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Mushroom Cultivation: अब किसी भी सीजन में उगा सकते हैं मशरूम, मुनाफा बढ़ाने में काम करेगी ये तकनीक

Mushroom Farming: मशरूम के एक सर्द मौसम की फसल है, लेकिन विपरीत तापमान में मशरूम को उगाना अपने आप में बड़ा चेलेंज है, लेकिन इस तकनीक की मदद से मशरूम के पौधों को उपयुक्त तापमान मिल जाता है

Mushroom Cultivation: आधुनिकता के इस दौर में हमारी खेती भी एडवांस होती जा रही है. अब मशीनों और नई तकनीकों से खेती का काम कई गुना आसान और सुविधानक बना दिया है.सरकार भी लगातार किसानों को तकनीकों, उन्नत विधियों को अपनाकर आत्मनिर्भर बनने की ओर प्रेरित कर रही है. किसानों की सहूलियत के लिए कुछ राज्य सरकारें आर्थिक मदद भी उपलब्ध करवा रही  हैं, ताकि तकनीकों को अपनाने की लागत किसानों के ऊपर भारी ना पड़े. इस तरह खेती में उद्यमिता को भी बढ़ावा मिल रहा है. कुछ समय पहले ही एक ऐसा मॉडल इजाद किया गया है, जिसके जरिए अब किसी भी मौसम में मशरूम का उत्पादन ले सकते हैं.

क्या है मशरूम फार्मिंग की नई तकनीक
बिहार के गया जिले क रहने वाले किसान राकेश सिंह मे मशरूम की खेती की एक नई तकनीक इजाद कर ली है, जिसमें मशरूम उत्पादन यूनिट को पुआल, गेहूं की भूसी और एयर कंडीशनर के इस्मेमाल से तैयार किया गया है. राकेश सिंह बताते हैं कि यहां हम पराली में मशरूम का उत्पादन ले रहे हैं. ये एक सर्द मौसम की फसल है, इसलिए तापमान को नियंत्रित करने के लिए एयर कंडीशनर भी लगाए गए हैं.

जाहिर है कि मशरूम के एक सर्द मौसम की फसल है, लेकिन विपरीत तापमान में मशरूम को उगाना अपने आप में बड़ा चेलेंज है,  लेकिन इस तकनीक की मदद से मशरूम के पौधों को उपयुक्त तापमान मिल जाता है, जिससे मशरूम उत्पादन में नुकसान की संभावना कम हो जाती है. आने वाले गर्मियों में मशरूम उत्पादन की ये तकनीक फायदे का सौदा साबित हो सकती है.

राकेश सिंह बताते हैं कि इस तकनीक से किसानों को 12 महीने मशरूम का उत्पादन मिलेगा, जिससे रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे. साल 2020 से मशरूम उत्पादन करने वाले राकेश सिंह आज रोजाना 300 किलोग्राम से भी अधिक उत्पादन ले रहे हैं.

आप भी उगा सकते हैं मशरूम
मशरूम उगाने के लिए कोई बड़े खेत-खलिहानों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि घर के अंदर 6 बाय 6 के कमरे में, छत पर झोपड़ी डालकर या फिर एक छोटी से यूनिट लगातार भी इस फंगी/कवक को उगाया जा सकता है, हालांकि मशरूम के पौधे को विकसित होने के लिए अंधेरे की आवश्यकता होती है, रौशनी में पौधा खराब होने लगता है.

इसे उगाने के लिए मिट्टी की भी आवश्यकता नहीं होती, बल्कि पानी में भीगा हुआ भूसा ही रॉ मटेरियल के तौर पर काम करता है. हां, खाद के तौर पर वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे बेहतर उत्पादन हासिल करने में भी मदद मिलती है. इन सभी चीजों को मशरूम स्पॉन के साथ पॉलीबैग में भरकर बंद कर दिया जाता है, जिससे हवा का प्रवाह ना पहुंचे.  

पौष्टिक फल है मशरूम
आपको बता दें कि मशरूम के सेवन से शरीर में विटामिन-डी की आपूर्ति होती रहती है. इससे शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है औक बीमारियां लगने का खतरा भी नहीं रहता, हालांकि विटामिन डी ज्यादा सब्जियों में होती भी नहीं है, इसलिए बाजार में मशरूम की अच्छी-खासी मांग है. इसमें सेलेनियम भी मौजूद होता है, जिससे वजन घटाने में भी मदद मिलती है.

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