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Mustard farming: अब खेत उगलेंगे काला सोना, यहां जान लें सरसों की बंपर पैदावार लेने के वैज्ञानिक उपाय

Musturd Cultivation: भारत में पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और गुजरात को सरसों उत्पादक राज्य कहते हैं, जहां किसान बड़े पैमाने पर सरसों की बुवाई करके रिकॉर्ड पैदावार ले रहे हैं.

Sarson Ki Kheti: सरसों एक प्रमुख तिलहनी फसल है. भारत में इसकी खेती रबी सीजन (Rabi Season 2022) में की जाती है. वैसे तो सरसों कम सिंचाई और सीमित संसाधनों में ही अच्छी पैदावार देती है, लेकिन इसकी बुवाई से लेकर फसल पकने तक फसल में कुछ वैज्ञानिक उपाय करके रिकॉर्ड उत्पादन (Mustard Production) ले सकते हैं. ये उपाय इसलिये भी जरूरी है कि क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण अब फसलों में नुकासन बढ़ता जा रहा है.

कभी मौसम की मार तो कभी कीड़े और बीमारियों के कारण फसलों का उत्पादन गिरती जा रहा है. ऐसी स्थिति में सबक लेकर सरसों की खेती में सावधानियां (Precautions in Musturd farming) बरतनी होंगी, ताकि कम से कम लागत और बिना नुकसान के किसानों को इस नकदी फसल की खेती  से अच्छा मुनाफा हो सके.

सरसों की खेती
भारत में पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और गुजरात को सरसों उत्पादक राज्य कहते हैं, जहां किसान बड़े पैमाने पर सरसों की बुवाई करके रिकॉर्ड पैदावार ले रहे हैं.  

मिट्टी की जांच
सरसों की वैज्ञानिक खेती करने के लिये सबसे पहले मिट्टी की जांच करवानी चाहिये, जिससे मिट्टी कमियों, संरचना और इसकी जरूरतों का पता लगाया जा सके. बता दें कि मिट्टी की जांच के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) दिया जाता है, जिसके अनुसार ही निश्चित मात्रा में खाद-उर्वरक, बीज और सिंचाई करने की सलाह दी जाती है. यह तरीका भी सीमित संसाधनों में सरसों की अच्छी पैदावार लेने में मदद करता है.

सरसों की बुवाई
जाहिर है कि भारत में रबी सीजन के दौरान सरसों की खेती की जाती है. इसकी बुवाई के लिये अक्टूबर से लेकर दिसंबर के पहला सप्ताह सबसे उपयुक्त रहता है. वैज्ञानिकों की मानें तो नुकसान की संभावनाओं को कम करने के लिये 5 अक्टूबर से लकेर 25 अक्टूबर तक सरसों की बुवाई का काम निपटा लेना चाहिये. इसके लिये खेत की गहरी जुताई लगाकर पोषण प्रबंधन कर लें, जिससे बीजों का जमने में आसानी रहे. इसके बाद 2 किलोग्राम तक बीज प्रति हेक्टेयर के हिसाब से खेतों में लगा दें. बीजों की बुवाई के लिये हैप्पी सीडर या जीरो टिल बेड प्लांटर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं.

सरसों की उन्नत किस्में (Top Varieties of Mustard )
भारत में मिट्टी और जलवायु के अनुसार सरसों की पीबीआर 357, आरजीएन 229, पूसा सरसों 29, पूसा सरसों 30, पीडीजेड 1, एलईएस 54, कोरल पीएसी 437, जीएससी-7 (गोभी सरसों) किस्मों से बिजाई कर सकते हैं.

सरसों की सिंचाई
किसानों के लिये सरसों एक किफायती खेती है, क्योंकि इसमें ना तो ज्यादा खाद-बीज लगता है और ना ही ज्यादा सिंचाई की जरूरत होती है. यह फसल मात्र 3 सिंचाईयों में पककर तैयार हो जाती है. सरसों में पहली सिंचाई 35 से 40 दिन बाद  और दूसरी सिंचाई दाना बनते समय की जाती है. ध्यान रखें कि फूल आते समय सरसों की सिंचाई ना करें, इससे सरसों की क्वालिटी पर बुरा असर पड़ सकता है. 

इन बातों का रखें ध्यान
अकसर सरसों के खेत में खरपतवारों उगने लगते हैं, जिसके चलते फसल कीट और रोगों की चपटे में भी आ सकती है. इनकी रोकथाम के लगातार फसल की निगरानी और निराई-गुड़ाई करते रहें. खरपतवार बढ़ने परपैंडीमेथालीन (30 EC)की एक लीटर मात्रा 400 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे किया जाता है. किसान चाहें तो खेत की तैयार के लिये समय ही मिट्टी में खरपतवार नाशी दवा मिला सकते हैं, जिससे बाद में फसल पर रसायनिक छिड़काव की जरूरत ही ना पड़े. 

  • सरसों की फसल में माहूं या चेंपा कीट की संभवाना भी बढ़ जाती है, जिसकी रोकथाम के लिये 5 मिली लीटर नीम के तेल को एक लीटर पानी में घोलकर फसल पर छिड़कें. खासकर सरसों की खेती के साथ मधुमक्खी पालन करने वाले किसान कैमिकलों की जगह फसल का जैविक प्रबंधन (Organic Farming of Mustard) ही करें.
  • सरसों की फसल (Mustard Crop) में फलियां बनते समय सरसों के पौधों की 20 से 25 सेमी नीचे तनों से पत्तियों को हटा दें, जिससे फसल की निगरानी में आसानी रहे. इस बीच फसल को पाले से बचाने के लिये 250 ग्राम थायोयूरिया को 200 लीटर पानी में घोलकर फूल और फलियां बनते समय फसल पर छिड़क दें.
  • सरसों की फसल की पैदावार और क्वालिटी (Quality production of Mustard) को बेहतर बनाने के लिये साथ में मधुमक्खी पालन की यूनिट (Honey Bee Farming) लगायें. बता दें कि मधुमक्खियां फसल की मित्र कीट होती है, जो पॉलीनेशन में मदद करती हैं और फसल से शहद इकट्ठा (Honey production) करके किसानों को आमदनी को बढ़ाने में मददगार होती है. 

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और जानकारियों पर आधारित है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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