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पराली जलाए बिना कैसे तैयार करें खेत, किसानों के पास क्या-क्या विकल्प

धान की कटाई के बाद खेत में बची पराली को अक्सर किसान जला देते हैं. लेकिन इसे जलाने के बजाय किसान मशीनों और प्राकृतिक तरीकों की मदद से मिट्टी को तैयार कर सकते हैं.

धान की कटाई के बाद खेत में बची पराली किसानों के लिए हर साल बड़ी चुनौती बन जाती है. गेहूं की अगली फसल समय पर बोने की जल्दी में कई किसान पराली को आग लगा देते हैं. इससे खेत जल्दी साफ जरूर हो जाता है, लेकिन धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाने के साथ मिट्टी की सेहत को भी प्रभावित कर देता है.

ऐसे में जानें पराली जलाए बिना खेत को अगली फसल के लिए तैयार करने का आसान तरीका. दरअसल किसानों के पास अब कई ऐसे विकल्प मौजूद हैं, जिनसे खेत की तैयारी पराली जलाए बिना की जा सकती है. इन तरीकों में मशीनों के इस्तेमाल से लेकर पराली को खेत में ही खाद में बदलना तक शामिल है.

हैप्पी सीडर से सीधे गेहूं की बुवाई

पराली प्रबंधन के लिए हैप्पी सीडर एक बेहद उपयोगी मशीन माना जाती है. धान की कटाई के बाद खेत में मौजूद फसल अवशेषों को पूरी तरह हटाए बिना इससे गेहूं की बुवाई की जा सकती है. मशीन पराली को जमीन के ऊपर व्यवस्थित करते हुए बीज को मिट्टी के अंदर डाल देती है. इससे खेत साफ करने के लिए पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ती और ऊपर बची पराली धीरे-धीरे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद करती है.

सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल

कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगाना भी बेहतर माना जाता है. यह धान की कटाई के दौरान निकलने वाले फसल अवशेषों को छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में समान रूप से फैला देता है. इसके बाद किसान रोटावेटर या दूसरी उपयुक्त मशीन से खेत तैयार कर सकते हैं. इस तरह पराली को आग लगाने की जरूरत कम हो जाती है और फसल अवशेष खेत में ही रह जाते हैं.

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श्रेडर या मल्चर से पराली काटें

अगर खेत में पहले से काफी मात्रा में पराली मौजूद है तो श्रेडर या मल्चर का इस्तेमाल किया जा सकता है. ये मशीनें फसल अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल देती हैं. छोटे टुकड़े मिट्टी में जल्दी मिल जाते हैं और समय के साथ जैविक पदार्थ में बदल जाते हैं.

पराली को खेत में ही सड़ने दें

पराली को जलाने के बजाय उसे खेत में मिलाकर सड़ने देना भी एक विकल्प है. इसके लिए फसल अवशेषों को छोटे टुकड़ों में काटकर उचित नमी के साथ मिट्टी में मिलाया जाता है. कुछ किसान बायो-डिकम्पोजर जैसे जैविक घोलों का इस्तेमाल भी करते हैं, ताकि फसल अवशेषों के सड़ने की प्रोसेस तेज हो सके. लेकिन जैविक घोलों का इस्तेमाल करते वक्त कृषि विषेशज्ञ की राय लेना बेहतर होता है.

पराली को खेत से बाहर निकालकर बेचें

हर पराली को खेत में मिलाना जरूरी नहीं है. अगर आपको आसपास पराली खरीदने या इकट्ठा करने की व्यवस्था उपलब्ध है तो किसान इसे बेलर की मदद से गांठों में बदलकर बाहर भेज सकते हैं. पराली का इस्तेमाल पशु चारे, बायोमास ईंधन, कम्पोस्ट और अन्य औद्योगिक जरूरतों में किया जाता है. इससे किसान को खेत साफ करने के साथ आमदनी का अवसर भी मिलता है.

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शेख इंजमाम उल हक एबीपी लाइव में बतौर कॉपी एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह फीचर सेक्शन में खबरों की कांट छांट और उन्हें तराशने का बेहतरीन हुनर रखते हैं. 4 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत शेख इंजमाम विकिपीडिया एंव इंडिया न्यूज जैसे संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इन सभी जगहों पर उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

शेख इंजमाम ने नई दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की, जहां उन्होंने हिंदी जर्नलिज्म में एमए एमफिल किया. इसके अलावा उन्होंने कोटा से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की, जो उनका जन्म स्थल भी है.

शेख इंजमाम को टीवी इंटरव्यू देखना, फिल्में देखना काफी पसंद है. शेख इंजमाम पत्रकारिता के अलावा साहित्य और इतिहास की भी गहरी समझ रखते हैं.

शेख इंजमाम ट्रेंडिंग और वायरल खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं. उन्हें फीचर और डिजिटल स्टोरीटेलिंग का भी अनुभव है. शेख इंजमाम हिंदी भाषा और कॉपी एडिटिंग में विशेषज्ञता रखते हैं और लगातार इसे बेहतर कर रहे हैं. राजनीतिक, राष्ट्रीय और राज्य की खबरें भी उनसे बच नहीं पाती हैं.

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