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क्या है वो तकनीक, जिससे कच्चे फल 4 से 5 दिन में पक जाते हैं, खराब भी नहीं होते, होता है लाखों का मुनाफा

फलों के सड़ने से किसानों को लाखों रुपये का नुकसान होता है. इसी से बचाने के लिए फ्रूट राइपनिंग तकनीक बेहद कारागर है. इससे कच्चा फल 4 से 5 दिन में पक जाता है. कई दिन तक सुरक्षित रहता है.

Fruit Ripening Technique: रबी सीजन चल रहा है. खेतों में किसान रबी सीजन की फसलों की बुवाई कर चुके हैं, जबकि काफी किसान बुवाई कर रहे हैं. किसानों की उपज के बाद सबसे बड़ी समस्या उसके भंडारण की होेती है. देखना होता है कि जब बड़ी मात्रा में किसी फल का उत्पादन हो गया है तो उसे सड़ने या गलने से कैसे बचाया जाए. आमतौर पर सेब, केला जैसे फलों के सामने यही दिक्कत पेश आती है. इनके अधिक उत्पादन के कारण कई बार भंडारण ठीक नहीं हो पाता है. किसानों को खराब फल सड़क पर फेंकने पड़ते हैं. हालांकि राज्य सरकार किसानों की मदद के लिए कोल्ड स्टोरेज और पैक हाउस में फल-सब्जी भंडारण की व्यवस्था की जाती हैं. वहीं वैज्ञानिकों ने नई तकनीक पर जोर दिया है. इसे फ्रूट राइपनिंग तकनीक कहा जा रहा है. इसमें किसी कच्चे फल को स्टोरेज कर उसे पकाया भी सकता है. आज इसी तकनीक के बारे में जानने की कोशिश करते हैं. 

क्या है फ्रूट राइपनिंग तकनीक?
फल पकने के बाद यदि नहीं बिक रही है तो उसे सड़ने व गलने से बचाने के लिए फ्रूट राइपनिंग तकनीक ही काम आती है. दरअसल, इस तकनीक का लाभ यह है कि आमतौर पर किसान फलों को पकने के बाद ही तोड़ता है. अब यदि उस फल के भंडारण की सही व्यवस्था न हो तो उसके खराब होने का खतरा रहता है. फ्रूट राइपनिंग तकनीक फलों के खराब होने से बचाव के लिए आजमाई जाती है. इस तकनीक का लाभ लेने के लिए फल व सब्जियों को पकने से पहले ही तोड़ लिया जाता है. इन्हें कोल्ड स्टोर में रख लिया जाता है. फलों को पकाने के लिए भंडारण केंद्र में कोल्ड स्टोरेज की तरह ही चैंबर बनाएं जाते हैं. इन चौंबरों में एथिलीन गैस छोड़ी जाती है, यह फलों को जल्दी पकने में मदद करती हैं. फल 4 से 5 दिन में पक जाते हैं. फल पकने के बाद भी केंद्र में रखते हैं. बाद में इनको बेच दिया जाता है. 

पुरानी तकनीक से होता है नुकसान
फलों को जैविक या नेचुरल तरीके से पकाने के अपने लाभ हैं. ये स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं. कुछ किसान इस पद्धति से फसल पकाते हैं तो उन्हें नुकसान भी हो जाता है. कई बार फसल सड़ जाती हैं. इसके अलावा देश में कई स्थानों पर फलों को पकाने के लिए जूट व बोरी में भूसे या कागज के साथ दबाकर रखा जाता है. इससे कई बार फल जल्दी सड़ जाते हैं. इससे किसानों को लाखों का नुकसान होता है. ऐसे किसानों के लिए फ्रूट राइपनिंग तकनीक बेहद मददगार है. 

किसानों को नहीं होता लाखों का नुकसान
फ्रूट राइपनिंग तकनीक से पहले किसान फल किसी भंडारण केंद्र पर रखता था तो उसके सड़ने या खराब होने का खतरा रहता था. इससे किसान को लाखों रुपये का नुकसान होता था. फ्रूट राइपनिंग तकनीक से किसानों को नुकसान नहीं हो रहा है. अब फलों को रखने पर दाग, धब्बे या सड़न नहीं हो पाती है. इससे किसान फल के अच्छे दाम ले लेता है. 

सरकार कर रही मदद
फ्रूट राइपनिंग तकनीक को बढ़ावा देनके के लिए केंद्र सरकार मदद कर रही है. केंद्र सरकार कोल्ड स्टोरेज बनवाने पर 30 से 40 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है. किसान एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड स्कीम और एग्री बिजनेस के माध्यम से कोल्ड स्टोरेज खोल सकते हैं.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. किसान भाई, किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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