारा लिया जाता था.

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इसके साथ ही, काव्यों की रचना के नियमों के लिए छंद शास्त्र और ब्रह्मांड के ग्रह-नक्षत्रों की गति व समय की सटीक गणना के लिए ज्योतिष विद्या का अध्ययन अनिवार्य था. इस पूरी ज्ञान श्रृंखला को पूर्ण करने के लिए चार उपांग बेहद जरूरी थे, जिनमें इतिहास और कथाओं के माध्यम से ज्ञान देने वाले पुराण, सही-गलत का फैसला करने वाला तर्कशास्त्र यानी न्याय, वेदों के गहरे दर्शन को समझाने वाली मीमांसा और समाज को व्यवस्थित रखने वाले नियम-कानून सिखाने वाला धर्मशास्त्र शामिल था.

जीवन को जीने योग्य बनाने वाली 64 चमत्कारी कलाएं

अगर विद्या मानसिक और आध्यात्मिक विकास थी, तो 'कला' का अर्थ पूरी तरह से व्यावहारिक हुनर या कौशल से था. जीवन को सुंदर, समृद्ध, सुखी और रचनात्मक बनाने के लिए प्राचीन आचार्यों ने 64 कलाओं की सूची तैयार की थी. इन कलाओं में सबसे पहला और लोकप्रिय हिस्सा संगीत, नृत्य और अभिनय जैसी परफॉर्मिंग आर्ट्स का था.

14 Vidya 64 Kala List: क्या हैं वो 14 विद्याएं और 64 कलाएं, जो साधारण इंसान को भी बना देती हैं 'महामानव'?

इसके तहत गायन की कला, तरह-तरह के वाद्य यंत्र बजाने का हुनर, शास्त्रीय नृत्य और मंच पर अभिनय करने की नाट्य कला सिखाई जाती थी. पानी के बर्तनों से संगीत निकालने की जलतरंग विद्या, वीणा और डमरू जैसे विशेष वाद्य बजाने की कला और पानी की लहरों पर थपकी देकर आवाज निकालने का हुनर भी इसी का हिस्सा था.

सौंदर्य और साज-सज्जा के मामले में प्राचीन भारत आज के कॉस्मेटिक और फैशन इंडस्ट्री से कहीं आगे था. इसमें चित्रकारी करने की आलेख्य कला, चेहरे और शरीर पर विशेष शृंगार करने की कला, और चावल व फूलों से कलात्मक रंगोली बनाने का हुनर शामिल था. लोग फूलों की सुंदर सेज सजाना, दांतों व कपड़ों को प्राकृतिक रंगों से रंगना, और फर्श पर कीमती मणियों की पच्चीकारी करना सीखते थे.

फूलों के सुंदर हार बनाना, बालों में मुकुट सजाना, मेकअप व वेशभूषा का सही प्रयोग करना, और कानों के लिए पत्तों व फूलों के आभूषण तैयार करने के साथ-साथ सुगंधित इत्र व धूप बनाने की कला में भी लोग माहिर हुआ करते थे.

पाक कला से लेकर विज्ञान और कोडिंग का प्राचीन हुनर

घरेलू जीवन और रसोई को बेहतरीन बनाने के लिए भी विशेष कलाएं तय थीं. इसमें तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजन और सब्जियां पकाने की पाक कला, औषधीय अर्क और स्वादिष्ट शर्बत तैयार करने की विद्या, कपड़ों की सिलाई, कढ़ाई व बुनाई का काम, धागों और कठपुतलियों का खेल दिखाना, और फटे कपड़ों को इस तरह रफू करना कि पता ही न चले, जैसी कलाएं शामिल थीं.

