ड्रिप सिंचाई में कितनी लागत आती है, जानें पूरा हिसाब-किताब?
Drip Sinchai: ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत के साथ सिंचाई और खाद का खर्च कम करने में मदद मिल सकती है. सरकार भी इस सिस्टम पर सब्सिडी देती है. ऐसे में यहा जानें ड्रिप सिंचाई लगाने में कितना खर्च आता है.

Drip Irrigation: खेती में पानी की कमी और बिजली का बढ़ता खर्च किसानों के लिए बड़ी परेशानी बनते जा रहे हैं. ऐसे में सिंचाई का ऐसा तरीका अपनाना जरूरी है, जिससे पानी भी बचे और फसल को जरूरत के हिसाब से नमी भी मिलती रहे. ड्रिप सिंचाई यानी टपक सिंचाई इसी काम में मदद करती है. इसमें पाइप और छोटे छेदों की मदद से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है. लेकिन इसे खेत में लगवाने का खर्च कितना आता है और सरकार इसमें कितनी मदद देती है? आइए समझते हैं पूरा हिसाब-किताब.
ड्रिप सिस्टम की लागत हर खेत में एक जैसी नहीं होती. यह खेत के आकार, फसल, पौधों के बीच दूरी, पाइप की लंबाई, फिल्टर, पानी के स्रोत और सिस्टम की क्वालिटी पर निर्भर करती है. सब्जियों, फलदार पौधों और दूसरी फसलों के लिए सिस्टम की बनावट भी अलग हो सकती है. इसमें मुख्य रूप से पाइप, फिल्टर, ड्रिपर, वाल्व और पानी पहुंचाने से जुड़े दूसरे उपकरणों का खर्च शामिल होता है.
सरकार से कितनी सब्सिडी मिल सकती है?
केंद्र सरकार की सूक्ष्म सिंचाई योजना ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है. यह योजना अब प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत चलाई जा रही है. इसके तहत छोटे और सीमांत किसानों को निर्धारित लागत का 55 फीसदी और दूसरे किसानों को 45 फीसदी तक सहायता मिल सकती है. कुछ राज्य अपनी ओर से अतिरिक्त मदद भी देते हैं.
एक लाख रुपये की लागत पर समझें हिसाब
मान लीजिए, आपके खेत में ड्रिप सिस्टम लगाने की सरकार की ओर से मान्य लागत एक लाख रुपये तय होती है.
- छोटे और सीमांत किसान: 55 फीसदी सहायता के हिसाब से 55,000 रुपये की मदद और बाकी 45,000 रुपये किसान की ओर से.
- दूसरे किसान: 45 फीसदी सहायता के हिसाब से 45,000 रुपये की मदद और बाकी 55,000 रुपये किसान की ओर से.

यह भी पढ़ें: किसानों को 50 हजार का दुर्घटना बीमा, साल में देने होंगे सिर्फ 63 पैसे
ड्रिप सिंचाई से क्या फायदा होता है?
इस तरीके में पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है, जिससे खेत में जरूरत से ज्यादा पानी देने की नौबत कम हो सकती है. पानी में घुलने वाली खाद भी तय मात्रा में सिंचाई के साथ दी जा सकती है. इससे पानी और खाद का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलती है. फसल के हिसाब से सही व्यवस्था अपनाने पर मजदूरी और सिंचाई का खर्च भी घट सकता है.
आवेदन कैसे करें?
ड्रिप सिंचाई पर सब्सिडी लेने के लिए अपने जिले के कृषि या उद्यान विभाग से संपर्क करें. संबंधित राज्य के सरकारी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी हो सकती है. आवेदन से पहले आधार कार्ड, बैंक खाते की जानकारी, जमीन के कागजात और किसान पहचान से जुड़े जरूरी दस्तावेज तैयार रखें. आवेदन मंजूर होने से पहले सिस्टम खरीदने या लगवाने की प्रक्रिया शुरू न करें, क्योंकि कुछ राज्यों में पहले स्वीकृति लेना जरूरी होता है.
यह भी पढ़ें: पूसा डबल जीरो-36 में 41.82% तेल, जानें सरसों की इस नई किस्म की खासियत





















