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बिना खेत के भी कर सकते हैं मशरूम की खेती, जान लें इसका तरीका

Mushroom Cultivation Tips: मशरूम फार्मिंग कम जगह और कम लागत में घर बैठे बढ़िया कमाई करने का बढ़िया तरीका है. इसके लिए किसी बड़े खेत की भी ज़रूरत नहीं. जान लीजिए पूरी प्रोससे.

Mushroom Cultivation Tips: खेती के लिए किसानों को लगता है एकड़ में फैली जमीन या बड़ा खेत होना ज़रूरी है. अगर आप भी किसान हैं औऱ आपका भी यही मानना है. तो अब अपनी सोच बदलने का समय आ गया है. आज के दौर में खेती में नई तकनीकों के दम पर कम जगह में भी शानदार कमाई की जा सकती है. मशरूम फार्मिंग इसके लिए बेस्ट ऑप्शन है. इसके लिए आपको न तो किसी खेत की ज़रूरत है और न ही किसी बड़ी जमीन की. 

आप अपने घर के एक खाली कमरे, पुराने शेड या गैराज से भी इस बिज़नेस की आसानी से शुरुआत कर सकते हैं. यही वजह है कि आज की युवा पीढ़ी और छोटे किसान मशरूम फार्मिंग की ओर रुख कर रहे हैं. अगर आप भी कम लागत में एक बेहतरीन साइड इनकम या फुल-टाइम बिज़नेस खड़ा करना चाहते हैं. तो यह तरीका आपके लिए बिल्कुल सही साबित हो सकता है. 

बिना जमीन के कैसे करें शुरुआत?

मशरूम खेती की सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह से इनडोर खेती है. जिसके लिए सूरज की सीधी रोशनी या खुले खेत की बिल्कुल ज़रूरत नहीं होती. आप अपने घर के किसी भी 10x10 के कमरे से इसकी शुरुआत कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले आपको लकड़ी या लोहे के रैक तैयार करने होते हैं. वर्टिकल फार्मिंग के तरीके से एक के ऊपर एक कई रैक बनाकर आप कम जगह में भी कई गुना अधिक उत्पादन ले सकते हैं. 

कमरे के अंदर सही तापमान जो कि 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तक होना चाहिए और नमी बनाए रखना सबसे अहम होता है. जिसके लिए पानी का छिड़काव या ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल किया जाता है. इस सेटअप को तैयार करने में बहुत मामूली खर्च आता है. कमरे में प्रॉपर वेंटिलेशन और साफ-सफाई का ध्यान रखकर आप बिना किसी परेशानी के साल भर मशरूम उगा सकते हैं.


बिना खेत के भी कर सकते हैं मशरूम की खेती, जान लें इसका तरीका

मशरूम उगाने का क्या है तरीका?

मशरूम उगाने के लिए मिट्टी की नहीं बल्कि एक खास तरह के मिश्रण की ज़रूरत होती है जिसे कंपोस्ट कहते हैं. इसे गेहूं या धान के भूसे, जिप्सम और खाद को मिलाकर तैयार किया जाता है. तैयार कंपोस्ट को प्लास्टिक बैग्स में भरा जाता है और फिर इसमें मशरूम के बीज, जिन्हें स्पॉन कहा जाता है मिलाए जाते हैं. बैग्स को बंद करके अंधेरे कमरे में रख दिया जाता है. 

जिससे मशरूम का कवक जाल पूरे बैग में अच्छे से फैल सके. जब बैग्स के अंदर सफेद रंग की फफूंद दिखने लगे तो उनके ऊपर कोकोपीट या हल्की मिट्टी की केसिंग लगाई जाती है. इसके कुछ ही दिनों बाद मशरूम की छोटी-छोटी पिंन्स निकलने लगती हैं. सही समय पर पानी का स्प्रे करने से 20 से 25 दिनों के भीतर फ्रेश और हेल्दी मशरूम कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं.


बिना खेत के भी कर सकते हैं मशरूम की खेती, जान लें इसका तरीका

यह भी पढ़ें: कृषि यंत्र खरीदने से बेहतर है किराये पर लेना? सरकार कैसे करती है मदद

कैसे बनाएं इसे एक बढ़िया बिज़नेस?

बिज़नेस के लिहाज़ से देखा जाए तो मशरूम फार्मिंग कम निवेश में बड़ा मुनाफा देने वाला कहा जाता है. शुरुआत में आप मात्र 10 से 15 हजार रुपये लगाकर इसे छोटे लेवल पर ट्रॉयल कर सकते हैं. बाजार में बटन मशरूम और ऑयस्तर मशरूम की भारी मांग रहती है जो लोकल मंडियों, होटलों और सुपरमार्केट्स में आसानी से अच्छे दामों में बिक जाते हैं. 

एक बार जब आप इसकी तकनीक और रखरखाव को समझ जाते हैं. तो बड़े पैमाने पर शेड बनाकर कमर्शियल लेवल पर काम शुरू कर सकते हैं. हेल्थ कॉन्शियस दौर में न्यूट्रिशन और प्रोटीन से भरपूर होने के चलते मशरूम की डिमांड हर दिन बढ़ रही है. सही मार्केटिंग और क्वालिटी मेंटेन करके आप हर महीने बहुत ही कम लागत में 30 से 50 हजार रुपये या उससे भी ज्यादा की कमाई आसानी से कर सकते हैं.

यह भी पढ़ें: खेत पर कोल्ड स्टोरेज लगाने के लिए कितनी मिलती है सब्सिडी, यहां जानें?

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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