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High Value Farming: ये फसल नहीं ATM है ATM, एक बार मेहनत कर लगाएं ये ड्राईफ्रूड, खूब छापें नोट 

High Value Farming: अखरोट की खेती किसानों के लिए कम मेहनत में लंबे समय तक कमाई का शानदार जरिया बन रही है. एक बार पेड़ लगाने के बाद सालों तक इससे लाखों की कमाई की जा सकती है.

High Value Farming: अगर कोई किसान ऐसी फसल की तलाश में है, जो एक बार मेहनत करने के बाद कई सालों तक कमाई देती रहे, तो अखरोट की खेती उसके लिए एक शानदार विकल्प बन सकती है. यही वजह है कि कई लोग इसे खेती का “ATM” भी कहने लगे हैं. पहाड़ी और ठंडे इलाकों में उगाया जाने वाला यह ड्राई फ्रूट बाजार में सालो साल अच्छी कीमत पर बिकता है. साथ ही इसमें खास बात यह है कि अखरोट का पेड़ एक बार तैयार हो जाए, तो सालों तक लगातार फल देता रहता है. ऐसे में किसानों को हर साल नई फसल लगाने की ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ती और कम मेहनत में अच्छी कमाई होती रहती है.

अखरोट की खेती से कितनी हो सकती है कमाई?

विशेषज्ञों के अनुसार, एक तैयार अखरोट का पेड़ लगभग 40 से 100 किलो तक उत्पादन दे सकता है. वहीं बाजार की बात करें, तो अच्छे अखरोट की कीमत 400 से 700 रुपये किलो तक मिल जाती है. ऐसे में अगर किसी किसान के पास 20 पेड़ों का छोटा बाग भी हो, तो वह सालाना 5 से 6 लाख रुपये तक की कमाई कर सकता है. यही कारण है कि अब कई किसान पारंपरिक खेती छोड़कर अखरोट जैसी हाई वैल्यू फसलों की तरफ बढ़ रहे हैं. भारत ही नहीं, विदेशों में भी इसकी काफी मांग रहती है, जिससे किसानों को अच्छा बाजार मिल जाता है.

किन इलाकों में होती है अच्छी खेती?

अखरोट की खेती ठंडे मौसम वाले इलाकों में सबसे अच्छी मानी जाती है. इसे करीब 900 से 3000 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आसानी से उगाया जा सकता है. वही जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में इसकी खेती बड़े स्तर पर होती है. साथ ही अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी इसके लिए सबसे बेहतर मानी जाती है. इसके पौधे लगाने का सही समय दिसंबर से फरवरी या मार्च तक माना जाता है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसान ग्राफ्टेड यानी कलमदार पौधों का इस्तेमाल करें, क्योंकि ये जल्दी फल देना शुरू कर देते हैं.

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कम देखभाल में सालों तक देता है फायदा

अखरोट का पेड़ लगाने के करीब 3 से 4 साल बाद फल देना शुरू कर देता है. इसके बाद यह 30 से 50 साल या उससे भी ज्यादा समय तक लगातार उत्पादन देता रहता है. वहीं शुरुआत के कुछ सालों में पौधों को सिंचाई और खाद की जरूरत होती है, लेकिन एक बार पेड़ मजबूत हो जाए तो इसकी देखभाल काफी आसान हो जाती है. साथ ही पौधों के बीच करीब 10 से 12 मीटर की दूरी रखना जरूरी माना जाता है, ताकि पेड़ अच्छी तरह बढ़ सकें. यही वजह है कि किसान इसे लंबे समय तक फायदा देने वाली फसल मानते हैं.

सरकार भी दे रही इस खेती को बढ़ावा

सरकार भी अब अखरोट जैसी फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है. बजट 2026-27 के तहत जम्मू-कश्मीर और दूसरे पहाड़ी इलाकों में हाई-डेंसिटी अखरोट खेती को बढ़ावा देने के लिए खास मदद देने की बात कही गई है. जिसमें सरकार का मकसद है कि किसानों की आय बढ़े और भारत का अखरोट अंतरराष्ट्रीय बाजार में और मजबूत पहचान बना सके. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान सही जानकारी और तकनीक के साथ इसकी खेती करें, तो अखरोट आने वाले समय में कमाई का बड़ा जरिया बन सकता है.

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