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गोबर कर देगा मालामाल, ऑनलाइन बढ़ रही डिमांड, जानें कैसे खूब माल छाप रहे व्यापारी?

Cow Dung Business For Farmers: गोबर का बिजनेस आज के समय में एक मुनाफे वाला स्टार्टअप बन चुका है. ऑनलाइन मार्केट और नई टेक्नोलॉजी ने इसकी वैल्यू को कई गुना बढ़ा दिया है.

Cow Dung Business For Farmers: आज के डिजिटल दौर में जिसे हम बेकार समझकर छोड़ देते थे. वही गोबर अब किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रहा है. इंटरनेट की पहुंच और इको-फ्रेंडली प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग ने गोबर के कारोबार को एक ग्लोबल पहचान दे दी है. अब यह सिर्फ गांव के आंगन तक सीमित नहीं है. बल्कि बड़े-बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर गोबर से बने उपले, धूपबत्ती और मूर्तियां धड़ल्ले से बिक रही हैं.

शहरों में रहने वाले लोग अपनी जड़ों से जुड़ने और शुद्धता की तलाश में इन प्रोडक्ट्स के लिए अच्छी-खासी कीमत देने को तैयार हैं. ऐसे में अगर आप भी कम निवेश में कोई तगड़ा स्टार्टअप शुरू करने की सोच रहे हैं. तो गोबर का बिजनेस आपके लिए मुनाफे की खान साबित हो सकता है. सही मार्केटिंग और थोड़ी सी क्रिएटिविटी के साथ आप इससे मोटी कमाई कर सकते हैं. जान लीजिए क्या है इसका तरीका.

ऐसे शुरू करें गोबर से कमाई

आजकल पर्यावरण को लेकर लोग काफी जागरूक हो रहे हैं जिसकी वजह से गोबर की लकड़ी की डिमांड काफी बढ़ गई है. पेड़ों को कटने से बचाने के लिए श्मशान घाटों और फैक्ट्रियों में अब पारंपरिक लकड़ी की जगह गोबर से बनी लकड़ियों का इस्तेमाल हो रहा है.

  • लकड़ी बनाने वाली मशीन के जरिए आप कम समय में ज्यादा प्रोडक्शन कर सकते हैं.
  • यह लकड़ी पेड़ों को बचाने के साथ-साथ प्रदूषण को कम करने में भी मददगार साबित होती है.

व्यापारियों के लिए यह एक डबल फायदा वाला सौदा है क्योंकि कच्चा माल सस्ता है और मार्केट वैल्यू बहुत ज्यादा है.

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ऑनलाइन मार्केट से आसानी

गोबर से बने प्रोडक्ट्स जैसे दीये, गमले और उपले अब प्रीमियम पैकेजिंग के साथ ऑनलाइन बेचे जा रहे हैं. व्यापारी अब साधारण गोबर को प्रोसेस करके उसकी वैल्यू बढ़ा रहे हैं और उसे सीधे अर्बन कस्टमर्स तक पहुंचा रहे हैं.

  • अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर गोबर के उपलों की डिमांड काफी ज्यादा है.
  • ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स के नाम पर इनकी अच्छी ब्रांडिंग करके आप बड़े शहरों में डिलीवरी कर सकते हैं.

सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स साइट्स ने इस बिजनेस को एक बड़ा मंच दे दिया है जहां छोटी यूनिट्स भी ब्रांड बन रही हैं.

बन सकता है अच्छा स्टार्टअप 

सरकार भी अब वेस्ट-टू-वेल्थ मॉडल को बढ़ावा दे रही है जिससे इस बिजनेस को शुरू करना और भी आसान हो गया है. गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ट्रेनिंग और सब्सिडी दी जा रही है जिससे युवा उद्यमी आगे आ सकें.

  • गोबर से पेंट और पेपर बनाने वाली यूनिट्स लगाकर आप सरकारी स्कीम का लाभ उठा सकते हैं.
  • लोकल डेयरी से टाइ-अप करके आप कच्चे माल की सप्लाई को परमानेंट फिक्स कर सकते हैं.

मॉडर्न मशीनों और स्मार्ट प्लानिंग के साथ शुरू किया गया यह काम आपको बहुत जल्द एक सफल बिजनेसमैन बना सकता है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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