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अफीम की खेती का लाइसेंस पाना हुआ मुश्किल, सरकार ने बढ़ाई पैदावार की शर्त

Opium Farming: अफीम की खेती करने वाले किसानों के लिए केंद्र सरकार ने लाइसेंस के नियम सख्त कर दिए हैं. नई नीति के मुताबिक, लाइसेंस की मुख्य पात्रता हासिल करने के लिए न्यूनतम उपज की शर्त बढ़ा दी गई है.

Afeem Ki Kheti: अफीम की खेती करने वाले किसानों के लिए बड़ी खबर है. केंद्र सरकार ने अफीम की खेती का लाइसेंस पाने के नियम पहले से ज्यादा सख्त कर दिए हैं. अब किसानों को लाइसेंस की मुख्य पात्रता हासिल करने के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा पैदावार दिखानी होगी. सरकार ने फसल वर्ष 2026-27 के लिए नई नीति जारी की है. 

नई नीति में साफ किया गया है कि, किन किसानों को खेती की अनुमति मिलेगी और आगे भी लाइसेंस बनाए रखने के लिए कितनी पैदावार जरूरी होगी. ऐसे में अफीम की खेती करने वाले किसानों के लिए नए नियम समझना जरूरी है.

सरकार ने कब जारी किए नए नियम?

वित्त मंत्रालय ने 23 अक्टूबर को तीन अधिसूचनाएं जारी करके अफीम की खेती के लिए नई लाइसेंस नीति घोषित की है. यह नीति 1 अक्टूबर 2026 से शुरू हुए फसल वर्ष 2026-27 के लिए लागू है. इसके तहत सरकार ने अफीम की खेती करने वाले किसानों के लिए पैदावार की नई शर्तें तय की हैं. इन शर्तों को पूरा करने वाले किसान ही संबंधित श्रेणी में लाइसेंस पाने के पात्र होंगे. हालांकि, केवल तय पैदावार हासिल करने से लाइसेंस अपने आप नहीं मिलेगा. दूसरी जरूरी शर्तें भी पूरी करनी होंगी.

अब कितनी पैदावार होना जरूरी?

नई नीति के मुताबिक, अफीम गोंद पैदा करने वाले किसानों को मुख्य पात्रता श्रेणी में आने के लिए फसल वर्ष 2025-26 में कम से कम 4.4 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की तय औसत पैदावार हासिल करनी होगी. पिछले साल यह सीमा 4.2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी. यानी सरकार ने इस बार न्यूनतम पैदावार की शर्त बढ़ा दी है. इसका असर उन किसानों पर पड़ सकता है, जिनकी पिछली फसल का उत्पादन नई सीमा से कम रहा है.
अफीम की खेती का लाइसेंस पाना हुआ मुश्किल, सरकार ने बढ़ाई पैदावार की शर्त

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अगले साल के लिए भी बढ़ा लक्ष्य

सरकार ने आने वाले फसल वर्ष के लिए भी पैदावार का लक्ष्य तय कर दिया है. नई नीति के अनुसार, वर्ष 2027-28 में लाइसेंस की पात्रता पाने के लिए किसानों को फसल वर्ष 2026-27 में प्रति हेक्टेयर 5.9 किलोग्राम मॉर्फिन की निर्धारित उपज हासिल करनी होगी. इसका मतलब है कि किसानों को अपनी फसल के उत्पादन के साथ सरकारी रिकॉर्ड और तय शर्तों का भी ध्यान रखना होगा.

इन किसानों के लिए नहीं बदली शर्त

जो किसान बिना चीरा लगाए पोस्ते के डोडे की खेती करते हैं, उनके लिए फिलहाल राहत है. सरकार ने इस श्रेणी में न्यूनतम पैदावार की शर्त नहीं बढ़ाई है. इन किसानों के लिए फसल वर्ष 2025-26 के आधार पर जरूरी पैदावार पहले की तरह 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखी गई है.

बिना लाइसेंस नहीं कर सकते अफीम की खेती

भारत में अफीम की खेती सरकार की अनुमति से ही की जा सकती है. केंद्र सरकार तय करती है कि कौन किसान और कितनी जमीन पर यह फसल उगा सकता है. अफीम से मिलने वाले पदार्थों का इस्तेमाल दर्द कम करने वाली और दूसरी जरूरी दवाएं बनाने में होता है. इसलिए इसकी खेती पर सरकारी निगरानी रहती है. किसानों को लाइसेंस की शर्तें और सरकारी निर्देश जरूर जांचने चाहिए.

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About the author ईशा

ईशा फिलहाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हैं और एग्रीकल्चर कैटिगरी की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. ईशा बेहद आसान भाषा में खेती-किसानी से जुड़ी खबरों को पेश करती हैं. उन्हें मीडिया इंडस्ट्री में 2.5 साल से ज्यादा का अनुभव है. अपने पत्रकारिता करियर के दौरान वह समाचार न्यूज, विहान टीवी, इंडिया न्यूज और न्यूज 18 जैसे मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. इन संस्थानों में उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हुए खबरों की रिसर्च, लेखन, कॉपी एडिटिंग और डिजिटल कंटेंट तैयार करने का काम किया है.

ईशा ने अपने पत्रकारिता करियर में सेहत, खेती-किसानी, लाइफस्टाइल, एस्ट्रो और एंटरटेनमेंट जैसे अलग-अलग विषयों पर काम किया है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने इंटरनेशनल स्कूल ऑफ मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्टडीज, नोएडा से जर्नलिज्म में बैचलर की डिग्री हासिल की है.

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