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कम लागत में ज्यादा कमाई, हल्दी की इस किस्म ने किसानों को किया मालामाल

Turmeric Farming Tips: हल्दी की 'नरेन्द्र 01' किस्म किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रही है. सिर्फ 7 महीने में तैयार होने वाली इस फसल से एक बीघे में 7-8 लाख तक की कमाई हो सकती है.

Turmeric Farming Tips: अगर आप एक किसान हैं और ऐसी फसल की तलाश में हैं जो कम मेहनत में बैंक बैलेंस को रॉकेट की तरह बढ़ा दे.  तो यह खबर खास आपके लिए है. आज के दौर में खेती सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं. बल्कि एक तगड़ा बिजनेस बन चुकी है. हल्दी की एक खास वैरायटी 'नरेन्द्र 01' इन दिनों किसानों के लिए किसी जैकपॉट से कम साबित नहीं हो रही है.

 खासकर उत्तर प्रदेश के बलिया जैसे इलाकों में तो इसे पीला सोना कहा जा रहा है. इस प्रजाति की सबसे बड़ी खासियत इसका औषधीय गुण और मार्केट में मिलने वाली जबरदस्त डिमांड है. अगर आप ट्रेडिशनल खेती से ऊब चुके हैं और कुछ ऐसा ट्राई करना चाहते हैं जिसमें रिस्क कम और प्रॉफिट मार्जिन ज्यादा हो तो हल्दी की यह मॉडर्न खेती आपके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है.

नरेन्द्र 01 वैरायटी इतनी स्पेशल

हल्दी तो हम सब उगाते हैं. लेकिन नरेन्द्र 01 प्रजाति में कुछ ऐसी बातें हैं जो इसे आम हल्दी से कोसों आगे खड़ा कर देती हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो इसमें करक्यूमिन की मात्रा लगभग 5% तक होती है, जिसकी वजह से इसका रंग गहरा पीला और खुशबू एकदम नेचुरल होती है.

  • ज्यादा करक्यूमिन होने के कारण फार्मा और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में इसकी डिमांड बहुत ज्यादा रहती है.
  • औषधीय गुणों से भरपूर होने की वजह से मार्केट में इसके दाम नॉर्मल हल्दी के मुकाबले काफी बेहतर मिलते हैं.

बलुई या दोमट मिट्टी में यह वैरायटी बहुत शानदार रिजल्ट देती है, जिससे किसानों को क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों का फायदा मिलता है.

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बुवाई का मॉडर्न तरीका 

हल्दी की खेती में सबसे जरूरी है मिट्टी की नमी और सही दूरी का मैनेजमेंट. खेत की अच्छी जुताई के बाद कंद लगाते समय ध्यान रखें कि उनके बीच लगभग डेढ़ फीट का फासला हो ताकि पौधों को फैलने की पूरी जगह मिले.

  • बुवाई के समय 8 से 10 सेंटीमीटर की गहराई रखना सबसे बेस्ट रहता है ताकि कंद का विकास सही से हो सके.
  • बेहतर पैदावार के लिए गोबर की खाद के साथ पोटाश, फास्फोरस और सल्फर का एक बैलेंस्ड मिक्सचर जरूर डालें.

एक बीघा खेत के लिए 100 किलो पोटाश और 40 किलो फास्फोरस का डोज मिट्टी को वह पावर देता है जिससे फसल लहलहा उठती है और बीमारी का खतरा भी कम हो जाता है.

7 महीने में लाखों का मुनाफा

हल्दी की यह फसल सिर्फ 7 महीने के शॉर्ट टर्म पीरियड में तैयार हो जाती है, जो इसे दूसरी लंबी फसलों के मुकाबले ज्यादा प्रॉफिटेबल बनाती है. जब पत्तियां सूखने लगें, तो समझ जाइए कि अब खुदाई का सही समय आ गया है.

  • एक बीघा खेत से आप आसानी से 70 से 80 क्विंटल तक की तगड़ी पैदावार हासिल कर सकते हैं.
  • अगर मार्केट रेट 100 रुपये प्रति किलो भी मिले, तो एक बीघे से ही 7 से 8 लाख रुपये तक की कमाई मुमकिन है.

कम लागत और जबरदस्त रिटर्न की वजह से हल्दी की यह खेती आज के स्मार्ट किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है. अगर आप भी अपनी इनकम को मल्टीप्लय करना चाहते हैं, तो यह सही वक्त है इस मॉडर्न खेती की शुरुआत करने का.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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