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गेहूं स्टोर करने से पहले इस तरह नमी चेक करें किसान, नहीं होगा नुकसान

Wheat Storage Tips: गेहूं को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए नमी की सही जांच बहुत जरूरी है. किसान भाई अनाज को स्टोर करने से पहले इस तरह नमी कर सकते हैं चेक.

Wheat Storage Tips: गेहूं की कटाई के बाद किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसे सुरक्षित स्टोर करने की होती है. अक्सर कड़ी मेहनत से उपजाया गया अनाज सिर्फ इसलिए खराब हो जाता है क्योंकि भंडारण के समय उसमें नमी रह जाती है. अगर गेहूं में नमी की मात्रा सही न हो तो घुन और फफूंद लगने का खतरा बढ़ जाता है.

जिससे पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि गेहूं को लंबे समय तक ताजा और सुरक्षित रखने के लिए स्टोर करने से पहले कुछ आसान लेकिन बेहद जरूरी बातों का ख्याल रखना चाहिए. जिससे बाजार में सही दाम मिल सके. जान लीजिए कैसे नमी चेक कर सकते हैं किसान.

दांतों से दबाकर करें नमी की पहचान

अनाज में कितनी नमी है. इसे जानने का सबसे पुराना और असरदार तरीका कट की आवाज सुनना है. किसान भाई जब गेहूं को स्टोर करने की तैयारी करें. तो मुट्ठी भर दाने लें और उन्हें दांतों के बीच दबाकर देखें. अगर दाना दबाने पर जोर से कट की आवाज आती है और दाना टुकड़ों में टूट जाता है.

तो समझ लीजिए कि नमी 10 परसेंट से कम है और यह भंडारण के लिए एकदम फिट है. अगर आवाज न आए और दाना सिर्फ चपटा हो जाए या दांतों में चिपके तो इसका मतलब है कि उसमें अभी नमी बाकी है. ऐसे गेहूं को सीधे स्टोर करना भारी पड़ सकता है क्योंकि ज्यादा नमी की वजह से इसमें कीड़े बहुत जल्दी पनपने लगते हैं.

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धूप में सुखाना है सही तरीका

अगर जांच में नमी ज्यादा निकलती है. तो घबराने की बात नहीं है क्योंकि कुदरती धूप इसका सबसे बड़ा समाधान है. गेहूं को पक्की छत या तिरपाल पर फैलाकर कम से कम दो से तीन दिनों तक अच्छी तेज धूप दिखाएं. ध्यान रहे कि शाम होने से पहले अनाज को ढक दें या इकट्ठा कर लें जिससे रात की ओस उसे फिर से गीला न कर दे.

अनाज को तब तक सुखाएं जब तक वह पूरी तरह कड़क न हो जाए. धूप दिखाने से न सिर्फ नमी खत्म होती है. बल्कि अनाज में मौजूद छोटे-मोटे कीड़े भी भाग जाते हैं. यह तकनीक आपके अनाज की उम्र बढ़ा देती है और उसे बाजार के मानकों के हिसाब से तैयार करती है.

भंडारण के लिए जगह की तैयारी

सिर्फ गेहूं सुखाना काफी नहीं है. जिस जगह और बर्तन में इसे रखना है उसका भी अप-टू-डेट होना जरूरी है. लोहे के ड्रम या कोठियों को भरने से पहले अच्छी तरह साफ करें और उनमें पुरानी फसल का एक भी दाना न रहने दें. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि ड्रम की दीवारों और फर्श पर नीम के पत्तों या माल्थियान जैसे घोल का छिड़काव करना चाहिए जिससे संक्रमण का डर खत्म हो जाए.

अनाज भरने के बाद ड्रम को एयरटाइट यानी पूरी तरह हवा बंद रखें जिससे बाहर की नमी अंदर न जा सके. अगर आप बोरियों का इस्तेमाल कर रहे हैं. तो उन्हें सीधे जमीन पर न रखकर लकड़ी के फट्टों पर रखें जिससे नीचे से सीलन न आए.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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