खाद डालने से पहले ऐसे कराएं मिट्टी की जांच, ये है पूरा प्रॉसेस
खेतों में खाद डालने से पहले वैज्ञानिक तरीके से कराएं मिट्टी की जांच, सही रिपोर्ट से फसलों को मिलेगा सटीक पोषण और कम लागत में बढ़ेगी बंपर पैदावार. जानें सॉइल टेस्टिंग का पूरा प्रोसेस.

हमारे देश में बहुत से किसान भाई हर साल खेतों में भरपूर खाद डालते हैं, फिर भी उनकी फसलों की पैदावार वैसी नहीं होती जैसी वे चाहते हैं. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, बिना जरूरत के अंधाधुन रासायनिक खादों का इस्तेमाल करने से न तो फसल अच्छी होती है और न ही मिट्टी की सेहत सुधरती है.
इसका सबसे सही समाधान है मिट्टी की जांच कराना. जैसे बीमार होने पर डॉक्टर मरीज के खून की जांच करता है, ठीक उसी तरह खेत में खाद डालने से पहले मिट्टी का टेस्ट कराना जरूरी है. इससे यह पता चल जाता है कि आपकी मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है और आपको कौन-सी खाद कितनी मात्रा में डालनी चाहिए.
मिट्टी का सैंपल लेने का सही तरीका
मिट्टी की जांच कराने के लिए सबसे पहले और जरूरी कदम है खेत से मिट्टी का सही सैंपल इकट्ठा करना. सैंपल हमेशा फसल की कटाई के बाद और नई फसल की बुवाई या खाद डालने से पहले लेना चाहिए. इसके लिए अपने खेत में अलग-अलग जगहों से 8 से 10 स्थान चुन लें. चुनी गई जगहों पर जमीन के ऊपरी हिस्से से घास-फूस या कचरा हटा लें. इसके बाद खुरपी की मदद से V आकार का करीब 6 से 9 इंच गहरा गड्ढा खोदें. अब उस गड्ढे के एक किनारे से ऊपर से नीचे तक की मिट्टी की एक पतली परत खुरचकर निकाल लें.
सैंपल तैयार करने का आसान फॉर्मूला
खेत के अलग-अलग कोनों से इकट्ठा की गई सभी मिट्टियों को एक साफ प्लास्टिक की बाल्टी या तिरपाल पर अच्छी तरह आपस में मिला लें. इसके बाद उस पूरी मिट्टी को गोल ढेर के रूप में फैला दें। अब इस ढेर को चार बराबर हिस्सों में बांट दें. आमने-सामने के दो हिस्सों को फेंक दें और बचे हुए दो हिस्सों को फिर से आपस में मिला लें.
यह प्रक्रिया तब तक दोहराएं जब तक कि पूरी मिट्टी का वजन लगभग 500 ग्राम न रह जाए. इस बची हुई मिट्टी को थोड़ी देर छांव में सुखा लें. ध्यान रखें कि सैंपल की मिट्टी को कभी भी सीधी धूप में या आग के पास न सुखाएं.
लेबलिंग और जरूरी जानकारियां
मिट्टी सूखने के बाद उसे एक साफ कपड़े या प्लास्टिक की थैली में भर लें. अब एक कागज की पर्ची पर अपनी पूरी जानकारी साफ शब्दों में लिखें. इस पर्ची पर किसान का नाम, पिता का नाम, गांव का नाम, जिला, खेत का खसरा नंबर या पहचान, और पिछली फसल कौन सी थी व अगली फसल कौन सी बोनी है, जैसी जानकारियां लिखना बहुत जरूरी है. इस पर्ची को धागे या स्टेपलर की मदद से थैली के ऊपर सुरक्षित तरीके से लगा दें ताकि जांच केंद्र पर आपके सैंपल की पहचान आसानी से हो सके.
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कहां कराएं जांच और क्या हैं इसके फायदे
तैयार किए गए मिट्टी के सैंपल को आप अपने नजदीकी सरकारी कृषि विज्ञान केंद्र, जिला मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, या कृषि विभाग के कार्यालय में ले जाकर जमा कर सकते हैं. सरकार की मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत यह जांच बहुत ही कम शुल्क या कई जगहों पर बिल्कुल मुफ्त की जाती है.
जांच के कुछ दिनों बाद किसानों को एक सॉइल हेल्थ कार्ड मिलता है, जिसमें मिट्टी का pH Value, जैविक कार्बन, और नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश जैसे जरूरी पोषक तत्वों की सटीक रिपोर्ट होती है. इस कार्ड की सलाह के अनुसार खाद डालने से किसानों का फालतू खर्च बचता है और फसलों की पैदावार में बंपर इजाफा होता है.
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