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Irrigation Scheme: हर फसल की सिंचाई तकनीक अलग होती है, इस चीज को समझ लेंगे तो कुछ ही टाइम में बढ़ जाएगी पैदावार

Irrigation Techniques: हर फसल के लिए एक अलग सिंचाई तकनीक इजाद की गई है. ये ड्रिप, मिनी स्प्रिंकलर, माइक्रो स्प्रिंकलर और पोर्टेबल स्प्रिंकलर है. इन्हें 50 से 100% अनुदान पर उपलब्ध करवाया जा रहा है.

Sinchai Yojana: पूरी दुनिया में पानी की कमी की समस्या से जूझ रही है. कई देशों में भूजल का स्तर एकदम ही गिर गया है .भारत के भी कई इलाके आज जल संकट से जूझ रहे हैं. इस समस्या के समाधान के लिए कई अभियान भी चलाए जा रहे हैं. बारिश के पानी का संरक्षण करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है. पानी की सबसे ज्यादा जरूरत खेती-किसानी में है, क्योंकि अगर पानी नहीं होगा तो फसल उत्पादन नहीं मिलेगा और लोग खाएंगे क्या? पुराने समय से ही खेती में पारंपरिक तरीकों से सिंचाई की जाती है, जिसमें पानी अनावश्यक तरीके से बह जाता है.

कई बार इससे फसल को भी नुकसान होता है, लेकिन अब हमारे वैज्ञानिकों ने सिंचाई की उन्नत तकनीकें खोज ली हैं, जो ना सिर्फ पानी, पैसा और समय बचाती हैं, बल्कि फसलों से अच्छी उत्पादकता भी दिलाते हैं. इस आर्टिकल में आपको इन्हीं सिंचाई की आधुनिक तकनीकों के बारे में बताएंगे.

साथ में यह भी बताएंगे किस फसल में कौन सी तकनीक से सिंचाई करना फायदेमंद रहता है. अच्छी बात यह है कि इन सिंचाई तकनीकों को अपनाने के लिए सरकार किसानों को सब्सिडी भी देती है, जिससे शुरुआती खर्च अकेले किसानों के ऊपर भारी नहीं पड़ता. हाल ही में किसानों से इन सिंचाई तकनीकों को अपनाने के लिए आवेदन भी मांगे गए हैं.

किस तकनीक से करें सिंचाई

आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन हर फसल के लिए सिंचाई का तरीका बिल्कुल ही अलग है. यदि हर एक फसल के लिए सही सिंचाई तकनीक का इस्तेमाल किया जाए तो कई गुना कम खर्च करके उत्पादन को कई गुना बढ़ाया जा सकता है. यह सिंचाई तकनीक ड्रिप, मिनी स्प्रिंकलर, माइक्रो स्प्रिंकलर और पोर्टेबल स्प्रिंकलर हैं.

  • ड्रिप सिंचाई तकनीक को टपक सिंचाई पद्धति भी कहते हैं,  जो गन्ना से लेकर अनानास, पपीता, केला, आम, लीची, अमरूद, सब्जी, अनार, लत्तीदार फसल और प्याज की टिकाऊ खेती में मददगार है.
  • मिनी स्प्रिंकलर सिंचाई को फव्वारा सिंचाई भी कहते हैं, जिससे चाय, आलू, प्याज, धान, गेहूं आदि फसलों की सिंचाई करके कई हजार लीटर पानी की बचत कर सकते हैं.
  • माइक्रो स्प्रिंकलर सिंचाई को लीची, पॉलीहाउस और शेडनेट में खेती करने वाले किसानों के लिए फायदेमंद बताया जाता है. इस तरह पानी की भी ज्यादा खपत नहीं होती और फसल की जड़ों तक सीधे सिंचाई हो जाती है.
  • पोर्टेबल स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीक को दलहन, तिलहन और धान, गेहूं की सिंचाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है.

टपक सिंचाई के लिए अनुदान

बिहार में टपक सिंचाई के लिए सात निश्चय-2 और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत ड्रिप सिंचाई पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, इस सिंचाई पद्धति को अपनाने वाले किसानों को 40,000 रुपये तक की अनुदान का प्रावधान है यानी इकाई लागत पर कुल 90% सब्सिडी दी जाती है.

सूक्ष्म सिंचाई पद्धति

(प्रति एकड़ लागत एवं अनुदान)

सिंचाई पद्धति

लागत

अनुदान

प्रतिशत अनुदान

ड्रिप

65,827 रुपये

59,244 रुपये

90%

मिनी स्प्रिंकलर

52,548 रुपये

47,293 रुपये

90%

माइक्रो स्प्रिंकलर

37,619 रुपये

33,857 रुपये

90%

पोर्टेबल स्प्रिंकलर

15,193 रुपये

8,356 रुपये

55%

ट्रेचिंग (80 मीटर)

3,343 रुपये

3,343 रुपये

100%

मल्चिंग

12,955 रुपये

6,477 रुपये

50%

व्यक्तिगत नलकूप

93,200 रुपये

अधिकतम 40,000 रुपये

कहां करें आवेदन

यदि आप भी किसान हैं और पानी की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं तो बिना देरी के सूक्ष्म सिंचाई पद्धति के तहत आने वाले इन चार तकनीकों को अपना सकते हैं. इन तकनीकों से सिंचाई करने के लिए केंद्र सरकार भी प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत अनुदान देती है. बिहार के किसानों को भी सात निश्चय-2 स्कीम के तहत सूक्ष्म सिंचाई करने के लिए अनुदान दिया जाता है.

आप चाहें तो बिहार उद्यान निदेशालय की ऑफिशियल वेबसाइट http://horticulture.bihar.gov.in/ पर जाकर आवेदन कर सकते हैं या प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के ऑफिशियल पोर्टल https://www.pmksy.gov.in/ पर भी विजिट करके इस स्कीम का लाभ ले सकते हैं.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. किसान भाई, किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

यह भी पढ़ें:- यदि आप भी गन्ना की खेती करते हैं तो ड्रिप सिंचाई के लिए मिलेगा 90% अनुदान, आसान है आवेदन की प्रक्रिया

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