Goat Dairy Business: बकरी के दूध का करें बिजनेस, जानें किस नस्ल की बकरी देती है सबसे ज्यादा दूध?
Goat Dairy Business: बकरी पालन बिजनेस के लिए सिरोही नस्ल दूध उत्पादन में सबसे आगे मानी जाती है, जबकि जमुनापारी दूध और मांस दोनों के लिए फायदेमंद है. वहीं, सानेन नस्ल भैंस से भी ज़्यादा दूध देती है.

Goat Dairy Business: बकरी पालन को कम पूंजी में शुरू होने वाला और तेजी से मुनाफा देने वाला बिजनेस माना जाता है, लेकिन असली कमाई तभी होती है जब बकरी की नस्ल सही चुनी जाए. भारत में बकरी की करीब 50 नस्लें पाई जाती हैं, लेकिन इनमें से कुछ ही नस्लें दूध बिजनेस के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद मानी जाती हैं. आइए जानते हैं किस नस्ल की बकरी सबसे ज्यादा दूध देती है और बकरी पालन का बिजनेस शुरू करने के लिए कौन सी नस्ल सबसे बेहतर ऑप्शन हो सकती है?
सिरोही नस्ल दूध के मामले में सबसे आगे
सिरोही नस्ल की बकरी को दूसरी नस्लों के मुकाबले ज्यादा दूध देने वाली नस्ल माना जाता है. इसका दूध आसान पाचन और पौष्टिक होता है, यही वजह है कि यह नस्ल किसानों के बीच काफी पसंदीदा, है और इसके पालन पर बैंकों से लोन भी आसानी से मिल जाता है.
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जमुनापारी दूध और मांस दोनों में फायदेमंद
उत्तर प्रदेश के इटावा जिले की जमुनापारी नस्ल देश की सबसे मशहूर बकरी नस्लों में गिनी जाती है. यह आकार में बड़ी और लंबी होती है, नर बकरी का वजन 65 से 86 किलोग्राम और मादा का वजन 45 से 61 किलोग्राम तक होता है. यह नस्ल रोजाना 2.25 से 2.7 किलोग्राम तक दूध देती है, जिसमें करीब 3.5 प्रतिशत चर्बी पाई जाती है, इसलिए इसे दूध और मांस दोनों के लिए बेहतर माना जाता है.
सानेन नस्ल भैंस से भी ज्यादा देती है दूध
सानेन एक विदेशी नस्ल है, जिसने भैंस से भी ज्यादा दूध देने की वजह से किसानों के बीच तेजी से पसंदीदा हासिल की है. इस नस्ल का मांस भी सामान्य बकरियों के मुकाबले महंगा बिकता है. दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में सानेन बकरी पाली जाती है, और भारत में इसे राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से खरीदा जा सकता है, खासकर बारिश के मौसम में इसकी कीमत अपेक्षाकृत कम रहती है.
उस्मानाबादी नस्ल कम खर्च में पालन आसान
उस्मानाबादी बकरी का पालन दूध और मांस दोनों के लिए किया जाता है, और इसके रखरखाव में ज्यादा खर्च नहीं आता. यह नस्ल साल में सिर्फ चार महीने ही दूध देती है, जिसकी मात्रा 0.5 से 1.5 लीटर प्रतिदिन तक होती है. खास बात यह है कि यह नस्ल साल में दो बार, हर बार दो दो बच्चों को जन्म देती है, जिससे बकरियों की संख्या तेज़ी से बढ़ती है.
नस्ल चुनते वक्त इन बातों का रखें ध्यान
बकरी पालन का बिजनेस शुरू करने से पहले यह धियान रखना जरूरी है कि मकसद सिर्फ दूध बेचना है, मांस बेचना है, या दोनों. अगर सिर्फ दूध उत्पादन पर फोकस करना है, तो सिरोही और सानेन जैसी नस्लें बेहतर विकल्प हैं, जबकि दूध और मांस दोनों से कमाई करनी हो तो जमुनापारी और उस्मानाबादी जैसी नस्लें ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती हैं.
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