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पाइनएप्पल की खेती में ये बातें ध्यान रखें, होगी बढ़िया कमाई

गेहूं-धान छोड़कर पाइनएप्पल की खेती से लाखों कैसे कमाएं? एक एकड़ में कितना खर्च आता है और कितना मुनाफा मिलता है. इसका पूरा हिसाब-किताब जानना चाहते हैं तो पढ़ लीजिए यह खबर.

किसानों को अगर खेती में कुछ हटकर करना है और अच्छा मुनाफा कमाना है. तो पारंपरिक फसलों से थोड़ा आगे सोचना ही पड़ेगा. आजकल के किसान ऐसे फलों की खेती पर जोर दे रहे हैं जिनकी मार्केट में हमेशा डिमांड बनी रहती है और दाम भी अच्छे मिलते हैं. इन्हीं दमदार फसलों में अनानास यानी पाइनएप्पल की खेती का नाम सबसे ऊपर आता है. रसीला, खट्टा-मीठा पाइनएप्पल खाना किसे पसंद नहीं है और बाजार में इसकी डिमांड कभी कम नहीं होती.

लेकिन बहुत से किसान सोचते हैं कि इसकी खेती में रिस्क बहुत ज्यादा है. अगर आप भी यही सोचते हैं तो अपनी इस गलतफहमी को आज ही दूर कर लीजिए. पाइनएप्पल की खेती असल में बहुत ही आसान और फायदेमंद सौदा है, बशर्ते आपको इसके तरीके पता हों. चलिए आपको बताते हैं पाइनएप्पल की खेती में किन बातों का रखना है ध्यान जिसमें कम न हो मुनाफा.

सही मिट्टी और खेत की तैयारी 

पाइनएप्पल की खेती के लिए एकदम सही मिट्टी और खेत की सही तैयारी जरूरी है. इस बात को हमेशा ध्यान रखें  कि अनानास के पौधों को जलभराव यानी पानी रुकना बिल्कुल पसंद नहीं है. अगर खेत में पानी रुका तो समझो पौधे की जड़ें सड़ गईं और आपकी मेहनत पानी में मिल गई. इसके लिए सबसे बढ़िया जमीन वह होती है जिसका पीएच मान 5 से 6 के बीच हो और ड्रेनेज व्यवस्था एकदम बढ़िया हो. खेत की तैयारी करते समय मिट्टी को दो-तीन बार अच्छी तरह जोतकर पाटा लगा लें जिससे वह एकदम भुरभुरी हो जाए. 

इसके बाद खेत में भरपूर मात्रा में पुरानी सड़ी हुई गोबर की खाद या फिर वर्मीकम्पोस्ट मिला दें जिससे पौधे को शुरुआत से ही अच्छी मात्रा में पोषण मिल सके. किसानों को हमेशा ऐसी जगहों का चुनाव करना चाहिए जहां बारिश का एक्सट्रा पानी तुरंत बह जाए. सही मिट्टी और सही तैयारी से पाइनएप्पल खेती सही उत्पादन देती है. 

पौधे लगाने का सही समय और दूरी का हिसाब

खेत तैयार करने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह आता है कि पौधे कब और कैसे लगाए जाएं जिससे पैदावार बंपर हो. पाइनएप्पल की खेती के लिए सबसे बढ़िया समय मानसून की शुरुआत यानी जून-जुलाई का महीना माना जाता है. हालांकि अगर आपके पास सिंचाई की बेहतरीन सुविधा है तो आप इसे फरवरी-मार्च में भी लगा सकते हैं. पौधे लगाते वक्त पौधों से पौधे और लाइन से लाइन की दूरी का खास ध्यान रखना बहुत जरूरी है. आमतौर पर किसान डबल-रो सिस्टम अपनाते हैं. 

जिसमें दो लाइनों के बीच करीब डेढ़ से दो फीट की दूरी रखी जाती है. पौधे हमेशा स्वस्थ और मजबूत क्राउन या सकर्स वाले होने चाहिए. जिन्हें सर्टिफाइड नर्सरी से ही खरीदना चाहिए. बहुत ज्यादा गहराई में पौधे न लगाएं. बस मिट्टी में इतनी गहराई तक दबाएं कि वह सीधे खड़े रह सकें. सही दूरी और सही समय पर लगाए गए पौधे तेजी से बढ़ते हैं और आगे चलकर आपको बढ़िया साइज के और बेहतरीन क्वालिटी के पाइनएप्पल फल देते हैं.


पाइनएप्पल की खेती में ये बातें ध्यान रखें, होगी बढ़िया कमाई

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खाद और सिंचाई का रखें ध्यान

एक बार पौधे जमीन में लग गए, तो उनकी सही देखभाल और समय पर खाद-पानी देना ही आपके मुनाफे की गारंटी तय करता है. पाइनएप्पल के पौधों को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. इसलिए गर्मियों में हफ्ते में एक बार और सर्दियों में 10-15 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करना काफी रहता है. खाद की बात करें तो नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित डोज समय-समय पर देना जरूरी है, खासकर जब पौधे में फूल आने लगे और फल बनना शुरू हो. 

एक एकड़ से मिलेगा इतना मुनाफा 

अगर आप एक एकड़ में खेती शुरू करते हैं. तो पौधे खरीदने, खेत की जुताई, खाद-पानी और लेबर का कुल खर्चा लगभग 70 हजार से 1 लाख रुपए के बीच बैठता है. पाइनएप्पल की सबसे अच्ची बात यह है कि एक एकड़ में आसानी से 15 से 18 हजार पौधे लग जाते हैं. डेढ़ से दो साल में जब फसल तैयार होकर बाजार में बिकने जाती है.

तो थोक भाव में भी एक एकड़ से आराम से 8 से 10 लाख रुपए तक की बंपर कमाई हो जाती है. सारे खर्च निकालकर भी 5 से 6 लाख रुपए का मुनाफा आपकी जेब में सीधे आता है. जो कि किसी भी पारंपरिक फसल से कई गुना ज्यादा है.


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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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