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Wheat Export: 7 महीने में गेहूं का एक्सपोर्ट 46 लाख टन, बासमती चावल इतने लाख टन हुआ निर्यात, केंद्र सरकार ने जारी किए ताजा आंकड़े

देश से गेहूं और चावल भरपूर एक्सपोर्ट किया जा रहा है. केंद्र सरकार के अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 7 महीने में 46 लाख टन गेहूं और 24 लाख टन बासमती चावल एक्सपोर्ट किया गया है.

Crop Export From India: गेहूं रबी सीजन की प्रमुख फसल है. देश में इस साल गेहूं की बंपर बुवाई हो रही है. एक-दो राज्य को छोड़ दें तो सभी स्टेट में गेहूं की बुवाई का आंकड़ा बढ़ रहा है. वहीं, भारत अनाज के मामले में घरेलू जरूरत तो पूरी कर ही रहा है. दूसरे देशों में भी अनाजों की खपत की जा रही हैं. केेंद्र सरकार ने गेहूं समेत अन्य अनाज एक्सपोर्ट करने के शानदार आंकड़े जारी किए हैं. 

बासमती चावल 24 लाख टन एक्सपोर्ट

केंद्र सरकार ने गेहूं समेत अन्य अनाज के निर्यात करने के आंकड़े जारी किए हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-अक्टूबर के पीरियड में 46.56 लाख टन गेहूं का एक्सपोर्ट किया. इसकी कीमत 1.5 अरब डॉलर है. जबकि वर्ष 2021-22 में 2.12 अरब डॉलर मूल्य का गेहूं के गेहूं का निर्यात किया गया. वर्ष 2022-23 के पहले सात महीनों के दौरान बासमती चावल 24.10 लाख टन एक्सपोर्ट किया गया. इसका मूल्य 2.54 अरब डॉलर रहा. यह जानकारी केंद्र सरकार की ओर से संसद में दी गई है. 

186 एक्सपोर्टर को दी गई परमिशन

इस साल के शुरूआत मेें देश में आटें की कीमतें बढ़नी शुरू हो गई थी. इसके पीछे वजह गेहूं की कीमतों का बढ़ना सामने आया. रूस और यूक्रेन युद्ध का प्रभाव भी देश में गेहूं की कीमतों पर पड़ा. गेहूं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगा दिया था. हाल फिलहाल देश में गेहूं भंडारण की स्थिति ठीक है. खाद्य निर्यातक काफी समय से केंद्र सरकार से गेहूं एक्सपोर्ट करने की छूट के लिए गुहार लगा रहे थे. देश में खाद्य सुरक्षा जरूरतों की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने गेहूं की खेप विदेश भेजने की अनुमति दे दी है. केेंद्र सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार, 186 निर्यातकों को विदेश व्यापार नीति, 2015-2020 के तहत संक्रमणकालीन व्यवस्था के प्रावधानों और कुछ शर्ताें के अनुसार गेहूं निर्यात करने की अनुमति दी गई है. 

देश में गेहूं का रकबा हुआ 286 लाख हेक्टेयर

खरीफ सीजन के लिए इस साल का मौसम अच्छा नहीं रहा. बारिश, बाढ़ और सूखा ने फसल को काफी नुकसान पहुंचाया. लेकिन अब गेहूं की बुवाई के लिए मौसम अनुकूल बना हुआ हैं. केंद्र सरकार के अधिकारियों का कहना है कि खरीफ सीजन के आखिर में बारिश हुई थी. बारिश अधिक होने से जमीन में नमी की मात्रा अधिक हो गई. इससे देश में गेहूं बुवाई आसान हो गई है. किसान अधिक रकबे में गेहूं बुवाई कर रहा है. केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इस रबी सत्र में पिछले हफ्ते तक गेहूं खेती का रकबा 3 प्रतिशत बढ़कर 286.5 लाख हेक्टेयर हो गया है. केंद्र सरकार के अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल लू चलने के कारण गेहूं का उत्पादन प्रभावित हुआ था. इस साल ऐसा कहीं नहीं दिख रहा है. 

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. किसान भाई, किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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