Mahakumbh 2025: गंगा की स्वच्छता पर बीजेपी प्रवक्ता और तर्कशास्त्री के बीच तीखी बहस! | ABP News
महाकुंभ में अब तक 60 करोड़ से भी ज्यादा श्रद्घालु संगम में स्नान कर चुके हैं...ये संख्या 2019 के प्रयागराज अर्धकुंभ में आए 24 करोड़ श्रद्धालुओं की संख्या से ढाई गुना से भी ज्यादा है....और अभी तो 4 दिन बाकी हैं...ऐसे में माना जा रहा है कि श्रद्घालुओं की संख्या 65 करोड़ के पार तक जा सकती है...क्योंकि अभी वीकेंड के साथ साथ 26 फरवरी को महाशिवरात्रि भी है...एक तरफ संगम किनारे आस्था का नया कीर्तिमान है....तो दूसरी तरफ उसकी संगम के जल की स्वच्छता पर सियासी घमासान है....इस घमासान की शुरुआत हुई संगम के जल की स्वच्छता पर आई 2 रिपोर्ट से...पहली रिपोर्ट केंद्र सरकार के पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने दी...रिपोर्ट में दावा किया गया कि प्रयागराज में गंगा का जल नहाने के भी लायक नहीं है यानी प्रयागराज में गंगा का जल बहुत ज्यादा प्रदूषित हो गया है...इस पर उत्तर प्रदेश के पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया कि संगम का जल पूरी तरह से शुद्ध है और जल स्नान के साथ साथ आचमन के भी लायक है...इन्हीं दोनों रिपोर्ट के नतीजों में अंतर पर समाजवादी पार्टी ने सवाल उठाए, अखिलेश यादव ने कहा कि दोनों की रिपोर्ट में अंतर नहीं ब्लंडर है...उन्होंने ये भी कहा कि अगर संगम का जल स्वच्छ है तो उसे बीजेपी के नेता अपने घरों में पीने और खाना बनाने के लिए इस्तेमाल करें...इस पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि खुद तो चुपचाप संगम में स्नान कर आए और अब महाकुंभ को बदनाम करने की साजिश की जा रही है...उन्होंने संगम के जल की स्वच्छता पर रिपोर्ट के आधार पर तारीखवार जानकारी दी...और कहा कि संगम का जल आचमन के भी योग्य है...लेकिन दोनों रिपोर्ट पर वार पलटवार अब भी जारी है...सवाल ये है कि आखिर किसकी रिपोर्ट को सही माना जाए..केंद्र सरकार की या यूपी सरकार की...दोनों की रिपोर्ट में विरोधाभास क्यों है...सवाल ये भी है कि क्या जानबूझकर यूपी सरकार को बदनाम करने की साजिश की जा रही है...औऱ आस्था से खिलवाड़ किया जा रहा है या फिर वाकई संगम के जल की स्वच्छता पर जो काम करना चाहिए था...वो नहीं किया गया ..इसी से जुड़े कई अहम सवालों पर महादंगल में आज इस ही पर जोरदार बहस...

























