Agriculture Advisory: रबी फसलों की बुवाई से पहले बिल्कुल ना भूलें ये काम, कम खर्च में ही टल जायेगा बड़ा नुकसान
Farm Land Preparation: सही फसल उत्पादन के लिये वैज्ञानिक खेती और उचित प्रबंधन की सलाह दी जाती है. इसी तरह रबी फसलों की बुवाई से पहले भी जुताई करने से फसल के तमाम जोखिमों को टालना आसान हो जाता है.

Land Tilling and Plowing: जमीन से जुड़ी कोई भी काम करने से पहले उसी नींव को मजबूत करना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में नुकसान की संभावना ना रहे. किसानों को भी हर सीजन की बुवाई से पहले खेतों में ऐसी ही नींव तैयार करने की सलाह दी जाती है, जिसे खेती की जुताई (Land Tilling) कहते हैं. वैसे तो खेत की जुताई करना बेहद बेसिक काम है, लेकिन इसी काम पर फसलों का उत्पादन निर्भर करता है.
खेत की जुताई से मिट्टी की संरचना सुधरती है और उसमें कीट-रोगों का खतरा भी कम जाता है. यही कारण है कि पहले जमाने में जुताई के लिये बैलों का इस्तेमाल किया जाता था लेकिन आज के समय में ट्रैक्टर (Farm Tractor) से लेकर कई तरह के कृषि उपकरणों के जरिये जुताई की जाती है. हमारे आज के लेख में भी आप यही जानेंगे कि कैसे जुताई जैसा एक साधारण सा काम खेतों में फसलों की पैदावार को बढ़ा सकता है.
खेतों की जुताई के फायदे
खेतों की जुताई करने का असल मकसद मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाना और मिट्टी की सरंचना को सुधारना होता है. इससे मिट्टी में जल धारण क्षमता बेहतर होती है और जमीन में भूजल स्तर भी कायम रहता है.
- कई मायनों मे खेतों की जुताई करने से खाद-उर्वरक का खर्च भी बचता है, क्योंकि जुताई के समय ही आवश्यकतानुसार खाद-उर्वरक डाल दिये जाते हैं.
- ये काम बुवाई से पहले ही किया जाता है, जिससे मिट्टी को हवा, पानी, धूप और पोषक तत्वों लगने से लाभ मिलता है.
- इतना ही नहीं, जमीन में जुताई करने के बाद बुवाई करने से बीजों का सही जमाव होता है.
- इससे बीजों के अंकुरण से लेकर पौधों का सही विकास और फसलों सो उत्पादन लेना कई गुना आसान हो जाता है.
- जुताई लगाने से पिछले फसल के अवशेष भी मिट्टी में मिलकर प्राकृतिक खाद बन जाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है.
- खेती योग्य जमीन की जुताई लगाने पर खरपतवार उगने की संभावना भी कम हो जाती है. ये खरपतवार ही फसलों के विकास में रुकावच होते हैं.
- फसल की कटाई के बाद कीट के अंडे और बीमारियों के अवशेष मिट्टी में मिल जाते हैं, जिन्हें नष्ट करने के लिये भी जुताई करने की सलाह दी जाती है.
- खासकर फलों के बाग और सब्जियों की खेती करने से पहले जुताई करने पर फसलों से क्वालिटी उत्पादन लेने में आसानी रहती है.
पांरपरिक तरीके से जुताई
पुराने समय में खेती बैलों पर ही आधारित होती है. ये बैल ही खेतों की जुताई के लेकर फसलों को मंडी पहुंचाने के लिये माल वाहक की तरह काम करते थे, हालांकि आज भी कई इलाकों में बैलों को इसी काम के लिये रखा गया है, लेकिन आधुनिकता और कृषि मशीनीकरण के दौर में अब किसानों ने ट्रैक्टर के साथ तमाम मशीनों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है.
इससे कम समय, कम श्रम और कम खर्च में ही जुताई का काम हो जाता है. पुराने समय में इन मशीनों की कमी के कारण बैलों के कंधों पर हलों को ढ़ोया जाता है और कई दिनों तक खेतों की जुताई की जाती थी. कई किसान तो अपने कंधों पर हल लादकर खेतों की जुताई करते थे, लेकिन कृषि मशीनीकरण के दौर में ट्रैक्टर समेत कई उपकरण आज वरदान के समान साबित हो रहे हैं.
जुताई के समय सावधानी
वैसे तो खेतों में जुताई करना एक बेसिक सा काम है, जो आसानी से निपटाया जा सकता है, लेकिन जुताई के समय ये भी ध्यान रखना जरूरी है कि खेत में किस फसल के लिये जुताई की जा रही है. धान जैसी कुछ पारंपरिक फसलों की खेती के लिये गहरी जुताई की जरूरत होती है, लेकिन कुछ फसलों के लिये हल्की जुताई करने की सलाह दी जाती है.
इतना ही नहीं, बाजार में जुताई के लिये भी कई तरह की मशीनें यंत्र और कृषि उपकरण मौजूद है. ये पूरी तरह से किसान की जरूरत और फसल पर निर्भर करता है कि खेतों की जुताई कैसे करनी चाहिये. इसके लिये किसान कृषि वैज्ञानिकों से भी सलाह-मशवरा कर सकते हैं.
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. किसान भाई, किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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