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मोटा पैसा कमाना है तो शुरू करें अदरक की खेती, डिमांड ऐसी कि हाथों-हाथ बिक जाएगी फसल

Ginger Farming Tips: अदरक की खेती अब बहुत से किसानों के लिए मुनाफे की गारंटी बन गई है. इसकी डिमांड साल भर रहने की वजह से फसल मंडी में हाथों-हाथ बिक जाती है.

Ginger Farming Tips: आज के दौर में अगर आप खेती को सिर्फ गुजारे का जरिया समझ रहे हैं, तो आप बड़ी गलती कर रहे हैं. आज की खेती एक हाई-प्रॉफिट बिजनेस है और अदरक इसमें सबसे आगे खड़ा है. अदरक एक ऐसी 'कैश क्रॉप' है जिसकी डिमांड किचन से लेकर दवाइयों की इंडस्ट्री तक साल के 12 महीने बनी रहती है. चाहे कड़क चाय का स्वाद हो या आयुर्वेद के नुस्खे, अदरक के बिना सब अधूरा है.

यही वजह है कि मंडी में इसका रेट कभी भी बहुत नीचे नहीं गिरता. अगर आप पारंपरिक अनाज की खेती से हटकर कुछ ऐसा करना चाहते हैं जो आपकी जेब भारी कर दे, तो अदरक की खेती आपके लिए बेस्ट ऑप्शन है. इसमें रिस्क कम और रिटर्न बहुत ज्यादा है. क्योंकि इसकी फसल खराब होने का डर कम होता है और इसे लंबे समय तक स्टोर भी किया जा सकता है.

बुवाई का सही समय और मिट्टी का चुनाव

अदरक से मोटा मुनाफा कमाने के लिए सबसे जरूरी है सही टाइमिंग. अदरक की बुवाई के लिए अप्रैल और मई का महीना सबसे बेस्ट माना जाता है, हालांकि जहां सिंचाई की अच्छी व्यवस्था है वहां किसान इसे जून तक भी लगा सकते हैं. मिट्टी की बात करें तो जल निकासी वाली दोमट मिट्टी इसके लिए इसके लिए बेस्ट है.

 ध्यान रहे कि जिस खेत में पानी रुकता हो. वहां अदरक न लगाएं क्योंकि इससे गांठें सड़ने का डर रहता है. बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करके उसे भुरभुरा बना लें और गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट का भरपूर इस्तेमाल करें. याद रखिए मिट्टी जितनी उपजाऊ और ढीली होगी. अदरक की गांठें उतनी ही बड़ी और वजनदार होंगी. जिससे आपको मार्केट में प्रीमियम रेट मिलेगा.

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ऐसे होती है कमाई

अदरक की खेती में एक बार की मेहनत आपको लखपति बना सकती है. बीज के रूप में पुरानी अदरक की स्वस्थ गांठों का इस्तेमाल किया जाता है. बुवाई के बाद करीब 8 से 9 महीने में फसल तैयार हो जाती है. सबसे अच्छी बात यह है कि आप इसे कच्चा यानी हरे अदरक के तौर पर भी बेच सकते हैं और सुखाकर सोंठ बनाकर भी जो और भी महंगे दाम पर बिकती है.

एक एकड़ में अदरक की खेती से किसान भाई आराम से 5 से 7 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. बस आपको समय-समय पर निंदाई-गुड़ाई और नमी का ध्यान रखना होगा. इसकी डिमांड इतनी जबरदस्त है कि आपको खरीदार ढूंढने नहीं जाना पड़ेगा, व्यापारी खुद आपके खेत तक खिंचे चले आएंगे.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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