Indore Mhow Violence: महू जुलूस के दौरान लगे नारों पर शुभ्रास्था और AIMIM नेता में तल्ख बहस | ABP News
MP News: बीती रात जिस समय पूरा देश भारत के विश्वविजेता बनने का जश्न मना रहा था...जिस समय देश में होली और दीवाली एक साथ मनाई जा रही थी...जिस समय सभी धर्मों के लोग भारत के चैंपियन बनने का उत्सव मना रहे थे...उसी समय मध्य प्रदेश के इंदौर में दो समुदायों के लोग आमने-सामने हो गए. इंदौर के महू में जब कुछ लोग भारत की जीत की ख़ुशी में जुलूस निकाल रहे थे तो अचानक हिंसा शुरू हो गई. हिंसा उस समय शुरू हुई जब जुलूस मस्जिद के सामने से निकल रहा था...लोग पत्थरबाज़ी करने लगे. गाड़ियों में आग लगाने लगे. डेढ़ से दो घंटे तक हिंसा का ये दौर चलता रहा. इस दौरान गाड़ियों, दुकानों और घरों को निशाना बनाया गया. पत्थरबाज़ी की घटनाओं में कई लोग घायल हो गए. एक पक्ष का कहना है कि मस्जिद के सामने धार्मिक नारे लगाए गए, मस्जिद में सुतली बम फेंका गया जिसकी वजह से हिंसा की शुरुआत हुई...वहीं दूसरे पक्ष का दावा है कि बिना किसी उकसावे के पत्थरबाज़ी की गई...उन्हें भारत की जीत का जश्न मनाने से रोका गया. पुलिस ने मौक़े पर पहुंचकर हालात को काबू करने के लिए पूरी ताकत लगा दी...कई थानों की पुलिस हिंसा की जगहों पर पहुंची और दंगाइयों को खदेड़ा...पुलिस की इन्हीं कोशिशों का नतीजा है कि आज हालात ठीक है...बीती रात के बाद हिंसा की कोई घटना सामने नहीं आई है. लेकिन इस हिंसा ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं...वो महू जिसकी पहचान संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर की जन्मस्थली के रूप में है, वो महू जो ब्रिटिश राज के दौरान दक्षिणी कमान की पांचवीं डिवीजन का मुख्यालय हुआ करता था, आज हिंसा की वजह से चर्चा में है. आज महादंगल में पूछेंगे आख़िर जीत के जश्न पर पत्थरबाज़ी क्यों? मैच के बहाने माहौल कौन बिगाड़ रहा है...क्या महू की घटना होली से पहले पत्थरबाजी का ट्रेलर है? सवाल ये भी कि जीत के जश्न में धार्मिक नारों का क्या काम? क्या धार्मिक नारे दूसरे धर्म के लोगों को चिढ़ाने का हथियार बन गए हैं? सवाल ये कि क्या हिंसा की साज़िश पहले से रची गई थी क्योंकि भारी तादाद में पत्थर मिले हैं? पुलिस को हिंसा की भनक क्यों नहीं लगी और सवाल ये भी कि आधी रात की पत्थरबाजी का सच क्या है.. क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं.


























