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किसानों को इन कामों के लिए सरकार देगी 35% तक की सब्सिडी, ऐसे उठाएं योजना का फायदा

PMMFME Scheme: देश और राज्यों की सरकारें किसानों के लिए कई बड़ी योजनाएं चला रही हैं. इसी कड़ी में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में खुद का काम शुरू करने के लिए भारी सब्सिडी और ट्रेनिंग दी जा रही है.

PMMFME Scheme: देश में अलग-अलग राज्यों की सरकारें और केंद्र सरकार किसानों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाती हैं. इन योजनाओं का मुख्य मकसद खेती की लागत को कम करना, फसलों का सही दाम दिलाना और किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना है. केंद्र सरकार जहाँ पूरे देश के स्तर पर बड़े फैसले लेती है. वहीं राज्य सरकारें अपने क्षेत्र की विशेष जरूरतों और फसलों के हिसाब से अलग-अलग सब्सिडी और मदद मुहैया कराती हैं. प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) आज के दौर में उन लोगों के लिए एक बड़ी राहत और उम्मीद बनकर आई है जो खेती के साथ-साथ खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं. चलिए आपको बताते हैं कैसे किसान भाई इस योजना का लाभ लेकर आप कैसे एक सफल उद्यमी बन सकते हैं.

सरकार देगी सब्सिडी

पीएमफएमई योजना में किसान सरकार स बिजनेस शुरू कर सकते हैं है. अगर आप अपना कोई भी छोटा फूड प्रोसेसिंग यूनिट जैसे दाल मिल, राइस मिल या जैम-जेली बनाने का प्लांट लगाना चाहते हैं. तो सरकार कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट पर 35% की सब्सिडी प्रदान करती है, जिसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये तक हो सकती है. इसका मतलब है कि आपकी पूंजी का एक बड़ा हिस्सा सरकार वहन करेगी. 

जिससे आपके ऊपर कर्ज का बोझ कम होगा. यह योजना 'क जिला एक उत्पाद (ODOP) के सिद्धांत पर काम करती है, जिसमें जिले की खास फसल या उत्पाद को ग्लोबल पहचान दिलाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके जरिए आप अपनी स्थानीय फसल को एक ब्रांड के रूप में बाजार में उतार सकते हैं.

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इन कामों में मिलती है मदद

सिर्फ पैसा मिलना ही काफी नहीं होता, किसी भी बिजनेस को चलाने के लिए सही स्किल और मार्केटिंग की भी जरूरत होती है. PMFME योजना के तहत सरकार लाभार्थियों को प्रॉपर ट्रेनिंग और हैंड-होल्डिंग सपोर्ट भी देती है. इसमें आपको बताया जाता है कि फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स (FSSAI) को कैसे मेंटेन करना है. 

पैकिंग को आकर्षक कैसे बनाना है और अपने प्रोडक्ट की ब्रांडिंग कैसे करनी है. सरकार ग्रुप्स और सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (SHGs) को कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए भी सहायता देती है. जब आपका प्रोडक्ट अच्छी पैकिंग और सरकारी सर्टिफिकेशन के साथ मार्केट में उतरता है. तो ग्राहकों का भरोसा बढ़ जाता है और आपको अपनी मेहनत का अच्छा दाम मिलता है.

जान लें आवेदन की प्रोसेस

इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन की प्रोसेस काफी आसान है. आप इसके आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं. आवेदन के लिए आपको कुछ बुनियादी दस्तावेजों जैसे आधार कार्ड, बैंक स्टेटमेंट, प्रोजेक्ट रिपोर्ट और अपनी जमीन या रेंटल एग्रीमेंट की जरूरत होगी. व्यक्तिगत उद्यमियों के अलावा सहकारी समितियां और किसान उत्पादक संगठन (FPO) भी इसके पात्र हैं. 

आवेदन करने के बाद जिला स्तरीय समिति आपके प्रोजेक्ट की समीक्षा करती है और लोन व सब्सिडी की प्रोसेस आगे बढ़ती है. अगर आप कम निवेश में फूड सेक्टर में अपना नाम बनाना चाहते हैं. तो यह मौका हाथ से जाने न दें और आज ही अपना प्रोजेक्ट प्लान तैयार करें.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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