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Garlic and Chili Solution: लहसुन और मिर्च के घोल से कैसे भगाए जाते हैं फसल के कीड़े? दादा-परदादा के जमाने का है यह जुगाड़

वहीं पहले के समय में दादा-परदादा भी ऐसे कई जुगाड़ अपनाते थे, जिससे फसल में कीड़े-मकोड़े न लगे. इन्हीं जुगाड़ में से एक लहसुन और मिर्च का घोल भी था, जिससे फसलों का बचाव किया जाता था.

Garlic and Chili Solution: किसानों को फसल की खेती में सबसे ज्यादा खतरा कीड़े-मकोड़ों का लगा रहता है. इसके लिए आज के समय में किसान कई तरह के फर्टिलाइजर, डीएपी और यूरिया जैसे खाद का उपयोग करते हैं. वहीं पहले के समय में दादा-परदादा भी ऐसे कई जुगाड़ अपनाते थे, जिससे फसल में कीड़े-मकोड़े न लगे. इन्हीं जुगाड़ में से एक लहसुन और मिर्च का घोल भी था, जिससे फसलों का बचाव किया जाता था. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि लहसुन और मिर्च के घोल से फसल के कीड़े कैसे भगाए जाते हैं. 

लहसुन और मिर्च का गोल कैसे करता है काम? 

जिस तरह किसी बीमारी में दवा शरीर की रक्षा करती है, उसी तरह फसल तरह लहसुन और मिर्च से तैयार जैविक गोल फसलों को कीड़ों से बचाने का काम करता है. इस घोल में मौजूद तीखे और नेचुरल तत्व कीटों को पौधों से दूर रखने में मदद करते हैं. इस गोल को आमतौर पर लहसुन और मिर्च से बनाया जाता है, लेकिन कई बार इसमें नीम की पत्तियां और गोमूत्र जैसी चीज भी मिलाई जाती है. 

कैसे बनाया जाता है लहसुन और मिर्च का गोल?

लहसुन और मिर्च का गोल बनाने के लिए किसान लहसुन, हरी मिर्च या लाल मिर्च, नीम की पत्तियां और गोमूत्र जैसी चीजों को पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक सड़ने के लिए छोड़ सकते हैं. इस दौरान मिश्रण में मौजूद प्राकृतिक तत्व अच्छी तरह घुल जाते हैं और एक शक्तिशाली जैविक घोल तैयार हो जाता है. जब इस घोल को छानकर पानी में मिलाया जाता है और फसलों पर छिड़काव किया जाता है, तो इसकी तेज गंध और नेचुरल गुण कई तरह के हानिकारक कीटों को फसल से दूर रखने का काम करते हैं. खासतौर पर माहू, सफेद मक्खी, ट्रिप्स और पत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों पर इसका अच्छा असर देखा जाता है. 

घोल में क्यों मिलाया जाती है लहसुन और मिर्ची?

दरअसल लहसुन में नेचुरल सल्फर कंपाउंड पाए जाते हैं, जबकि मिर्ची में कैप्साइसिन नामक तत्व मौजूद होता है. यही कारण है कि दोनों की गंध और तीखापन कीड़ों को पसंद नहीं आता, जब इनका घोल फसल पर छिड़का जाता है, तो कीड़े पौधों पर हमला करने से बचते हैं. वहीं नीम की पत्तियां नेचुरल कीटनाशक की तरह काम करती है और गोमूत्र घोल की प्रभावशीलता का बढ़ाने के साथ-साथ पौधों को पोषण देने में भी मदद करता है. 

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घोल के फसल पर छिड़काव के बाद क्या होता है? 

लहसुन और मिर्च के घोल का फसल पर छिड़काव के बाद घोल की एक पतली परत पत्तियों और बालियों पर बन जाती है. इससे कीटों का प्रकोप कम होने लगता है. वहीं रासायनिक कीटनाशकों की तुलना में यह घोल फसल, मिट्टी और पर्यावरण के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. कृषि एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर कीड़े का दबाव ज्यादा हो तो 10 से 12 दिन के बाद फसल पर दोबारा इस घोल का छिड़काव किया जा सकता है. इसके नियमित उपयोग से फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और उत्पादन पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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