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इस तरीके से करेंगे राजमा की खेती तो अच्छी होगी पैदावार, जान लें काम की बात

Kidney Beans Farming Tips: राजमा की खेती अब किसानों के लिए मुनाफे का नया जरिया बन गई है. इस विधि अपनाकर और सही दूरी पर बीज बोकर आप पैदावार को कई गुना बढ़ा सकते हैं.

Kidney Beans Farming Tips:  राजमा की खेती का क्रेज आजकल किसानों के बीच तेजी से बढ़ रहा है. क्योंकि यह कम समय में तैयार होने वाली एक हाई-वैल्यू फसल है. भारत के हर कोने में राजमा-चावल की पॉपुलैरिटी के चलते इसकी मार्केट डिमांड हमेशा बनी रहती है. जिससे किसानों को उपज बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ता. अगर आप पारंपरिक फसलों के बजाय कुछ ऐसा उगाना चाहते हैं जो कम लागत में तगड़ा मुनाफा दे. तो राजमा एक बेहतरीन चॉइस है. 

बस जरूरत है खेती के पुराने तरीकों को छोड़कर मॉडर्न और साइंटिफिक अप्रोच अपनाने की. सही मिट्टी का चुनाव, बीजों का उपचार और सिंचाई का सही तालमेल बिठाकर आप अपनी बंजर दिखने वाली जमीन से भी सोना उगा सकते हैं. इस लेख में हम आपको राजमा उगाने के उन स्मार्ट तरीकों के बारे में बताएंगे. जिन्हें अपनाकर आप अपनी पैदावार को कई गुना तक बढ़ा सकते हैं और मंडी में अपनी फसल का टॉप रेट हासिल कर सकते हैं.

इस तरह करें बुवाई

  • एक लाइन से दूसरी लाइन के बीच की दूरी लगभग 30 से 40 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. जिससे हवा और धूप हर पौधे तक बराबर पहुँच सके.
  • लाइन के अंदर एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच का गैप 10 से 15 सेंटीमीटर होना चाहिए जिससे जड़ों को मिट्टी से पूरा पोषण मिल सके.
  • बीजों को मिट्टी में करीब 5 से 6 सेंटीमीटर की गहराई पर ही बोना चाहिए जिससे कि अंकुरण आसानी से और सही तरीके से हो.
  • इस विधि से बुवाई करने पर न केवल बीज की बचत होती है. बल्कि बाद में निराई-गुड़ाई और खाद डालने का काम भी बहुत आसान हो जाता है.

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सिंचाई के बाद करें ये काम

  • पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिनों बाद करें. लेकिन ध्यान रहे कि राजमा के खेत में पानी कभी रुकना नहीं चाहिए. वरना जड़ें सड़ने का डर रहता है.
  • फूल आने और फलियां बनते समय नमी का खास ख्याल रखें. क्योंकि इसी दौरान दाने अपना असली साइज और चमक लेते हैं.
  • मिट्टी की तैयारी के समय ही अच्छी मात्रा में वर्मीकंपोस्ट या गोबर की खाद मिलाना जरूरी है क्योंकि राजमा को पोषण की काफी जरूरत होती है.
  • नाइट्रोजन और फास्फोरस का सही बैलेंस बनाकर डालें जिससे पौधे की इम्युनिटी बनी रहे और फसल बीमारियों से लड़ सके.

 हार्वेस्टिंग के लिए ये तरीके अपनाएं

  • राजमा की फसल पर मोजेक वायरस और जड़ सड़न का खतरा रहता है. इसलिए हमेशा सर्टिफाइड और उपचारित बीजों का ही इस्तेमाल करें.
  • अगर खेत में किसी तरह के कीट का हमला दिखे. तो तुरंत नीम के तेल या किसी असरदार जैविक कीटनाशक का छिड़काव करना एक समझदारी भरा फैसला होगा.
  • जब फलियां पीली पड़कर सूखने लगें. तभी उनकी कटाई करें ताकि दानों की क्वालिटी बरकरार रहे ज्यादा देरी से दाने खेत में बिखर सकते हैं.
  • फसल काटने के बाद उन्हें अच्छी तरह धूप में सुखाएं और नमी पूरी तरह खत्म होने के बाद ही थ्रेशिंग करके स्टोर करें ताकि लंबे समय तक खराब न हो.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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