क्या अफगानिस्तान से पीछा छुड़ाने के चक्कर में अमेरिका ने दुनिया को आतंकवाद की आग में झोंक दिया है?
9/11 को अमेरिका में हमला हुआ. बदला लेने के लिए अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को ढूंढकर मारा. उसके बाद लगने लगा कि आतंक कमजोर पड़ जाएगा.. फिर ISI ने दुनिया भर में सिर उठाना शुरू किया. ISIS का आका अबू बक्र अल बगदादी मारा गया, फिर लगने लगा कि आतंक कमजोर पड़ रहा है.. लेकिन जब भी ऐसा लगता है कि, आतंकवाद पर प्रहार के बाद अब वो दोबारा सिर उठाने की हिम्मत नहीं दिखा पाएगा, तब तब कुछ ऐसा हो जाता है कि, फिर वही सवाल उठने लगते हैं. क्या 20 साल बाद भी हम वहीं पर खड़े हैं, क्योंकि, जिस आतंकवाद ने हजारों बेगुनाहों को खून बहाया, कइयों को अनाथ और बेसहारा किया, वही आतंकवाद हर बार कैसे हावी हो जाता है? वही आतंकवाद कैसे सत्ता में लौट जाता है? अफगानिस्तान को देखिए, वहां भी कैसे फिर से तालिबान सरकार बन गई, और बेधड़क आतंकवादियों को मंत्री पद मलाई की तरह बांट दिए गए. दुनिया के तमाम ताकतवर देश सिर्फ देखते रह गए.




























