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Coronavirus: 3 मई के बाद भी सब पहले जैसा नहीं होगा..ये बात समझ लाजिए!
दुनिया के सामने कोरोना का खतरा था, है और शायद आगे भी रहेगा. अक्सर कहा जा रहा है कि हमें कोरोना के साथ जीने की आदत डालने होगी. भारत भी इससे अछूता नहीं है और आगे भी नही रहेगा लेकिन क्या सवाल ये है कि क्या भारत की भी वही दुर्गति है जो अमेरिका, इटली, स्पेन जैसे देशों की है? इसका जवाब है-नहीं. एक महीने के लॉकडाउन ने कोरोना पर ब्रेक लगाया है. केस बढ़ रहे हैं. मरीज बढ़ रहे हैं. मौत भी हो रही है लेकिन सरकार का आकलन है कि अगर लॉकडाउन नहीं होता तो हालात और बुरे होते. कोरोना के केस, रिकवरी रेट-ऐसे कई मामलों में भारत बाकी दुनिया से बेहतर कर रहा है लेकिन कोरोना को कंट्रोल को मानने का कोई कारण नहीं बनता क्योंकि अभी भी सोशल डिस्टेंसिंग जिसे पीएम ने आज दो गज की दूरी नाम दिया है उसकी जरूरत है. लॉकडाउन की जरूरत है.
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