टमाटर में दरार पड़ रही है, कहीं ये गलती तो नहीं कर दी?
अगर आपके लगाए गए पौधे के टमाटर में दरार पड़ रही है, तो यह किसी बीमारी नहीं बल्कि गलत सिचांई, अधिक गर्मी और मिट्टी की खराब गुणवत्ता की वजह से होनी वाली आम समस्या है.

अगर आपने घर पर टमाटर का पौधा उगाया है और उसमें फल लगना भी शुरू हो गए है. लेकिन फलों में दरारें पड़ रही है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. यह आपकी कुछ सामान्य गलतियों की वजह से होता है. इसके पीछ गलत सिंचाई, अधिक गर्मी के बाद वर्षा और मिट्टी की खराब गुणवत्ता जैसे कारण होते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि टमाटर में दरार क्यों पड़ती है.
गलत सिंचाई हो सकती है वजह
यदि टमाटर के पौधे को नियमित रूप से पानी दिया जाए तो वे अच्छे से और सवस्थ तरीके से बढ़ता है. अगर पौधे की मिट्टी सूखने पर उसे कई दिनों बाद पानी दिया जाए, तो ऐसी स्थिती में पौधा सारा पानी एक साथ खीचने लगता है. जिसकी वजह से फल का गुदा अंगर तेजी से विकसित होता है लेकिन ऊपर की सतह इतनी तेजी से नहीं फैल पाती और इसी वजह से टमाटर में दरार पड़ने जैसी समस्या सामने आती है.
अधिक गर्मी भी होती है वजह
यदि अधिक गर्मी के बाद वर्षा हो जाए, तो ऐसी स्थिती में भी फलों की गुणवत्ता पर असर पड़ता है. पौधा अधिक पानी सोखने लगता है. वहीं जब पौधा फल देने की स्थिती में हो और बारिश हो जाए, तो अधिक पानी की वजह से फलों के आकार में भी बदलाव आने लगता है.
मिट्टी और खाद की गुणवत्ता का पड़ता है असर
किसी भी पौधे के पूरी तरह विकसित होने के लिए सबसे जरूरी उसकी मिट्टी ही होती है. यदि मिट्टी की गुणवत्ता ही खराब हो, तो फलों के विकसित होने में बाधा आती है. वहीं खाद का उपयोग भी सिमित मात्रा में ही करना चाहिए. खाद की अधिक मात्रा पौधे और उसके फलों को नुक्सान पहुंचा सकती है.
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दरार वाले टमाटर का क्या करें?
यदि आपको पौधे में दरार वाले टमाटर लगे हैं, तो आप उनका उपयोग उनकी अवस्था को देखकर कर सकते हैं. यह टमाटर की कंडिशन के ऊपर निर्भर करता है. यदि टमाटर में दरार होने के बावजूद उसमें कीड़े, फफूंद या किसी भी प्रकार की कोई भी सड़न नहीं दिख रही है, तो आप उसका उपयोग कर सकते हैं. हांलाकि यह पूरी तरह सुनिश्चत करना जरूरी है कि टमाटर साफ हो. अगर दरार सामान्य से ज्यादा हो, तो ऐसे में टमाटर का उपयोग आपको लिए हानिकारक हो सकता है
किन बातों का रखें ध्यान?
टमाटर में दरार पड़ने से बचाने के लिए नियमित अंतराल पर पौधों की सिंचाई करें. मिट्टी के नम होने पर अधिक पानी देने से बचें. वहीं बारिश के दौरान पौधों को किसी सुरक्षित स्थान पर रखें. पौधें जब बढ़ने लगे तो नियमित रूप से उनकी पत्तियों की छटाई करें. जिससे कीड़े लगने जैसी स्थिती को पहले ही रोक दिया जाए. वहीं अधिक खाद का प्रयोग न करें, हो सके तो किसी अच्छी या जैविक खाद का प्रयोग करें.
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