कम पानी में भी अच्छी उपज! रबी में मूंगफली की इन 5 किस्मों पर करें गौर
रबी में किसान मूंगफली की खेती कर सकते हैं. इसकी खेती के लिए ज्यादा पानी की जरूरत भी नहीं होती है. ऐसे में यहां जानें मूंगफली की 5 उन्नत किस्में, जो कम समय में तैयार होकर अच्छी पैदावार दे सकती हैं.

Moongfali Ki Kheti: सूखे के इस संकट के बीच किसानों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि, ऐसी कौन सी फसल चुनें जो कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे. खासकर ऐसे इलाकों में जहां कम बारिश होने की संभावना है, उन किसानों को फसल का चुनाव सोच-समझकर ही करना चाहिए. ऐसे में किसान मूंगफली की ओर भी रुख कर सकते हैं. इसकी सही किस्म चुनकर किसान बेहतर उपज लेने की कोशिश कर सकते हैं.
हालांकि, अच्छी पैदावार लेने के लिए सिर्फ सही किस्म चुनना ही काफी नहीं है. इसके लिए खेत की मिट्टी, बुवाई का सही समय, खेत की तैयारी और फसल की देखभाल पर भी ध्यान देना जरूरी है.
आरजी-425: 18 से 36 क्विंटल तक पैदावार
आरजी-425 किस्म करीब 120 से 125 दिन में तैयार हो जाती है. इसकी पैदावार 18 से 36 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई जाती है. इसकी खास बात यह है कि इसमें सूखे और कॉलर रॉट जैसी बीमारी को सहन करने की क्षमता होती है.
जीजी-2: 25 से 30 क्विंटल तक पैदावार
जीजी-2 को पकने में करीब 120 से 125 दिन लगते हैं. इससे औसतन 25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज मिल सकती है. इसका पौधा छोटा और गुच्छे में बढ़ने वाला होता है. बुवाई से पहले अपने इलाके की मिट्टी और मौसम के हिसाब से इसकी उपयुक्तता जरूर जांच लें.
एचएनजी-69: 25 से 28 क्विंटल तक पैदावार
यह किस्म करीब 125 दिन में तैयार होती है और इससे 25 से 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार मिलने की संभावना रहती है. इसे कॉलर रॉट, तना गलन और शुरुआती धब्बा रोग के प्रति प्रतिरोधी बताया जाता है. रोगों का असर कम होने से फसल की देखभाल में मदद मिल सकती है.
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जीजी-7: 21 से 29 क्विंटल तक पैदावार
अगर किसान कम समय में तैयार होने वाली मूंगफली की किस्म लगाना चाहते हैं, तो जीजी-7 अच्छा विकल्प हो सकती है. यह किस्म करीब 90 से 105 दिन में तैयार हो जाती है. इससे एक हेक्टेयर में 21 से 29 क्विंटल तक उपज मिल सकती है. इस किस्म पर टिक्का रोग का असर भी कम होता है. राजस्थान के मौसम को देखते हुए इसे वहां की खेती के लिए सही माना जाता है.
बुवाई से पहले खेत की तैयारी भी जरूरी
मूंगफली के लिए ऐसी मिट्टी अच्छी रहती है, जिसमें पानी जमा न हो. भुरभुरी दोमट या बलुई दोमट मिट्टी में इसकी खेती की जा सकती है. खेत तैयार करने के लिए पहले मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करें. इसके बाद कल्टीवेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरा बनाएं और पाटा लगाकर खेत समतल कर लें.
बीज की मात्रा का रखें ध्यान
कम फैलने वाली किस्मों के लिए प्रति हेक्टेयर 75 से 80 किलो बीज और ज्यादा फैलने वाली किस्मों के लिए 60 से 70 किलो बीज की जरूरत बताई गई है. बुवाई से 10 से 15 दिन पहले स्वस्थ फलियों से दाने निकाल लें. बीज की सही मात्रा और बुवाई का समय इलाके के मौसम और चुनी गई किस्म के हिसाब से तय करें.
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