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फार्मर आईडी से कैसे बुक होगी खाद? जान लीजिए पूरा प्रोसेस

खाद के लिए लंबी लाइनों और किल्लत से परेशान हैं. तो अब घर बैठे मोबाइल से ही सीधे फार्मर आईडी के जरिए खाद बुक कर पाएंगे. सरकार ने डिजिटल प्रोसेस कर दिया है शुरू. जानें क्या है इसका पूरा प्रोसेस और नियम.

देश में आज भी खेती के लिए यूरिया और डीएपी जब खरीदना होता है. तो इसके लिए लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ता है. और कई बार बावजूद इसके कई किसानों को फिर भी हाथ खाली लौटना पड़ता है. लेकिन अब केंद्र सरकार इस पूरे सिस्टम में बदलाव करने जा रही है. अगर आप भी खाद की किल्लत और दुकानों पर होने वाली धक्का-मुक्की से परेशान आ चुके हैं. तो फिर आपके लिए यह बहुत अच्छी खबर है. अब आपको खाद लेने के लिए घंटों लाइन लगाने की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ेगी.

सरकार ने इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम को एग्रीस्टैक फार्मर आईडी से जोड़कर इस प्रोसेस को पूरी तरह डिजिटल बना रही है. अब किसान घर बैठे अपने मोबाइल से खाद की एडवांस बुकिंग कर सकेंगे और उन्हें एक डिजिटल क्यूआर कोड जारी किया जाएगा. किसानों को दुकान पर बस यही कोड दिखाकर मिनटों में खाद मिल जाएगी. चलिए आपको बताते हैं कि यह पूरा सिस्टम कैसे काम करेगा.

फार्मर आईडी से ऐसे बुक होगी खाद

खाद की ऑनलाइन बुकिंग का तरीका सरकार ने बेहद आसान बनाया है जिससे गांव का कोई भी किसान अपने स्मार्टफोन से इसे आसानी से कर सके. इसके लिए एक खास मोबाइल ऐप बेस्ड प्लेटफॉर्म फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल यानी FFS तैयार किया गया है.

सबसे पहले किसान को इस ऐप पर अपनी एग्रीस्टैक फार्मर आईडी दर्ज करनी होगी. आईडी डालते ही सिस्टम आपके खेत का रकबा, बोई गई फसल और आपके तय कोटे की सही जानकारी खुद स्क्रीन पर दिखा देगा. इसके बाद आपको जितने बैग खाद की जरूरत है उसे चुनकर अपनी नजदीकी सहकारी समिति या फर्टिलाइजर डीलर को सिलेक्ट करना होगा.

जैसे ही आप बुकिंग कन्फर्म करेंगे आपके मोबाइल पर एक डिजिटल टोकन और क्यूआर कोड जनरेट हो जाएगा. इसके बाद आपको अपने तय समय पर उस खाद की दुकान पर जाना है. वहां दुकानदार आपकी खाद की पीओएस मशीन से इस क्यूआर कोड को स्कैन करेगा. और आपको तुरंत खाद मिल जाएगी. इससे आपका समय खराब नहीं होगा. 


फार्मर आईडी से कैसे बुक होगी खाद? जान लीजिए पूरा प्रोसेस

जमीन और फसल के रिकॉर्ड से जुड़ेगा कोटा

इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा पहलू यह है कि खाद की बिक्री अब सीधे किसान के भू-अभिलेख और फसल के डेटा से लिंक होगी. हरियाणा के मेरी फसल मेरा ब्यौरा की तर्ज पर अब नेशनल लेवल पर एग्रीस्टैक के जरिए किसान के जमीन रिकॉर्ड और उसकी बोई गई फसल का पूरा ब्यौरा iFMS से सीधे जुड़ा रहेगा.

इसका सीधा मतलब यह हुआ कि सिस्टम को पहले से पता होगा कि आपके पास कितनी जमीन है और उसमें कौन-सी फसल लगी है. उसी हिसाब से वैज्ञानिक फार्मूले के आधार पर आपके हिस्से का खाद कोटा खुद तय हो जाएगा.

इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जो बिचौलिए और गैर-किसान फर्जी नाम पर सब्सिडी वाली खाद खरीदकर इंडस्ट्रियल इस्तेमाल में खपा देते थे या अवैध जमाखोरी करते थे. उन पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी. जब तक किसान की जमीन का रिकॉर्ड मैच नहीं होगा उसे खाद रिलीज नहीं मिलेगा. 


फार्मर आईडी से कैसे बुक होगी खाद? जान लीजिए पूरा प्रोसेस

यह भी पढ़ें: खेत की रजिस्ट्री कराने से पहले जरूर चेक करें ये 5 बातें, वरना होगी दिक्कत

डिलीवरी वैन की डिजिटल ट्रैकिंग 

अक्सर दुकानों पर यह बहाना सुनने को मिलता है कि गोदाम से गाड़ी निकली नहीं है या पीछे से माल ही नहीं आ रहा. नए सिस्टम के तहत सरकार अब खाद ले जाने वाली मालगाड़ियों और ट्रकों की डिजिटल ट्रैकिंग यानी GPS को iFMS नेटवर्क से जोड़ रही है.इससे अधिकारियों के साथ-साथ सिस्टम में यह दिखाई देगा कि किस जिले में, किस डीलर के पास कितनी खाद रास्ते में है और कितना स्टॉक दुकान पर मौजूद है. देश के 14 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड किसानों और 2.5 लाख से अधिक रिटेलर्स को इस नेटवर्क के दायरे में लाया गया है. 

सालाना 7 करोड़ मीट्रिक टन खाद और करीब 2 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी का पाई-पाई हिसाब अब इलेक्ट्रॉनिक बिलिंग के जरिए ऑटोमैटिक होगा.फार्मर आईडी और क्यूआर कोड वाला यह नया सिस्टम किसानों का वक्त, पैसा बचाएगा. जैसे ही यह व्यवस्था आपके जिले में शुरू हो अपनी फार्मर आईडी जरूर बनवा लें जिससे किसी परेशानी का सामना न करना पड़े.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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