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Okra Farming: अपने खाली प्लॉट पर लगाएं भिंडी, पूरे मोहल्ले में खत्म हो जाएगा सब्जी का अकाल 

भिंडी की फसल दोमट और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में बेहतर होती है. प्लॉट की मिट्टी को अच्छी तरह भुरभुरा कर लें और उसमें गोबर की सड़ी खाद, कंपोस्ट या वर्मी कंपोस्ट मिला दें.

Okra Farming: मानसून का मौसम सब्जियों की खेती के लिए सबसे बेहतर माना जाता है. बारिश के दौरान मिट्टी में नमी बनी रहती है, जिससे कई सब्जियां तेजी से बढ़ती है. अगर आपके घर के पास खाली प्लॉट तो वहां भिंडी की खेती करके अच्छे पैदावार हासिल की जा सकती है. भिंडी ऐसी सब्जी है जिसकी मांग हर समय घर में रहती है और उसे उगाना भी आसान माना जाता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि आप अपने प्लॉट में भिंडी के कैसे लगा सकते हैं. 

सबसे पहले अच्छी किस्म के बीज का करें चयन 

भिंडी की अच्छी पैदावार के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज चुनाव सबसे जरूरी है. बीज हमेशा विश्वसनीय सोर्स या सही कृषि केंद्र से खरीदें. वहीं बुवाई से पहले भिंडी के बीजों को कुछ घंटों तक पानी में भिगोने से अंकुरण बेहतर हो सकता है. 

मिट्टी की तैयारी पर दें ध्यान 

भिंडी की फसल दोमट और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में बेहतर होती है. प्लॉट की मिट्टी को अच्छी तरह भुरभुरा कर लें और उसमें गोबर की सड़ी खाद, कंपोस्ट या वर्मी कंपोस्ट मिला दें. इससे पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता है और जड़ों का विकास बेहतर होता है. इसके बाद भिंडी के बीजों को करीब 1.5 से 2 सेंटीमीटर गहराई तक पर बोया जा सकता है. पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखना जरूरी है, ताकि उन्हें बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके. अंकुरण के बाद कमजोर पौधों को  हटाकर मजबूत पौधों को बढ़ने दिया जाए. 

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धूप और पानी दोनों जरूरी 

भिंडी के पौधे को रोजाना कम से कम 6 से 8 घंटे की धूप की जरूरत होती है, इसलिए ऐसी जगह का चयन करें जहां पर्याप्त मात्रा में धूप आती हो और बारिश के मौसम में एक्स्ट्रा पानी से बचाव जरूरी हो. क्योंकि जलभराव होने पर फसल जल्दी खराब हो सकती है. अच्छी फसल की अच्छी बढ़ावार और ज्यादा उत्पादन के लिए 15 से 20 दिन के अंतराल पर कंपोस्ट या वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है. 

किट और रोगों से ऐसे करें बचाव 

मानसून में नमी बढ़ने से कीट और फफूंद जनित रोगों का इस्तेमाल भी बढ़ जाता है. ऐसे में पौधे की नियमित निगरानी जरूरी है. नीम तेल का घोल या दूसरे जैविक उपाय अपनाकर कीटों को नियंत्रित किया जा सकता है. संक्रमित पत्तियों को तुरंत हटा देना चाहिए. वहीं भिंडी की अधिकांश किस्मों में बुवाई से 45 से 60 दिनों के अंदर फलियां तैयार होने लगती है. जब भिंडी 3 से 4 इंच लंबी और मुलायम हो, तब उसकी तुड़ाई कर लेनी चाहिए. नियमित तुड़ाई करने से पौधे लंबे समय तक उत्पादन देते रहते हैं.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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