इसके अलावा, उस दौर का विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग भी बेहद मजबूत था. महल और नगर निर्माण के लिए वास्तुविद्या, सोने-चांदी और रत्नों की शुद्धता जांचने की कला, धातुओं को पिघलाकर मिश्रित धातु बनाने का धातु विज्ञान, रत्नों की खानों की पहचान करना, पेड़-पौधों के रोगों का इलाज करने वाला वृक्षायुर्वेद, और आधुनिक मैकेनिक्स की तरह मशीनें व कल-पुर्जे बनाने की यंत्र कला उस समय के पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा थीं.

बौद्धिक विकास के लिए भाषा और साहित्य से जुड़े कई दिलचस्प खेल इस सूची में शामिल थे. पहेलियां बूझना, श्लोकों की अंत्याक्षरी खेलना, कठिन शब्दों के अर्थ निकालना, ग्रंथों को सही लय में पढ़ना और नाटकों की समीक्षा करना इसी श्रेणी का हिस्सा था. अधूरी कविताओं को तुरंत पूरा करना, चटाई और बेंत बुनना, लकड़ी पर शानदार नक्काशी करना, और सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आज की कोडिंग की तरह गुप्त भाषाएं व सांकेतिक कोड (क्रिप्टोग्राफी) तैयार करना भी एक स्थापित कला थी.

इसके साथ ही, अलग-अलग क्षेत्रों की बोलियों का ज्ञान, शब्दकोश की समझ, छंदों की पहचान, काव्यों में अलंकारों का सही इस्तेमाल, मन ही मन तुरंत नई कविता रच देना, और सुनी हुई बात को पल भर में हमेशा के लिए याद रख लेने वाली अद्भुत स्मरण शक्ति की विद्या भी युवाओं को सिखाई जाती थी.

मनोरंजन, रणनीति और आत्मरक्षा का अनोखा संगम

64 कलाओं का एक बड़ा हिस्सा मनोरंजन और मानसिक चातुर्य से जुड़ा हुआ था. इसमें जादूगरी या नजरबंदी के खेल दिखाना, रूप और भेष बदलने का स्वांग रचना, हाथ की सफाई के करतब दिखाना, और जानवरों व पक्षियों की लड़ाइयों का प्रबंधन करना शामिल था.

लोग तोते और मैना को बोलना सिखाते थे, अपनी बात छिपाकर दूसरों को झांसा देने की कूटनीति अपनाते थे, और पांसे व जुए के खेल में महारत हासिल करते थे. इसके अलावा चुंबक के खेल दिखाना, बच्चों के लिए सुंदर और सुरक्षित खिलौने बनाना, दूसरों को बहलाना, और शरीर की थकान मिटाने के लिए मालिश व केशमर्दन यानी स्पा थेरेपी का हुनर भी इसका हिस्सा था.

उंगलियों के इशारे से गुप्त बातें करने की सांकेतिक भाषा, फूलों की गाड़ियां सजाना, और प्रकृति के संकेतों को देखकर भविष्य या शकुन-अपशकुन का अनुमान लगाने का ज्ञान भी बेहद लोकप्रिय था.

कलाओं की इस महासूची का अंत अनुशासन, युद्ध और शारीरिक क्षमता के विकास के साथ होता था. इसमें शिष्टाचार और विनम्रता सीखने की कला, युद्ध या किसी भी प्रतियोगिता में जीत हासिल करने की अचूक रणनीति, अखाड़े का ज्ञान, कसरत और योग के जरिए शरीर को वज्र जैसा बनाने की व्यायाम कला शामिल थी.

इसके अलावा मंत्रों के सही और प्रभावशाली इस्तेमाल की शक्ति, और सुबह के समय राजा या गुरु को मधुर वंदना गीत गाकर जगाने की कला सीखी जाती थी. संक्षेप में कहें, तो आज की दुनिया जिसे 'स्टेम' (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग, गणित) और 'लिबरल आर्ट्स' का बेहतरीन कॉम्बिनेशन मानती है, वह भारत में युगों पहले से लागू था, जो इंसान को सिर्फ किताबी कीड़ा नहीं बल्कि हर मोर्चे पर विजेता बनाता था.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है.

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