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Bihar Voter List: Election Commission के नए Voter Registration नियमों पर उठे गंभीर सवाल
बिहार में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर एक गरमागरम बहस हुई। चर्चा के दौरान, एक वक्ता ने चुनाव आयोग पर मतदाता निद्रा अभियान चलाने का आरोप लगाया और कहा कि फॉर्म सिक्स में अपेक्षित दस्तावेजों को मान्य नहीं माना जा रहा है, जिससे बिहार के लाखों लोग, खासकर बाहर रह रहे पंजीकृत मजदूर, प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने डिजिटल डिवाइड का मुद्दा भी उठाया और कहा कि हर कोई ऑनलाइन प्रक्रिया में सहज नहीं है। यह भी आरोप लगाया गया कि चुनाव आयोग और मौजूदा सरकार के बीच कोई आंतरिक गठबंधन हो गया है, और सरकार अपनी मनपसंद जनता चुनना चाह रही है। एक वक्ता ने कहा, "चुनाव आयोग को अगर खुद अपने संवैधानिक होने का अपने विश्वसनीय होने की परवाह नहीं है, अपनी साख की परवाह नहीं है तो उसको चुल्लू भर पानी में डूब पड़ना चाहिए।" दूसरे वक्ता ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि डुप्लीकेसी हटाने के लिए मतदाता सूची का शुद्धिकरण आवश्यक है और ऑनलाइन प्रक्रिया से लोगों को सुविधा मिल रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि विरोधी दलों ने बूथ लेवल एजेंट क्यों नियुक्त नहीं किए। बहस में 2003 के पुनरीक्षण और CAA-NRC के भ्रम का भी जिक्र हुआ।
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