TMC News: TMC से NCPI की ओर रुख...आखिर क्यों बदल रहे हैं सांसदों के राजनीतिक रास्ते? समझिए |ABPLIVE
20 सांसद... एक नई पार्टी... और ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका,, लेकिन कहानी का सबसे हैरान करने वाला हिस्सा ये नहीं है। असली हैरानी ये है कि जिन सांसदों के जाने की चर्चा हो रही है, वो किसी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी में नहीं बल्कि ऐसी पार्टी में जा रहे हैं जिसने अपने पहले चुनाव में कुल मिलाकर सिर्फ 1198 वोट हासिल किए थे। , जिस पार्टी का नाम शायद आज से पहले देश के ज्यादातर लोगों ने कभी सुना भी नहीं होगा, वही पार्टी अचानक दिल्ली से लेकर कोलकाता तक चर्चा के केंद्र में आ गई है। पार्टी का नाम है NCPI यानी नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया। अब सवाल ये है कि आखिर ये NCPI है कौन? इसका जनाधार कितना है? क्या ये कोई नई राजनीतिक ताकत बनकर उभर रही है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक गणित छिपा हुआ है? क्योंकि इस पूरी कहानी में सिर्फ टीएमसी की बगावत नहीं है, बल्कि संसद के नियम, दल-बदल कानून और बंगाल की भविष्य की राजनीति भी जुड़ी हुई है। दरअसल पिछले कुछ समय से तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। लेकिन अब जो दावा किया जा रहा है, उसने पूरे राजनीतिक माहौल को हिला दिया है। कहा जा रहा है कि टीएमसी के करीब 20 सांसदों का एक बड़ा समूह पार्टी से अलग होकर NCPI में शामिल होने जा रहा है। यही वजह है कि एक लगभग गुमनाम पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीति की सबसे बड़ी चर्चाओं में शामिल हो गई है। अब जरा समझते हैं कि आखिर NCPI की कहानी क्या है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI का गठन साल 2023 में हुआ था। पार्टी ने उसी साल त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारे थे। चुनाव आयोग में दर्ज दस्तावेज बताते हैं कि यह एक पंजीकृत राजनीतिक दल है और उसने अपने वित्तीय रिकॉर्ड भी आयोग को सौंपे थे। चुनाव में पार्टी को चुनाव चिन्ह के तौर पर सात किरणों वाली पेन की निब मिली थी।
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