8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग में टैक्स में छूट की बड़ी डिमांड, केंद्रीय कर्मचारियों को होगा और भी फायदा
8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग के सामने नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के स्टाफ पक्ष ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक नई डिमांड रखी है. इससे टैक्स का बोझ काफी कम हो जाएगा.

- आठवां वेतन आयोग इस छूट की सिफारिश करे, ऐसी उम्मीद है.
8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारी आठवें वेतन आयोग के लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. वेतन आयोग भी इसे लेकर फिलहाल एक्शन मोड में है. देश के तमाम राज्यों में कर्मचारी यूनियनों के साथ मीटिंग की जा रही है, उनसे उनके सुझाव लिए जा रहे हैं, उनकी मांगों को ध्यान से सुना जा रहा है. इस बीच, नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के स्टाफ पक्ष ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए राज्यों द्वारा उनसे वसूले जाने वाले प्रोफेश्नल टैक्स (Professional Tax) से पूरी तरह से छूट दिए जाने का प्रस्ताव रखा है.
प्रोफेश्नल टैक्स क्या होता है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 276 के तहत सभी राज्य सरकारों के पास प्रोफेश्नल टैक्स लगाने और वसूलने का अधिकार है. यह राज्य में अलग-अलग टैक्स स्लैब के आधार पर काटा जाता है. हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 2500 रुपये सालाना तय की गई है. जिन केंद्रीय कर्मचारियों ने Old Tax Regime को चुना है, उन्हें आयकर अधिनियम की धारा 16(3) के तहत सैलरी से कटे प्रोफेश्नल टैक्स पर छूट मिलती है. जबकि नई टैक्स व्यवस्था में ऐसी कोई छूट नहीं मिलती है.
कर्मचारी यूनियनों की क्या है डिमांड?
कर्मचारी पक्ष का तर्क है कि केंद्रीय कर्मचारी पहले से ही केंद्र सरकार को भारी-भरकम टैक्स का भुगतान करती है. रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के इस्तेमाल पर उनसे GST (वस्तु एवं सेवा कर) भी वसूला जा रहा है. इन सबके बाद राज्यों द्वारा उनकी सैलरी से प्रोफेश्नल टैक्स काटना उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालती है. NC-JCM के स्टाफ पक्ष ने आयोग को सौंपे गए अपने मेमोरेंडम में कहा है कि 8वां वेतन आयोग अपनी फाइनल रिपोर्ट में सभी केंद्रीय कर्मचारियों को प्रोफेश्नल टैक्स से मुक्त किए जाने की सिफारिश को भी शामिल करें.
राज्य सरकारें क्यों लगाती हैं प्रोफेश्नल टैक्स?
राज्य सरकारें रेवेन्यू जुटाने के लिए प्रोफेश्नल टैक्स लगाती है क्योंकि उनके पास टैक्स लगाने के साधन बहुत कम है. डायरेक्ट टैक्स का एक बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार को जाता है. ऐसे में राज्य में स्वास्थ्य, शिक्षा और सरकारी योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार प्रोफेश्नल टैक्स लगाती है. इससे जुटाए गए फंड को नगर निगमों या स्थानीय निकायों को ट्रांसफर कर दिया जाता है, जो इन पैसों का इस्तेमाल शहर में साफ-सफाई, पानी की सप्लाई, सड़कों के रखरखाव, स्ट्रीट लाइट लगाने, पार्क वगैरह बनाने में करती है.
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