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सांप काट ले तो क्या करें किसान, खरीफ फसल कटाई में रहें सावधान

खरीफ कटाई में खेतों में सांपों का खतरा बढ़ जाता है. अगर सांप काट ले तो घबराएं नहीं और झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचें. जानिए ऐसी सिचुएशन में क्या करें और क्या नहीं.

इन दिनों खेतों में धान और खरीफ की फसलें पककर तैयार हैं. जिनकी कटाई में किसान सुबह से शाम तक खेतों में पसीना बहा रहे हैं. इसी वक्त लंबी घास और नमी की वजह से खेतों में सांप भी निकलते हैं. ऐसे में जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है. धान के खेतों में काम करते वक्त किसानों को अपने बचाव के लिए बेहद सतर्क रहने की जरूरत है.

सांप काटने के बाद अक्सर घबराहट में लोग ऐसी गलतियां कर बैठते हैं. जिनसे परेशानी बढ़ सकती है. कोई काटी हुई जगह पर रस्सी बांध देता है. कोई घरेलू नुस्खे आजमाने लगता है. जबकि सबसे जरूरी काम मरीज को बिना देर किए अस्पताल पहुंचाना है. इसलिए खरीफ फसलों की  कटाई शुरू करने से पहले बचाव का तरीका समझ लें. परिवार के लोगों को भी बताएं कि जरूरत पड़ने पर मदद कैसे करनी है. 

खेत में जाने से पहले करें यह काम

खेत में नंगे पैर काम करने से बचें. पैरों को ढकने वाले मजबूत जूते पहनें. अगर हो तो लंबे बूट इस्तेमाल करें. ऐसे कपड़े चुनें जिनसे पैर खुले न रहें. सुबह अंधेरे में निकलते समय टॉर्च साथ रखें. शाम ढलने के बाद खेत की मेड़ों पर चलते हुए सामने की जमीन साफ दिखाई देना जरूरी है. सिर्फ रास्ता पहचानने के भरोसे अंधेरे में आगे न बढ़ें. खेत तक आने वाले रास्ते की घास भी कटवाकर रखें. 

कटे पौधों के ढेर में बिना देखे हाथ न डालें. पहले जगह चेक करें फिर काम करें. बिलों के अंदर हाथ डालना भी खतरनाक हो सकता है. खेत में सांप दिख जाए तो उसके पास जाने की कोशिश न करें. उसे पकड़ने के लिए पीछे न दौड़ें. आपके साथ में काम कर रहे लोगों को बताकर दूरी बना लें. कटाई पर जाने से पहले फोन चार्ज रखें. 


सांप काट ले तो क्या करें किसान, खरीफ फसल कटाई में रहें सावधान

सांप काट ले तो तुरंत क्या करना चाहिए?

सांप काटने पर काम तुरंत रोक दें. मरीज को सांप से सुरक्षित दूरी पर लाकर लिटाएं. उसे भीड़ लगाकर डराने से बचें. मरीज को चलने न दें. जिस हाथ में काटा है उसे स्थिर रखें. पैर में काटा हो तो उसे भी हिलाने से बचाएं. अस्पताल पहुंचाने के लिए स्ट्रेचर की व्यवस्था करें. मरीज को अस्पताल ले जाते वक्त. किसी को साथ रखें जो रास्ते में उसकी हालत देखता रहे.

काटे हुए हिस्से के आसपास अंगूठी, चूड़ी, घड़ी जैसी चीजें हों तो सावधानी से उतार दें. सूजन आने पर यह कस सकती हैं. एंबुलेंस बुलाएं अस्पताल पहुंचने की व्यवस्था तुरंत करें. काटने का समय याद रखें डॉक्टर को इसकी जानकारी दें. उल्टी होने पर मरीज को करवट लिटाएं. सांस पर नजर रखें. दर्द कम होने पर भी अस्पताल जाना टालें नहीं. शुरुआत में लक्षण हल्के हो सकते हैं. घर पर इंतजार करके खतरे का अंदाजा लगाना ठीक नहीं है. तुरंत इलाज जरूरी है. 


सांप काट ले तो क्या करें किसान, खरीफ फसल कटाई में रहें सावधान

यह भी पढ़ें: क्या गाय पहचानती है अपना नाम, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

इन गलतियों से बचकर रहें

काटी हुई जगह के ऊपर रस्सी, तार, कपड़ा कसकर न बांधें. इससे खून का बहाव रुक सकता है, शरीर के हिस्से को नुकसान पहुंच सकता है. घाव पर ब्लेड से चीरा लगाना, मुंह से जहर चूसना बिल्कुल गलत है. इससे जहर निकालने की कोशिश इलाज का काम नहीं करती. घाव पर मिट्टी, जड़ीबूटी, केमिकल लगाने से बचें. झाड़फूंक कराने में समय न गंवाएं. ऐसे उपाय अस्पताल पहुंचने में देरी कराते हैं. इलाज जितना टलेगा सीरियस परेशानी का खतरा उतना बढ़ सकता है.

सांप को पकड़कर अस्पताल ले जाना जरूरी नहीं है. ऐसा करने में दूसरे व्यक्ति को भी काटने का खतरा रहता है. डॉक्टर मरीज के लक्षण जांच के आधार पर इलाज तय करते हैं. जरूरत होने पर एंटीवेनम दिया जाता है. यह जहर के असर को रोकने में मदद करता है. कुछ मरीजों को सांस लेने में मदद समेत दूसरे इलाज भी चाहिए होते हैं. इसलिए सिर्फ इंजेक्शन लगवाकर तुरंत घर लौटने की जिद न करें. डॉक्टर की सलाह के हिसाब से ही काम करें. 

यह भी पढ़ें: बांस की खेती में सालों तक होती है कमाई, जानें 1 साल का हिसाब?

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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