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Polyhouse Farming: बेलदार सब्जियों की खेती से बरसेगा पैसा, इस तकनीक से करें बुवाई

Polyhouse Farming Technique: इस तकनीक में सब्जियों की लताओं को लकड़ी के डंडे या रस्सी या फिर जाली के सहारे जमीन से ऊपर बांधा जाता है. जिससे सब्जियां जमीन को छूकर खराब न हो पायें.

Vegetable Cultivation: बेलदार सब्जियों की खेती के लिये संरक्षित खेती यानी पॉलीहाउस, ग्रीन हाउस का इस्तेमाल सबसे बेहतर माना गया है. क्योंकि इस तकनीक में सब्जियों की लताओं को लकड़ी के डंडे या रस्सी या फिर जाली के सहारे जमीन से ऊपर बांधा जाता है. जिससे सब्जियां जमीन को छूकर खराब न हो पायें. पॉली हाउस में निराई-गुड़ाई करना भी काफी आसान हो जाता है, क्योंकि इस तकनीक में सब्जियां मेडों पर बोई जाती हैं, जिससे खरपतवार कम ही उगते हैं. फसल में खरपतवार उगने पर भी समय रहते उन्हें उखाड़कर फेंक देना चाहिये. पॉलीहाउस में सब्जियों की फसल को पोषण प्रदान करने के लिये महिने में दो बार कंपोस्ट की खाद और गोबर की खाद का इस्तेमाल किया जाता है. किसान चाहें तो ये बेलदार सब्जियां अपने पॉलीहउस में उगा सकते हैं.


Polyhouse Farming: बेलदार सब्जियों की खेती से बरसेगा पैसा, इस तकनीक से करें बुवाई

लौकी यानी घिया की खेती
पॉलीहाउस में लौकी की खेती करने से कम मेहनत में अधिक आमदनी हो जाती है. इसकी बुवाई के लिये उन्नत किस्म के बीजों को चुनकर बीजोपचार का काम कर लें. लौकी की बुवाई के लिये उत्तम क्वालिटी के बीजों का चयन करें बुवाई के दौरान बीजों को 2 इंच की गहराई में बोयें और बीज से बीज के दौरान फीट की दूरी रखें. फसल की बढ़वार होने पर जमीन से थोड़ा ऊपर जाली लगायें और पौधों को सहारा दें. जब फसल पक जाये तो तोड़कर बाजार में बेच दें.

सेमफली यानी बीन्स की खेती
बीन्स के खेती के लिये जून का महिना सबसे बेहतर माना जाता है. इसमें मौजूद प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, फास्फोरस आदि अनेको पौष्टिक तत्व शरीर को पोषण प्रदान करते हैं. इसलिये किसानों को बेहतर उत्पादन प्राप्त करना बेहद जरूरी हो जाता है. बीन्स को जल्दी उगाने के लिये हाइब्रिड प्रजातियों को चुन सकते हैं. लेकिन बाजार में देसी फलियों की मांग भी सालभर बनी रहती है, इसलिये किसान उन्नत बीजों का चयन कर लें. 

करेला की खेती
स्वाद में कड़वा करेला लेकिन फायदे इतने है कि कैंसर जैसी बीमारी को भी मात देदे. किसानों को भी करेले की खेती से काफी लाभ हो सकता है. क्योंकि बरसाती करेला की क्वालिटी काफी अच्छी होटी है और फल भी छोटे-छोटे ही आते हैं. इसके अलावा बाजार  में करेला का अच्छा भाव भी मिल जाता है क्योंकि इसका इस्तेमाल दवायें, जूस और व्यंजन बनाने में किया जाता है.

खीरा की खेती
खीरा एक बसंतकालीन और वर्षा ऋतु में उगाई जाने वाली फसल है. लेकिन पॉलीहाउस में खीरा को किसी भी मौसम में उगाया जा सकता है. विटामिन और मिनरल्स से भरपूर खीरा को उगाने के लिये भरपूर पानी और धूप की जरूरत होती है. इसलिये टपक पद्धति से इसकी सिंचाई की जाती है. अच्छी निकासी वाली मिट्टी और खाद के इस्तेमाल से खीरा बढ़वार तेजी से होती है.इसकी बुवाई के लिये खीरा के उन्नत बीजों का बीजोपचार करें और 1 इंच गहराई में बोयें. इसकी बढ़वार के समय बेलों को जमीन से ऊपर रखने के लिये जाली का सहारा दें.

हरी मिर्च की खेती
खाने का जायका बढ़ाने के लिये हरी मिर्च को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. क्योंकि इसके सेवन से कोई साइड इफैक्ट्स नहीं होते, और ना ही इसकी खेती के लिये ज्यादा मेहनत की जरूरत होती है. इसकी बुवाई के लिये उन्नत बीजों का चयन करें. सबसे पहले मिर्च की नर्सरी तैयार करें और इसकी बीजों को 2 इंच तक गहराई में बोयें. 2-4 सप्ताह बाद पौधशाला तैयार होने पर क्यारियों में इसकी रोपाई कर दें. मिर्च  की फसल को अच्छी मात्रा में पानी की जरूरत होती है, इसलिये शाम के समय ही सिंचाई करें. जानकारी के लिये बता दें कि मिर्च की फसल 40-50 दिनों में तैयार हो जाती है.

 

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